गुजरात में राहुल गांधी का ‘सौराष्ट्र प्लान’, पाटीदारों के सहारे सत्ता पाने का ख्वाब

गुजरात विधानसभा चुनाव को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई हैं. कांग्रेस और बीजेपी से लेकर सभी राजनीतिक पार्टियां राज्य के रणक्षेत्र में सक्रिय हैं. कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने गुजरात को फतह करने के लिए सौराष्ट्र की सरजमीं से सोमवार को अपना चुनावी आगाज किया है. राहुल का सौराष्ट्र में आज दूसरा दिन है, वह तीन दिन की यात्रा पर हैं.गुजरात में राहुल गांधी का 'सौराष्ट्र प्लान', पाटीदारों के सहारे सत्ता पाने का ख्वाबPolitics: राहुल गांधी ने पीएम मोदी पर कसा तंज, जानिए क्या-क्या कहा!

राहुल सौराष्ट्र के जरिए बनवास खत्म करने उतरे

कांग्रेस पिछले दो दशक से राज्य में सत्ता का बनवास झेल रही है. राहुल गांधी सौराष्ट्र के जरिए सत्ता की वापसी की राह बनाने उतरे हैं. राहुल पाटीदार समाज को दोबारा से अपने साथ जोड़ने की कवायद कर रहे हैं. सौराष्ट्र पहुंचने पर पटेल आरक्षण आंदोलन के अगुवा रहे हार्दिक पटेल ने ट्वीट कर उनका स्वागत किया. राहुल गांधी बुधवार को पटेल समाज के लिए आत्मगौरव माने जाने वाले बोडलधाम मंदिर में दर्शन करने जाएंगे.

सौराष्ट्र में पटेलों का वर्चस्व

दरअसल गुजरात की राजनीति में सौराष्ट्र की काफी अहम भूमिका रही है. राज्य की 182 विधानसभा सीटों में से 52 सीटें इस क्षेत्र से आती हैं. सौराष्ट्र में बड़ी आबादी पाटीदार समाज की है और उसमें भी खासकर लेऊवा पटेल की. इस क्षेत्र में कम से कम 32 से 38 विधानसभा सीटों पर पटेल समुदाय किसी को भी पार्टी को चुनाव हराने और जिताने का फैसला करते हैं.

सौराष्ट्र के जरिए बीजेपी सत्ता में आई

बीजेपी सौराष्ट्र पर मजबूत के जरिए ही पिछले बीस साल से सत्ता पर काबिज है. सौराष्ट्र में बीजेपी की साख बनाने में केशुभाई पटेल ने बड़ी मेहनत की है. इसी का नतीजा था कि बीजेपी ने कांग्रेस सरकारों के जीत का सिलसिला खत्म कर राज्य में पहली बार 1995 में बीजेपी की सरकार बनी. 1995 में सौराष्ट्र की 52 में से 44 सीटों पर जीत केशुभाई पटेल पहली बार मुख्यमंत्री बने थे. बाद में केशुभाई ने बीजेपी से अलग होकर अपनी पार्टी बनाई थी, जिसे बाद में फिर बीजेपी में विलय कर दिया.

केशुभाई की बगावत भी बीजेपी को मात नहीं

बीजेपी से केशुभाई पटेल के बगावत के बाद भी सौराष्ट्र क्षेत्र में बीजेपी की पकड़ कमजोर नहीं हुई थी. पिछले 2015 के विधानसभा चुनाव में सौराष्ट्र की कुल 52 सीटों में से बीजेपी 33 और कांग्रेस 19 सीट जीतने में सफल रही है. गुजरात की कमान जब तक नरेन्द्र मोदी के हाथों में रही सौराष्ट्र बीजेपी के पक्ष में रहा. मोदी सौराष्ट्र में सबसे ताकतवर पोस्टर बॉय रहे हैं.

पटेल आरक्षण आंदोलन से बीजेपी कमजोर

 2014 में नरेंद्र मोदी के गुजरात के सीएम से देश के पीएम बन जाने के बाद से पाटीदारों पर बीजेपी की पकड़ कमजोर हुई है. ऐसा माना जा रहा है कि हार्दिक पटेल के नेतृत्व में शुरू हुआ पटेल आंदोलन ने बीजेपी की पकड़ को कमजोर कर दिया है. इसी का नतीजा रहा कि 2015 में हुए जिला पंचायत चुनाव में से सौराष्ट्र की 11 में से 8 पर कांग्रेस विजयी रही.

नाराज पटेलों के सहारे कांग्रेस

गुजरात में पाटीदार मतदाता करीब 20 फीसदी हैं. मौजूदा सरकार में करीब 40 विधायक, 7 मंत्री हैं. पाटीदार समाज बीजेपी का परंपरागत वोट रहा है, लेकिन पटेल आरक्षण की मांग को लेकर फिलहाल नाराज है. बीजेपी के खिलाफ माहौल बनाने के लिए हार्दिक पटेल ने संकल्प यात्रा निकाला था. ऐसे में कांग्रेस पटेलों को भी जोड़ने की कवायद कर रही है. राहुल सौराष्ट्र में दूसरे दिन पटेल समुदाय को भी संबोधित करेंगे.

कांग्रेस फूंक फूंककर रख रही कदम

कांग्रेस गुजरात में बड़ी वापसी के लिए राजनीतिक रणनीतिक के तहत कदम बढ़ा रही है. कांग्रेस इस बार बीजेपी को मुस्लिम परस्त होने और हिंदू विरोधी बताने का मौका नहीं देना चाहती है. इसीलिए राहुल गांधी ने अपने चुनावी आगाज द्वारका के भगवान कृष्ण से आशिर्वाद से किया है. मंगलावर को सौराष्ट्र के चमिंडा देवी मंदिर में दर्शन करेंगे, तो बुधवार को बोडलधाम मंदिर भी जाएंगे.

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