क्या आप जानते हैं , ‘नर्क के द्वार’ के बारे में ?

दुनिया में कई रहस्यमयी स्थल हैं, जिनके बारे में पता लगाने में आज तक वैज्ञानिक भी नाकाम रहे हैं . ऐसी ही एक जगह है ‘नर्क का द्वार.’ यानि ‘डोर टू हेल’.  यह जगह तुर्कमेनिस्तान के देरवेज़े गाँव में स्थित है. तुर्कमेनिस्तान के देरवेज़े गाँव में धरती का नर्क का द्वार है. यहाँ पर जमीन में एक छेद है जिससे विशालकाय अग्नि की लपटे 24 घंटे निकलती रहती हैं. यह गड्ढा 70 मीटर चौड़ा है और इसकी गहराई मापी नहीं जा सकी है.दुनिया में कई रहस्यमयी स्थल हैं, जिनके बारे में पता लगाने में आज तक वैज्ञानिक भी नाकाम रहे हैं . ऐसी ही एक जगह है 'नर्क का द्वार.' यानि 'डोर टू हेल'.  यह जगह तुर्कमेनिस्तान के देरवेज़े गाँव में स्थित है. तुर्कमेनिस्तान के देरवेज़े गाँव में धरती का नर्क का द्वार है. यहाँ पर जमीन में एक छेद है जिससे विशालकाय अग्नि की लपटे 24 घंटे निकलती रहती हैं. यह गड्ढा 70 मीटर चौड़ा है और इसकी गहराई मापी नहीं जा सकी है.  इस लड़की ने यूरिनल पॉट में खाया खाना, वीडियो वायरल    यह नर्क का द्वार तुर्कमेनिस्तान की राजधानी अश्गाबात से लगभग 260 किमी दूर स्थित काराकुम रेगिस्तान के बीचों-बीच स्थित है. आग उगलते इस विशाल छेद के पीछे की एक वास्तविक कहानी छुपी हुई है इसके बारे में जानकर आप हैरान रह जाएंगे. इसकी खोज आज से 47 साल पहले 1971 में हुई थी. उस समय सोवियत वैज्ञानिकों की एक टीम यहाँ प्राकृतिक गैस का भंडार तलाशने आई थी.  यहाँ माँ बनने के बाद ही हो पाती है शादी    खुदाई करते हुए नीचे एक गैस से भरी हुए बड़ी गुफ़ा तक पहुँच गए, गुफा के नीचे की जमीन प्राकृतिक गैस का भंडार है. खुदाई के दौरान गुफा की छत नीचे गिर गई और जहरीले गैस लीक होने लगी. स्थानीय लोगों को इस गैस से परेशानी होने लगी. गैस के रिसाव को रोकने के लिए यह आग लगा दी गई. अनुमान था कि कुछ दिनों में यह आग शांत हो जाएगी. लेकिन ये आग आज तक इस गड्डे में धधक रही है. इस आग को धधकते हुए आज 47 साल हो गए हैं लेकिन कोई इसका रहस्य नहीं जान पाया.

यह नर्क का द्वार तुर्कमेनिस्तान की राजधानी अश्गाबात से लगभग 260 किमी दूर स्थित काराकुम रेगिस्तान के बीचों-बीच स्थित है. आग उगलते इस विशाल छेद के पीछे की एक वास्तविक कहानी छुपी हुई है इसके बारे में जानकर आप हैरान रह जाएंगे. इसकी खोज आज से 47 साल पहले 1971 में हुई थी. उस समय सोवियत वैज्ञानिकों की एक टीम यहाँ प्राकृतिक गैस का भंडार तलाशने आई थी.

खुदाई करते हुए नीचे एक गैस से भरी हुए बड़ी गुफ़ा तक पहुँच गए, गुफा के नीचे की जमीन प्राकृतिक गैस का भंडार है. खुदाई के दौरान गुफा की छत नीचे गिर गई और जहरीले गैस लीक होने लगी. स्थानीय लोगों को इस गैस से परेशानी होने लगी. गैस के रिसाव को रोकने के लिए यह आग लगा दी गई. अनुमान था कि कुछ दिनों में यह आग शांत हो जाएगी. लेकिन ये आग आज तक इस गड्डे में धधक रही है. इस आग को धधकते हुए आज 47 साल हो गए हैं लेकिन कोई इसका रहस्य नहीं जान पाया. 

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