क्या सच में लोकप्रियता घटने से घबरा गए हैं पीएम मोदी?

आज गुजरात विधानसभा चुनाव प्रचार का आखिरी दिन है, लेकिन जिस तरह से पिछले एक सप्ताह के प्रचार में नए मुद्दों ने जगह बनाई है, उससे भाजपा के नेता भी हैरान हैं। सबसे बड़ी हैरानी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर हो रही है।क्या सच में लोकप्रियता घटने से घबरा गए हैं पीएम मोदी?मोदी पर तंज कसते हुए राहुल ने कहा- पाकिस्तान और चीन की बात करते हैं PM, गुजरात की नहीं

केंद्र सरकार के एक दमदार केंद्रीय मंत्री को भी प्रधानमंत्री की ओर से अचानक पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को केंद्र में रखकर पाकिस्तान का मुद्दा उछालना रास नहीं आ रहा है। वहीं गुजरात चुनाव प्रचार से लौट रहे भाजपा के वरिष्ठ नेता ने भी निजी बातचीत में हैरानी जताई।

पार्टी के वरिष्ठ नेता, सोनिया गांधी के खिलाफ रायबरेली से चुनाव लड़ चुके और उच्चतम न्यायालय के वकील अजय अग्रवाल भी फोन पर बातचीत के दौरान मणिशंकर अय्यर के घर पाकिस्तान के पूर्व विदेशमंत्री और राजनयिक के साथ बैठक को लेकर असहज दिखे।

इस पूरे मामले को लेकर कांग्रेस पार्टी के नेता प्रधानमंत्री द्वारा गुजरात विधानसभा चुनाव में दिखाई पड़ रही हार को कारण मान रहे हैं। रणदीप सुरजेवाला, आनंद शर्मा, अशोक गहलोत और यहां तक कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी इसे चुनाव में दिखाई दे रही हार की घबराहट बताया।

ये है पूरा माजरा
अजय अग्रवाल जंगपुरा एक्सटेंशन, नई दिल्ली स्थित अपने आवास से 6 दिसंबर को जा रहे थे। उन्होंने जी-ब्लॉक में पूर्व केंद्रीय मंत्री मणिशंकर अय्यर के घर के बाहर भारी पुलिस बल की तैनाती देखी। अजय ने जानकारी ली तो पता चला कि यहां पाकिस्तान के  राजनयिक आ रहे हैं, पार्टी है।

इसके अलावा इस बैठक में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी समेत तमाम लोग हिस्सा लेंगे। ऐसा हुआ भी। इसमें पूर्व  सेनाध्यक्ष जनरल दीपक कपूर, पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह, पूर्व विदेश सचिव सलमान हैदर, टीसीए राघवन, शरत सब्बरवाल समेत अन्य लोग शामिल हुए। यह एक शिष्टाचार की भेंट मुलाकात और पार्टी थी।

इसलिए हुई बैठक

पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद महमूद कसूरी समेत कुछ लोग नई दिल्ली के अनंत सेंटर में भारत-पाकिस्तान के संबंधों पर आयोजित सम्मेलन में हिस्सा लेने आए थे। मणिशंकर अय्यर पूर्व राजनयिक, कांग्रेस के विदेश विभाग में सक्रिय और पूर्व केंद्रीय मंत्री हैं। यही स्थिति नटवर सिंह की भी है।

सलमान हैदर, टीसीए राघवन, शरत सब्बरवाल भी पूर्व राजनयिक की श्रेणी में आते हैं। समझा जा रहा है कि इसी कड़ी में कसूरी समेत अन्य के साथ भेंट, बुद्धजीवियों की चर्चा के लिए इस पार्टी, डिनर का आयोजन हुआ था। अंतरराष्ट्रीय संबंधों में यह एक सामान्य प्रक्रिया मानी जाती है।

जैसा कि पार्टी में शामिल लोग बता रहे हैं, इसमें पाकिस्तान-भारत के संबंध, पहल, वहां के आतंकी सरगना हाफिज मोहम्मद सईद, उसके द्वारा नई राजनीतिक पार्टी बनाए जाने समेत अन्य मुद्दों पर चर्चा हुई। हंसी-ठहाके के बीच आपसी विचार का भी साझा हुआ। पूर्व प्रधानमंत्री इस पार्टी में केवल रात्रिभोज में शामिल हुए।

