गठबंधन की अनोखी शर्त: मनसे का शिवसेना में विलय करें राज ठाकरे

मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनाव में भाजपा को धूल चटाने के  लिए शुरू हुई ठाकरे बंधुओं में एकता की कवायद को करारा झटका लगा है। पहले शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने अपने चचेरे भाई राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) से गठबंधन को सिरे से नकार दिया और अब शिवसेना मुख्यालय से एक संदेश जारी हुआ है जिससे राज ठाकरे की राजनीतिक जमीन खिसक सकती है। शिवसेना की ओर से कहा गया है कि यदि मुंबई में मराठी मतों का बंटवारा रोकना है तो राज ठाकरे अपनी पार्टी से उम्मीदवार न उतारें बल्कि मनसे का शिवसेना में विलय कर दें।
गठबंधन की अनोखी शर्त: मनसे का शिवसेना में विलय करें राज ठाकरे

ओपिनियन पोल: यूपी में सपा-कांग्रेस गठबंधन बनाएगी सरकार, और ये होगा भाजपा हश्र?

इस बीच मंगलवार को शिवसेना मुख्यालय से सोशल मीडिया पर एक संदेश वायरल हुआ जिसमें कहा गया है कि यदि बीएमसी चुनाव में मनसे को बिना शर्त समर्थन देना है तो अपने उम्मीदवार न उतारें और मनसे का शिवसेना में विलय कर दें। संदेश में कहा गया है कि जिस तरह लोकसभा में नरेंद्र मोदी के  समर्थन में मनसे ने अपना उम्मीदवार नहीं उतारा था उसी तरह बीएमसी चुनाव में भी  शिवसेना को बिना शर्त दे, तो मनसे पर विश्वास किया जा सकता है। अन्यथा समझा जाएगा कि मनसे ने बीजेपी की सुपारी ली है।

बता दें कि राज ठाकरे ने अपने चाचा शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे के जीवित रहते उद्धव ठाकरे से नाराजगी के चलते शिवसेना से अलग होकर नौ मार्च 2006 में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना का गठन किया था। 

यूपी चुनाव : पर्दे के पीछे ये हैं ‘टीपू’ को सुल्‍तान बनाने वाले 7 चेहरे

पार्टी ने मराठी राष्ट्रवाद के एजेंडा तय किया और फिर 2008 में उत्तर भारतीयों के खिलाफ हिंसक आंदोलन छेड़ दिया था। इससे 2009 के विधानसभा चुनाव में मनसे ने 13 सीटों पर जीत दर्ज की। लेकिन, 2014 के विधानसभा चुनाव में पार्टी साफ हो गई। अब तक मनसे के पूर्व विधायकों व पार्षदों सहित  पार्टी के 150 से ज्यादा पदाधिकारी पार्टी छोड़ चुके हैं।

 
 

You May Also Like

English News