गुजरात से यहां पहुंची सत्ता विरोधी लहर! बिगड़ गया BJP का समीकरण…

गुजरात और हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव के नतीजे भले ही कांग्रेस के पक्ष में नहीं आए हैं। लेकिन कांग्रेसियों में इस हार का भी उत्साह देखने को मिल रहा है। विशेषकर गुजरात में कांग्रेस का बेहतर प्रदर्शन समीपवर्ती राजस्थान में होने वाले उपचुनाव व आगामी विधानसभा चुनाव पर असर डालेगा। सत्ता विरोधी लहर का असर बीते रविवार को राजस्थान के​ विभिन्न जिलों में हुए स्थानीय निकायों, पंचायत व जिला परिषद के उपचुनाव के नतीजों में देखने को मिला। जहां भाजपा को करारी शिकस्त मिली है। गुजरात से यहां पहुंची सत्ता विरोधी लहर! बिगड़ गया BJP का समीकरण...

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सीमावर्ती ​जिलों में कांग्रेस का बेहतर प्रदर्शन

राजस्थान में कुल 45 सीटों के लिए हुए उपचुनाव में 26 सीटें कांग्रेस व 17 सीटें सत्तारुढ़ भाजपा के पक्ष में गई है। इनमें बांसवाड़ा व जालौर में हुए उपचुनाव में कांग्रेस ने जीत दर्ज की है। ये जिले इसलिए महत्वपूर्ण है कि क्योंकि ये गुजरात की सीमा से लगते हैं। दरअसल गुजरात के राजस्थान सीमा से लगते जिलों में कांग्रेस का प्रदर्शन बेहतर रहा है। 

अब दो लोकसभा और एक विधानसभा सीट पर नजर

कांग्रेस ने गुजरात विधानसभा चुनाव में राजस्थान से लगते ​जिलों में कुल 25 में 13 सीटें जीती है। इसलिए माना जा रहा है कि आगामी विधानसभा चुनाव में राजस्थान में कांग्रेस बेहतर प्रदर्शन करेगी। वहीं गुजरात में बेहतर प्रदर्शन के बाद राजस्थान में कांग्रेस नेतृत्व ने अलवर व अजमेर लोकसभा उपचुनाव तथा मांडलगढ़ ​विधानसभा उपचुनाव की तैयारियां प्रारंभ कर दी हैं।

‘मेरा बूथ मेरा गौरव’ भी देगा भाजपा को टक्कर 

 कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट ने “मेरा बूथ मेरा गौरव” अभियान प्रारंभ किया है। जिसके तहत उन्होंने अलवर जिले में बूथ कार्यकर्ताओं का सम्मेलन भी आयोजित किया। सचिन पायलट का कहना है कि गुजरात नतीजों और राजस्थान में स्थानीय निकाय व जिला परिषद के उपचुनाव के नतीजों ने साफ कर दिया है कि भाजपा बुरी स्थिति में है।

फिलहाल गुटबाजी है परेशानी का सबब 

 हालांकि प्रदेश कांग्रेस की गुटबाजी को लेकर भी अब सवाल पूछे जाने लगे है। गौरतलब है कि बेहतर प्रदर्शन से उत्साहित राजस्थान कांग्रेस फिलहाल गहलोत गुट, सचिन पायलट गुट, सीपी जोशी गुट व रामेश्वर डूडी गुट में बंटी हुई है। वहीं गुजरात में कांग्रेस के बेहतर प्रदर्शन का सेहरा वहां के कांग्रेस चुनाव प्रभारी और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के सिर बांधा जा रहा है। इसलिए आगामी राजस्थान विधानसभा चुनाव में नेतृत्व को लेकर खींचतान बढ़ना तय है। 

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