खुलासाः देश के इस नेशनल पार्क में बड़ी संख्या में बाघों का हो रहा है शिकार

देश के इस नेशनल पार्क में बड़ी संख्या में बाघों का शिकार हुआ है। इसका खुलासा वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (डब्ल्यूआईआई) की जांच में हुआ है।खुलासाः देश के इस नेशनल पार्क में बड़ी संख्या में बाघों का हो रहा है शिकारअब राशन कार्ड पर दर्ज हर सदस्य का आधार होगा लिंक

कार्बेट नेशनल पार्क में बड़ी संख्या में बाघों का शिकार हुआ था, यह बात एक बार फिर साबित हुई है। दिसंबर-2015 में नेपाल में बरामद खाल कार्बेट पार्क में शिकार किए गए बाघ की है। इसका खुलासा वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (डब्ल्यूआईआई) की जांच में हुआ है।

इसके पूर्व भी छह अन्य खालों की पड़ताल में यह पाया गया था कि शिकार किए गए बाघ कार्बेट पार्क के थे। ताजा रिपोर्ट से कार्बेट पार्क में बाघों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं। यह स्थिति देख मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने डब्ल्यूआईआई से कार्बेट पार्क के बाघों का नए सिरे से कैमरा ट्रैप के जरिये अध्ययन करके पुराने रिकार्ड से मिलान करने के लिए कहा है।

कार्बेट पार्क और वनाधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल

नेपाल में सुनसरीमा जिले में दिसंबर-2015 में बाघ की खाल बरामद हुई थी। इसके बाद मार्च-2016 में हरिद्वार जिले में छह खालें एसटीएफ ने बरामद की थीं। इसके बाद से खलबली मची थी। कार्बेट पार्क और वनाधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठे थे। उस वक्त डब्ल्यूआईआई कैमरा ट्रैप के माध्यम से इन खालों के मिलान का काम कर रहा था, जिसे कलई खुलने के चक्कर में रोक दिया गया था।

दिसंबर-2015 में नेपाल में जो खाल पकड़ी गई थी, उसके बारे में संदेह था कि यह खाल भी कार्बेट पार्क के बाघ की है। इसके बाद मुख्यमंत्री से लेकर पीएमओ तक मामले की शिकायत की गई। बहरहाल, डब्ल्यूआईआई ने नेपाल में मिली बाघ की खाल और अपने रिकार्ड (कैमरा ट्रैप में आई बाघ की फोटो और उसके शरीर पर बनी खास धारियों) से मिलान कर लिया है।

वैज्ञानिक डॉ. वाईएस झाला के अनुसार नेपाल में मिली बाघ की खाल और पुराने रिकार्ड में मौजूद बाघ की डिटेल से मिलान कर लिया गया है। जो खाल बरामद हुई है, वह कार्बेट पार्क के बाघ की है। वहीं, शिकायतकर्ता राजीव मेहता के अनुसार नेपाल में हरिद्वार में पकड़े गए शिकारी बावरिया होने के साथ हरियाणा के थे। ऐसे में दोनों गिरोह एक हो सकते हैं या दोनों में संबंध हो सकता है। इस पहलू पर भी जांच की जानी चाहिए थी, जो नहीं हुई।

बाघ हमारा, शिकार कहीं और हुआ

मार्च, 2016 में बाघ की जो खाल बरामद हुई थी, उसकी कैमरा ट्रैप में फोटो थी। लेकिन, वनाधिकारी बाघों का शिकार कहीं और होने की बात कहते रहे, जबकि वन्यजीव विशेषज्ञ इस थ्योरी से सहमत नहीं थे। उनके अनुसार जंगल में दो तरह के बाघ होते हैं, इसमें एक ट्रांजिट और दूसरे को रेजीडेंट टाइगर कहा जाता है। रेजीडेंट बाघ का अपना एक इलाका होता है, जहां वह शिकार करता है। वहीं बुजुर्ग जैसे खदेड़े गए बाघ का इलाका नहीं होता है, वह घूमते रहते हैं। ऐसे में छह बाघ कार्बेट पार्क की सीमा से निकल कर एक के बाद एक बाहर जाते रहे और शिकारी आराम से शिकार करते रहे। वनाधिकारियों का यह दावा हैरान करने वाला है।

चीन में वन्यजीव अंग का बड़ा बाजार
कार्बेट पार्क से नेपाल की दूरी अधिक नहीं है। ऐसे में शिकारियों की पूरी कोशिश रहती है कि वन्यजीव अंगों को शीघ्र नेपाल पहुंचा दिया जाए। शिकारी आराम से रामनगर से बनबसा बार्डर होते हुए नेपाल पहुंच जाते हैं। बताया जाता है कि यहां से वन्यजीव अंगों को चीन पहुंचाया जाता है। जहां पर सबसे ज्यादा डिमांड होती है। नेपाल में शिकारियों, तस्करों के पहुंचने से सुरक्षा एजेंसियां कुछ नहीं कर पाती हैं। सात साल पहले कुख्यात तोताराम शिकारी को पकड़ने के लिए तराई पूर्वी वन प्रभाग की टीम नेपाल में घुस गई थी। बाद में इसे लेकर काफी हंगामा हुआ था। बड़ी मुश्किल से तराई पूर्वी वन प्रभाग की टीम नेपाल से बाहर आ सकी थी। इसके बाद वन विभाग की टीम केवल अपने इलाके में ही आपरेशन चलाती रही है।

दवाओं में इस्तेमाल
बताया जाता है कि बाघ की हड्डियों का इस्तेमाल यौन शक्ति बढ़ाने वाली दवाओं के निर्माण में होता है। इसके अलावा बाघ की खाल से तैयार जैकेट आदि की काफी मांग होती है, इसके लिए शौकीन लोग कोई भी कीमत देने को तैयार रहते हैं। कार्बेट पार्क की सुरक्षा को लेकर राज्य से लेकर केंद्र सरकार तक चिंतित रहती है। कार्बेट पार्क में करोड़ों रुपये की आधुनिक सुरक्षा की ई-आई योजना (सेंसर और कैमरे लगे होते हैं) को शुरू किया गया। केंद्र से आपरेशन लार्ड के जरिये अलग से बजट मिलता है। इसमें अस्थायी तौर पर लोगों को सुरक्षा के लिए रखा जाता है। बड़ी संख्या में टूरिस्टों का मूवमेंट भी होता है, उसके बाद भी शिकारी आराम से बाघ को ढेर कर देते हैं।

You May Also Like

English News