घोटाले पर वित्त मंत्री को दी गई रिपोर्ट में PNB ने अपने सिस्टम की कई खामियां को किया स्वीकार

PNB घोटाले के आरोपी शेट्टी और ब्रैडी हाउस ब्रांच के कुछ अधिकारी कई बार अपना ट्रांसफर रुकवाने में कामयाब रहे. बैंक ने SWIFT और CBS सिस्टम को कई साल तक लिंक नहीं किया. घोटाले पर वित्त मंत्री को दी गई अपनी रिपोर्ट में पंजाब नेशनल बैंक ने अपने सिस्टम की ऐसी कई खामियां स्वीकार की हैं. यही नहीं, इस रिपोर्ट से रिजर्व बैंक के नियामक सिस्टम की सुस्ती भी उजागर हो गई है.घोटाले पर वित्त मंत्री को दी गई रिपोर्ट में PNB ने अपने सिस्टम की कई खामियां को किया स्वीकार

शेट्टी सहित कई अधिकारी दो बार अपने ट्रांसफर रुकवाने में कामयाब रहे और तीसरी बार जब उनका ट्रांसफर हो गया तो उसे भी उन्होंने निरस्त करवा दिया. पीएनबी के शीर्ष अधिकारियों द्वारा वित्त मंत्री की दी गई रिपोर्ट में ऐसे कई और खुलासे हुए हैं. आजतक-इंडिया टुडे को इस रिपोर्ट का ब्योरा मिला है.

रिजर्व बैंक की भी लापरवाही

यही नहीं, इस रिपोर्ट से यह भी पता चलता है कि नियामक रिजर्व बैंक भी इस मामले में ढीला रहा है. बैंक की ऑडिटिंग नौ साल पहले 31 मार्च, 2009 को हुई थी. जबकि ब्रैडी हाउस हाई नेटवर्थ वाले लोगों (HNI) का एक मध्यम आकार का कॉरपोरेट ब्रांच है जिसकी ऑडिट हर साल होनी चाहिए थी. वित्तीय सेवाओं का विभाग और मुख्य सतर्कता आयुक्त के कार्यालय द्वारा आरबीआई की इस सुस्ती के बारे में पूछताछ तो की ही जाएगी, लेकिन इस पूरे सिस्टम में वास्तव में कई अन्य खामियां रही हैं.

सात साल तक एक ही SWIFT नंबर

उदाहरण के लिए, हर SWIFT लेन-देन के लिए एक नया रेफरेंस नंबर जनरेट होना चाहिए था. लेकिन इस मामले में पिछले सात साल से एक ही नंबर चलता रहा. यही नहीं, पीएनबी के अधिकारियों ने सफाई दी है कि SWIFT और CBS सिस्टम को इतने सालों तक लिंक इसलिए नहीं किया जा सका, क्योंकि बैंक नए वर्जन के बैंकिंग सॉफ्टवेयर आने का इंतजार कर रहा था. 

नीरव को अप्लीकेशन की भी जरूरत नहीं

बैंक के लिए एक अच्छी बात यह कही जा सकती है कि यह घोटाला सिर्फ एक ब्रांच में हुआ, जबकि देश भर में बैंक के कम से कम 200 अधिकारियों को SWIFT तक पहुंच मिली हुई है. दिलचस्प यह है कि ब्रांच द्वारा नीरव मोदी को 500 से ज्यादा LOU दिए गए, लेकिन उसने औपचारिक रूप से एक के लिए भी आवेदन नहीं किया था.

यहां नहीं मिले लोन तो विदेश में ले लो

पीएनबी की रिपोर्ट में यह स्वीकार किया गया है कि भारतीय बैंकों की विदेशी शाखाएं वास्तव में अपने मूल सार्वजनिक बैंकों के लिए बस धन निकलने का स्रोत बनी हुई हैं. जो लोन भारत में मंजूर नहीं हो पाता, उसे विदेशी शाखाओं के द्वारा मंजूर करा लिया जाता. उदाहरण के लिए पंजाब नेशनल बैंक की लंदन शाखा का 70 फीसदी लोन एनपीए बन गया है. विदेशी शाखाओं के कर्मचारियों की कोई जवाबदेही नहीं होती और वहां के जीएम को तो लोन देने या राइट ऑफ करने के लिए सीईओ जैसा निर्बाध अधिकार दे दिया जाता है.

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