कोटेड पेपर्स पर एंटी डंपिंग चार्ज न लगाने की केंद्र सरकार से की मांग…

यूके की पीजी पेपर्स कंपनी ने भारत सरकार से गुहार लगाई है कि कोटेड पेपर्स पर वे एंटी डंपिंग चार्ज न लगाएं. कंपनी का कहना है कि डंपिंग चार्ज लगाने से अमेरिकन और यूरोपियन पेपर सप्लायर्स  पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा. ये सभी लोग पर्यावरण हितों को ध्यान में रखते हुए कोटेड कागज का उत्पादन करते हैं.कोटेड पेपर्स पर एंटी डंपिंग चार्ज न लगाने की केंद्र सरकार से की मांग...

कंपनी की सीईओ पूनम गुप्ता ने कहा कि कोटेड पेपर्स पर पहले ही 10 फीसदी आयात शुल्क लगाया जाता है. ऐसे में एक और टैक्स लगाना ठीक नहीं है. उन्होंने कहा कि हल्के कोटेड पेपर्स का भारत में निर्माण नहीं किया जाता. ऐसे में ये भारत में मैन्यूफैक्चरिंग इंडस्ट्री पर किसी तरह से खतरा नहीं है. उन्होंने कहा कि कोटेड पेपर के निर्माण में पानी और जंगल में उगने वाले पेड़-पौधों जैसे प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल किया जाता है, जो भारत में पहले से ही पर्याप्त नहीं हैं.

कंपनी इस सिलसिले में जल्द ही वित्त मंत्री अरुण जेटली और वाणिज्य और उद्योग मंत्री सुरेश प्रभु को पत्र लिखकर अमेरिका और यूरोप से आने वाले कोटेड पेपर्स पर और टैक्स न लगाने की मांग करेगी. वाणिज्य मंत्रालय के तहत आने वाले एंटी डंपिंग एंड एलाइड ड्यूटी के महानिदेशालय (DGAD) घरेलू उद्योग को बचाने के लिए इम्पोर्टेड कोटेड पेपर्स पर एंटी डंपिंग चार्ज लगा रहा है.   

कोटेड पेपर्स का इस्तेमाल मुख्य तौर पर मैग्जीन, कैटलॉग, किताब, कैलेंडर, ब्रोशर और पैंकिंग में किया जाता है. पूनम गुप्ता ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है. ऐसे में पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए पेपर इंडस्ट्री का स्थायी विकास भी देश के आर्थिक विकास में सहायक साबित होगा.

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