गुजरात सरकार के साथ पाटीदारों ने की अहम बैठक, आरक्षण पर नहीं बनी बात

पिछले दो साल से आरक्षण की मांग कर रहे पाटीदार समुदाय के लोगों ने गुजरात सरकार के साथ अहम बैठक की. हालांकि आरक्षण आंदोलन का नेतृत्व करने वाले हार्दिक पटेल ने इस बैठक को बेनतीजा करार दिया, जबकि सरकार ने इसे सफल बैठक बताया है.गुजरात सरकार के साथ पाटीदारों ने की अहम बैठक, आरक्षण पर नहीं बनी बातअभी खत्म नहीं हुआ AIADMK के दोनों धड़ों का मतभेद: एम थम्बीदुरई

बता दें कि पिछले कुछ समय से पाटीदार आंदोलन सेवा समिति और सरदार पटेल ग्रुप की ओर से कुछ मांग की जा रही है. समिति की मांग है कि जिन पाटीदार युवकों की मौत हुई है, उनके परिवार वालों के लिए नौकरी ओर निर्वाह की व्यवस्था हो, साथ ही उन पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए, जिन्होंने पाटीदारों पर जुल्म किए थे.

तीन घंटे तक चली इस बैठक में गुजरात के उप मुख्यमंत्री नितिन पटेल और कैबिनेट मंत्रियो के साथ गुजरात के सभी पाटीदार संस्थाओं के मुखियाओं को आमंत्रित किया गया था.वहीं जब सरकार की ओर से बैठक के नतीजे पर बयान दिया जा रहा था, तब आयोग बनाने की सूचना पर पाटीदार आन्दोलनकारियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. उस पर सरकार ने कहा कि कुछ लोग जानबूझकर किसी पार्टी के कहने पर दिक्कतें पैदा कर रहे हैं.

बैठक को लेकर उप मुख्यमंत्री नितिन पटेल ने कहा कि हमारे साथ समाज के सारे अग्रणी मौजूद है, मगर जो लोग विरोध करते हैं वो सब राजनीति से प्रेरित होकर कर रहे हैं. अगर मीटिंग में सब मुद्दों पर हां बोलकर बाहर जाकर कुछ भी बोले इसमें सरकार की कोई जिम्मेदारी नहीं होती है. 

बता दें कि सरकार ने एक ऐसे आयोग के गठन का वादा किया था, जो उन समाज के लिए होगा, जो आरक्षण का हकदार नहीं है. साथ ही कहा गया था कि जीएमडीसी ग्राउंड में पुलिस कार्रवाई में मारे गए या जख्मी हुए लोगों के लिए गुजरात हाईकोर्ट के निवृत जज द्वारा एक कमीशन बनाया जाएगा, जिसकी रिपोर्ट के बाद कार्रवाई होगी. हालांकि आरक्षण पर बात नहीं बनी तो हार्दिक पटेल ने अपने कार्यकर्ताओं के साथ बैठक का बॉयकॉट कर दिया. हार्दिक ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने समाज के लिए बात रखी , लेकिन हमें कांग्रेस का एजेंट कहा जाता है. साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार ने समाज को अलग थलग करने का सोच लिया है.

पाटीदार आंदोलन सेवा समिति के कन्वीनर हार्दिक पटेल का कहना है कि हमारी कोई उम्र ही नहीं की राजनीति करें, अगर यही मसला कांग्रेस में हुआ होता तो हमें बीजेपी एजेंट करार दिया जाता. लेकिन इस सरकार ने समाज को अलग थलग करने का प्लान बना दिया है.

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