खाना खाकर बीजेपी ने फिर खेला दलित कार्ड

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दलितों के घर में खाना खा रहे है जो 2019 लोकसभा के चुनाव की तैयारी है. दो उप-चुनाव में मिली हार के बाद योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में यह ऐलान किया था कि सरकार जल्द ही पिछड़ी जातियों और दलितों में आरक्षण के भीतर आरक्षण का प्रावधान कर सकती है. योगी सरकार में मंत्री ओमप्रकाश राजभर के मुताबिक इस बारे में सरकार चुनाव के 6 महीने पहले आखिरी फैसला ले सकती है और इस बात की चर्चा उन्होंने मुख्यमंत्री और अमित शाह दोनों से खुद की है.लखनऊ :उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दलितों के घर में खाना खा रहे है जो 2019 लोकसभा के चुनाव की तैयारी है. दो उप-चुनाव में मिली हार के बाद योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में यह ऐलान किया था कि सरकार जल्द ही पिछड़ी जातियों और दलितों में आरक्षण के भीतर आरक्षण का प्रावधान कर सकती है. योगी सरकार में मंत्री ओमप्रकाश राजभर के मुताबिक इस बारे में सरकार चुनाव के 6 महीने पहले आखिरी फैसला ले सकती है और इस बात की चर्चा उन्होंने मुख्यमंत्री और अमित शाह दोनों से खुद की है.  ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि आरक्षण के भीतर आरक्षण लागू करने के लिए योगी सरकार राजनाथ सिंह के द्वारा जून 2001 में बनाए गए सामाजिक न्याय समिति की रिपोर्ट को आधार बना सकती है, जिसमें सरकार पिछड़ी जातियों में 'ए' 'बी' और 'सी' तीन सब- कैटेगरी बना सकती है. सामाजिक न्याय समिति की रिपोर्ट के मुताबिक पिछड़ों को मिलने वाले 27 फीसदी आरक्षण में करीब 2.3 फीसदी जातियां ही पिछड़ी जातियों का पूरा आरक्षण निगल जाती हैं.  ऐसे में पिछड़ा, अति पिछड़ा और अत्यंत पिछड़ा तीन कैटेगरी में आरक्षण को विभाजित किया जाए. 'ए' कैटेगरी में यादव और अहिर सरीखी संपन्न जातियां होंगी जबकि 'बी' कैटेगरी अति पिछड़ी होगी जिसमें कुशवाहा, मौर्य, शाक्य, सैनी जैसी दूसरी जातियां होंगी जबकि अत्यंत पिछड़ी जातियों में मल्लाह, निषाद, बढ़ई, लोहार जैसी जातियां होंगी.

ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि आरक्षण के भीतर आरक्षण लागू करने के लिए योगी सरकार राजनाथ सिंह के द्वारा जून 2001 में बनाए गए सामाजिक न्याय समिति की रिपोर्ट को आधार बना सकती है, जिसमें सरकार पिछड़ी जातियों में ‘ए’ ‘बी’ और ‘सी’ तीन सब- कैटेगरी बना सकती है. सामाजिक न्याय समिति की रिपोर्ट के मुताबिक पिछड़ों को मिलने वाले 27 फीसदी आरक्षण में करीब 2.3 फीसदी जातियां ही पिछड़ी जातियों का पूरा आरक्षण निगल जाती हैं.

ऐसे में पिछड़ा, अति पिछड़ा और अत्यंत पिछड़ा तीन कैटेगरी में आरक्षण को विभाजित किया जाए. ‘ए’ कैटेगरी में यादव और अहिर सरीखी संपन्न जातियां होंगी जबकि ‘बी’ कैटेगरी अति पिछड़ी होगी जिसमें कुशवाहा, मौर्य, शाक्य, सैनी जैसी दूसरी जातियां होंगी जबकि अत्यंत पिछड़ी जातियों में मल्लाह, निषाद, बढ़ई, लोहार जैसी जातियां होंगी.

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