गन्दगी और दुर्गन्ध में सांस लेता, कानपुर का यह इलाका

मोदी सरकार को 4 वर्ष पुरे हो गए हैं, स्वच्छ भारत का नारा देने वाले पीएम नरेंद्र मोदी ने स्वच्छता अभियान के तहत कई कदम उठाए, लेकिन कुछ जगहों पर अभी भी अवाम गन्दगी और दुर्गन्ध के बीच रहने को विवश है. यह मामला है कानपुर के राजापुरवा क्षेत्र का, जहाँ का गरीब तबका नारकीय जीवन जीने को मजबूर है. यहाँ  संकरी गलिया हैं, जिनमें इंटरलॉकिंग टाइल्स बनी हैं और नालियां भी बनवा दी गई हैं, मगर, इन नालियों का पानी जाएगा कहां, इसका कोई इंतजाम नहीं है.मोदी सरकार को 4 वर्ष पुरे हो गए हैं, स्वच्छ भारत का नारा देने वाले पीएम नरेंद्र मोदी ने स्वच्छता अभियान के तहत कई कदम उठाए, लेकिन कुछ जगहों पर अभी भी अवाम गन्दगी और दुर्गन्ध के बीच रहने को विवश है. यह मामला है कानपुर के राजापुरवा क्षेत्र का, जहाँ का गरीब तबका नारकीय जीवन जीने को मजबूर है. यहाँ  संकरी गलिया हैं, जिनमें इंटरलॉकिंग टाइल्स बनी हैं और नालियां भी बनवा दी गई हैं, मगर, इन नालियों का पानी जाएगा कहां, इसका कोई इंतजाम नहीं है.    स्थानीय लोगों ने बताया कि इलाके में आइटीआइ की जमीन पर एक तालाब है, पहले उसीमे नालियों का पानी जाता था लेकिन धीरे-धीरे तालाब में कूड़ा-करकट जमा होने लगा और अब वो एक दलदल में तब्दील हो चुका है, जिसमे पानी नही जाता है. तालाब के कुछ हिस्से पर लोगों ने कब्ज़ा कर अवैध निर्माण भी कर लिया है. तालाब में पानी न जाने के कारण अब सारी गन्दगी सड़कों पर इकठ्ठा होने लगी है और स्थानीय लोगों को आने-जाने और सांस लेने में भी समस्या होती है.    क्षेत्र में समस्या सिर्फ जलभराव की ही नहीं है, यहां सफाई व्यवस्था भी बेहद लचर है. क्षेत्रवासियों ने बताया कि सफाई कर्मी 15-20 दिन बाद सफाई करने आते हैं, नियमित रूप से बस्तियों में झाड़ू तक नहीं लगती है. साथ ही स्वच्छ पानी के लिए भी यह इलाका तरस रहा है, कहने को तो यहाँ 25 सरकारी हैंडपंप तो लगे हैं, लेकिन वह सिर्फ दिखावे के हैं, बमुश्किल पांच-छह हैंडपंप ही पानी दे रहे हैं, बाकी सूख चुके हैं.

स्थानीय लोगों ने बताया कि इलाके में आइटीआइ की जमीन पर एक तालाब है, पहले उसीमे नालियों का पानी जाता था लेकिन धीरे-धीरे तालाब में कूड़ा-करकट जमा होने लगा और अब वो एक दलदल में तब्दील हो चुका है, जिसमे पानी नही जाता है. तालाब के कुछ हिस्से पर लोगों ने कब्ज़ा कर अवैध निर्माण भी कर लिया है. तालाब में पानी न जाने के कारण अब सारी गन्दगी सड़कों पर इकठ्ठा होने लगी है और स्थानीय लोगों को आने-जाने और सांस लेने में भी समस्या होती है.

क्षेत्र में समस्या सिर्फ जलभराव की ही नहीं है, यहां सफाई व्यवस्था भी बेहद लचर है. क्षेत्रवासियों ने बताया कि सफाई कर्मी 15-20 दिन बाद सफाई करने आते हैं, नियमित रूप से बस्तियों में झाड़ू तक नहीं लगती है. साथ ही स्वच्छ पानी के लिए भी यह इलाका तरस रहा है, कहने को तो यहाँ 25 सरकारी हैंडपंप तो लगे हैं, लेकिन वह सिर्फ दिखावे के हैं, बमुश्किल पांच-छह हैंडपंप ही पानी दे रहे हैं, बाकी सूख चुके हैं. 

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