गोबर से बनाई गई इतनी खूबसूरत ड्रेस, मिला करोड़ों का इनाम

गाय जिसे हमारे देश में माता का दर्जा दिया जाता है. गाय हमारे बहुत काम आती है चाहे वो खेती करने का काम हो या फिर दूध देने का ही क्यों ना हो. वैसे गाय का गोबर भी बहुत फायदेमंद होता है और इससे उपले और कीटनाशक दवाइयां बनाने में भी उपयोग में लिया जाता है. लेकिन अगर हम आपसे कहे कि गाय के गोबर से ड्रेस भी बन सकती है तो शायद आप ये सुनकर हैरान हो जाएंगे और इसे मजाक ही समझेंगे. लेकिन हम आपको बता दें ये सच है. नीदरलैंड की एक स्टार्टअप कंपनी ने गाय के गोबर से ड्रेस बनाई है.गाय जिसे हमारे देश में माता का दर्जा दिया जाता है. गाय हमारे बहुत काम आती है चाहे वो खेती करने का काम हो या फिर दूध देने का ही क्यों ना हो. वैसे गाय का गोबर भी बहुत फायदेमंद होता है और इससे उपले और कीटनाशक दवाइयां बनाने में भी उपयोग में लिया जाता है. लेकिन अगर हम आपसे कहे कि गाय के गोबर से ड्रेस भी बन सकती है तो शायद आप ये सुनकर हैरान हो जाएंगे और इसे मजाक ही समझेंगे. लेकिन हम आपको बता दें ये सच है. नीदरलैंड की एक स्टार्टअप कंपनी ने गाय के गोबर से ड्रेस बनाई है.    जी हां... जलिला एसाइदी की एक महिला नीदरलैंड की रहने वाली हैं जो बायोआर्ट एक्सपर्ट हैं. जलिला स्टार्टअप चलाती हैं. जलिला ने गोबर में से सेल्यूलोज़ अलग करके उससे एक ड्रेस बनाने का तरीका निकाला है. जलिला की इस नायाब तरकीब के लिए उन्हें चिवाज वेंचर एंड एचएंडएम फाउंडेशन ग्लोबल अवॉर्ड भी मिला है. इस अवार्ड के साथ उन्हें दो लाख डॉलर (1.40 करोड़ रुपये) की इनामी राशि भी प्राप्त हुई है.    जलील ने 'वन डच' नाम से कुछ साल पहले ही एक स्टार्टअप शुरू किया था. उन्होंने अपने इस एक्सपेरिमेंट में गाय के गोबर को रीसाइकिल करके उससे पेपर, बायो-डीग्रेडेबल प्लास्टिक और ड्रेसेस भी बनाई हैं. ज़लीला ने गोबर से जो सेल्युलोज़ निकाला है उसे उन्होंने ‘मेस्टिक’ नाम दिया है. ज़लीला ने अपने इस इनोवेशन के जरिए सबसे पहले उससे टॉप और शर्ट बनाए. ज़लीला ने इस बारे में बात करते हुए बताया कि गोबर को सभी लोग वेस्ट समझते थे और इसे बदबूदार भी मानते थे लेकिन गोबर बहुत ही काम की चीज़ है और आने वाले समय में गोबर से बनीं ड्रेस फैशन शोज़ में भी दिखेंगी.

जी हां… जलिला एसाइदी की एक महिला नीदरलैंड की रहने वाली हैं जो बायोआर्ट एक्सपर्ट हैं. जलिला स्टार्टअप चलाती हैं. जलिला ने गोबर में से सेल्यूलोज़ अलग करके उससे एक ड्रेस बनाने का तरीका निकाला है. जलिला की इस नायाब तरकीब के लिए उन्हें चिवाज वेंचर एंड एचएंडएम फाउंडेशन ग्लोबल अवॉर्ड भी मिला है. इस अवार्ड के साथ उन्हें दो लाख डॉलर (1.40 करोड़ रुपये) की इनामी राशि भी प्राप्त हुई है.

जलील ने ‘वन डच’ नाम से कुछ साल पहले ही एक स्टार्टअप शुरू किया था. उन्होंने अपने इस एक्सपेरिमेंट में गाय के गोबर को रीसाइकिल करके उससे पेपर, बायो-डीग्रेडेबल प्लास्टिक और ड्रेसेस भी बनाई हैं. ज़लीला ने गोबर से जो सेल्युलोज़ निकाला है उसे उन्होंने ‘मेस्टिक’ नाम दिया है. ज़लीला ने अपने इस इनोवेशन के जरिए सबसे पहले उससे टॉप और शर्ट बनाए. ज़लीला ने इस बारे में बात करते हुए बताया कि गोबर को सभी लोग वेस्ट समझते थे और इसे बदबूदार भी मानते थे लेकिन गोबर बहुत ही काम की चीज़ है और आने वाले समय में गोबर से बनीं ड्रेस फैशन शोज़ में भी दिखेंगी.

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