जुड़ गया गुजरात चुनाव
सात दिसंबर को मणिशंकर अय्यर ने टीवी रिपोर्टर को बयान दिया। इसमें उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को अपशब्द कहा। इससे अजय अग्रवाल ने अंदाजा लगाया कि पार्टी में निश्चित रूप से गुजरात विधानसभा चुनाव को प्रभावित करने पर चर्चा हुई थी। यह पाकिस्तान की साजिश का हिस्सा है।  

पार्टी और मणिशंकर के बयान को जोड़ते हुए उन्होंने इसके बाबत बयान जारी कर दिया। अजय अग्रवाल के बयान को नौ दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लपक लिया और उन्होंने इसमें एक कड़ी और जोड़ते हुए अहमद पटेल को गुजरात का मुख्यमंत्री बनाने की बात भी जोड़ दी। आगे भी प्रधानमंत्री अपने बयान पर कायम रहे और कहा कि पाकिस्तान गुजरात विधानसभा चुनाव को प्रभावित करने में लगा है।

अजय अग्रवाल की सफाई

अजय अग्रवाल फोन पर अपने दावे से पीछे नहीं हट रहे हैं। उनका कहना है कि पार्टी, बैठक और रात्रिभोज में निश्चित रूप से यह चर्चा हुई है। वह पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर भी आरोप लगा रहे हैं और उन्हें कांग्रेस पार्टी से निकालने की मांग कर रहे हैं, लेकिन साथ में उन्होंने स्वीकार किया कि दोनों (भाजपा, कांग्रेस) तरफ से मतदाताओं के ध्रुवीकरण की  कोशिश हो रही है।

अग्रवाल का कहना है कि राजनीति में यह चलता है। अजय अग्रवाल का कहना है कि उन्हें जो लगा उन्होंने अपना काम कर दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से इस मुद्दे को उठाने के लिए कहा था। प्रधानमंत्री ने खुद इसे जरूरी समझकर उठाया है।

पार्टी के भीतर मची है हलचल
अजय अग्रवाल की कोशिश और प्रधानमंत्री के बयान के बाद भाजपा के भीतर भी इसे लेकर एक हलचल है। कोई कुछ नहीं बोल रहा है, लेकिन इस मुद्दे ने कई वरिष्ठ नेताओं के माथे पर पसीना ला दिया है। पार्टी के नेता और सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने अपनी नाराजगी सार्वजनिक कर दी है, लेकिन मार्ग दर्शक मंडल से जुड़े सूत्र को भी प्रधानमंत्री का बयान हजम नहीं हो रहा है।

पार्टी के अंदरखाने से खबर है कि अनामत आंदोलन समिति के नेता हार्दिक पटेल और कांग्रेस की सोशल इंजीनियरिंग ने भाजपा की नींद उड़ा दी है। पार्टी अध्यक्ष अमित शाह और प्रधानमंत्री मोदी गुजरात विधानसभा चुनाव की कोई अप्रिय खबर सुनने और उसे सह पाने के मूड में कदापि नहीं हैं। पार्टी इसलिए 182 विधानसभा वाले राज्य में सफलता पाने का हर प्रयास कर रही है।

गीली पिच पर खेल रही भाजपा
संसद का सत्र शुरू होने में कुछ दिन की देर है। इसके बाद 18 दिसंबर को गुजरात और हिमाचल विधानसभा चुनाव के नतीजे आएंगे। हिमाचल से भाजपा को पूरी उम्मीद है। गुजरात में भाजपा 22 साल से सत्ता में है और इस बार गीली पिच पर खेल रही है। ऐसे में कोई भी अप्रिय खबर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की परेशानी सबसे ज्यादा बढ़ाएगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह गुजरात से ही हैं। ऐसे में पार्टी के भीतर विरोधियों के न केवल मुखर होने का खतरा रहेगा, बल्कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ को भाजपा तथा केंद्र सरकार पर दबाव बढ़ाने का अवसर मिलेगा। केंद्र सरकार की छवि को भी धक्का लगेगा, क्योंकि अगले साल वित्त मंत्री अरुण जेटली अगले वित्त वर्ष का बजट भी पेश करेंगे। अगले साल कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं।

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