क्या आप जानते हैं इन अधिकारियों से भी कम है देश के राष्ट्रपति और उप राष्ट्रपति की सैलरी

देश के राष्ट्रपति और उप राष्ट्रपति का वेतन देश के शीर्ष नौकरशाहों और सेवा प्रमुखों से कम है। ऐसा इसलिए है क्योंकि दो साल पहले सातवें आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद सरकारी कर्मचारियों के वेतन में काफी इजाफा हुआ, लेकिन राष्ट्रपति के वेतन में 2008 के बाद कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है।क्या आप जानते हैं इन अधिकारियों से भी कम है देश के राष्ट्रपति और उप राष्ट्रपति की सैलरी
गृह मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक गृह मंत्रालय ने राष्ट्रपति, उप राष्ट्रपति और गवर्नर का वेतन बढ़ाने के लिए प्रस्ताव तैयार किया था। इसे केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी के लिए कैबिनेट सचिवालय के पास एक साल पहले भेजा गया। पर आज तक इस पर कोई फैसला नहीं लिया गया।

कैबिनेट सचिव से एक लाख कम वेतन पाते महामहिम
वर्तमान में राष्ट्रपति का वेतन 1.50 लाख रुपये, उप राष्ट्रपति का 1.25 लाख रुपये और राज्यों के गवर्नर का वेतन 1.10 लाख है। वहीं देश के सबसे बड़े नौकरशाह कैबिनेट सचिव एक जनवरी, 2016 से 2.5 लाख रुपये प्रति माह का वेतन उठा रहे हैं। 

वहीं राष्ट्रपति तीनों सेनाओं थल सेना, वायु सेना और नौ सेना के कमांडर हैं। पर महामहिम का वेतन तीनों सेना प्रमुखों से कम है। सेना प्रमुखों का वेतन कैबिनेट सचिव के बराबर है। जब सरकार के प्रवक्ता से राष्ट्रपति का वेतन बढ़ाने संबंधी प्रस्ताव की मंजूरी में देरी का कारण पूछा गया, तो उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

पांच लाख वेतन करने का प्रस्ताव
गृह मंत्रालय ने जो प्रस्ताव तैयार किया है, उसके मुताबिक राष्ट्रपति का वेतन पांच लाख, उप राष्ट्रपति का वेतन 3.5 लाख और गवर्नर का तीन लाख रुपये प्रति माह हो जाएगा। इससे पहले इन तीनों संवैधानिक पदों का वेतन 2008 में बढ़ा था, तब इसमें तीन गुने की वृद्धि की गई थी। 

2008 से पहले राष्ट्रपति का वेतन 50 हजार रुपये, उप राष्ट्रपति का वेतन 40 हजार रुपये और गवर्नर का वेतन 36 हजार रुपये था। इस प्रस्ताव में पूर्व राष्ट्रपति, उप राष्ट्रपति, उनकी विधवा और गवर्नर की पेंशन बढ़ाने की बात है।

 

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