चंडीगढ़-दिल्‍ली के बीच जल्‍द दौड़ेगी तेजस ट्रेन, लेकिन रफ्तार पर रहेगी लगाम

चंडीगढ़-दिल्ली रेलवे ट्रैक पर जल्द ही तेजस ट्रेन शुरू होने वाली है। तेजस अब तक की सबसे तेज ट्रेन हैं। इसकी क्षमता 200 किलोमीटर प्रतिघंटा की है, लेकिन चंडीगढ़-दिल्ली रूट पर इसकी रफ्तार पर लगाम लगेगी। मुंबई-गोवा ट्रैक पर इसे अभी 160 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से दौड़ाया जा रहा है, लेकिन चंडीगढ़ रेलवे ट्रैक पर तेजस को भी शताब्दी एक्‍सप्रेस की चाल चलना पड़ेगा। ट्रेन की अधिकतम रफ्तार 110 किलोमीटर प्रति घंटा रहेगी।फ्रांससी रेलवे ने साल 2017 में 245 किलोमीटर लंबे दिल्ली-चंडीगढ़ रेलवे कॉरीडोर पर गति बढ़ाने का सर्वे किया था। सर्वे के बाद अपनी रिपोर्ट में इस रूट पर 220 किलोमीटर प्रति घंटे से ट्रेन चलाने का दावा किया था।  इस ट्रैक को अपडेट करने के लिए प्रति किलोमीटर पर 44.5 करोड़ और पूरे प्रोजेक्ट पर 12068 करोड़ का  खर्च होंगे।  हाईस्पीड के लिए रेल रैक और लोकोमोटिव को एडवांस तकनीक के साथ तैयार करना, सिग्नल  सिस्टम को अत्याधुनिक तकनीक से लैस करना और  ट्रेन के लिए पावर सप्लाई की अलग यूनिट स्थापित करना जैसे प्रमुख काम बताए गए थे, लेकिन रेलवे ने इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने में कोई रूचि नहीं दिखाई थी।

दरअसल, कमिश्नर रेलवे सेफ्टी ने हिदायत दी है कि इससे ज्यादा रफ्तार से इस सेक्शन पर ट्रेन नहीं दौड़ सकती। ट्रैक में कई खामियां है, जिससे हादसा होने का डर है। डीआरएम दिनेश चंद शर्मा ने इसकी पुष्टि कर बताया कि हर रेलवे ट्रैक के निर्माण के बाद कमिश्नर रेलवे सेफ्टी एक प्रमाण पत्र जारी करता है कि इस ट्रैक पर अधिकतम स्पीड कितनी होनी चाहिए। उसी प्रमाण पत्र के आधार पर ट्रेन की स्पीड बढ़ाई जा सकती है।

उन्‍होंने बताया कि चंडीगढ़-दिल्ली रेलवे ट्रैक पर कमिश्नर ने अधिकतम स्पीड 110 किलोमीटर प्रतिघंटा तय कर की है। इससे ज्यादा स्पीड बढ़ाने के लिए उन्होंने कई जगह ट्रैक को चौड़ा करने, दीवारें बनानी होंगी और कई मोड़ को सीधा करना होगा, जोकि काफी लंबा काम है। इस रूट पर अभी सबसे फास्ट ट्रेन चंडीगढ़-दिल्ली शताब्दी चलती है, जिसकी स्पीड 105 किलोमीटर प्रतिघंटा है।

अंबाला-चंडीगढ़ रेलवे ट्रैक के दोहरीकरण के काम पर रेलवे ने 338.54 करोड़ खर्च किए। इस 45.16 किलोमीटर लंबे रेलवे ट्रैक पर 10 बड़े और 33 छोटे पुलों का निर्माण हुआ। नए ट्रैक के निर्माण के समय दलीलें दी जा रही थीं कि इस निर्माण के बाद शताब्दी की स्पीड बढ़कर 120 किलोमीटर प्रतिघंटा तक हो जाएगा, लेकिन शताब्दी की स्पीड पर इस पर कोई फायदा नहीं हुआ है।

चंडीगढ़-अंबाला रेलवे ट्रैक के दोहरीकरण से पहले इसकी स्पीड 80 से 85 किलोमीटर प्रतिघंटा रहती थी। यह दोहरीकरण के बाद 90 किलोमीटर प्रतिघंटा तक पहुंच गई है। अंबाला से दिल्ली के बीच यही शताब्दी ट्रेन 110 से 115 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से दौड़ती है। सबसे तेज शताब्दी दिल्ली-भोपाल रूट पर दौड़ती है, इस रूट पर ट्रेन 160 किलोमीटर प्रति घंंटे की रफ्तार से दौड़ती है।

फ्रांससी रेलवे ने साल 2017 में 245 किलोमीटर लंबे दिल्ली-चंडीगढ़ रेलवे कॉरीडोर पर गति बढ़ाने का सर्वे किया था। सर्वे के बाद अपनी रिपोर्ट में इस रूट पर 220 किलोमीटर प्रति घंटे से ट्रेन चलाने का दावा किया था।  इस ट्रैक को अपडेट करने के लिए प्रति किलोमीटर पर 44.5 करोड़ और पूरे प्रोजेक्ट पर 12068 करोड़ का  खर्च होंगे।

हाईस्पीड के लिए रेल रैक और लोकोमोटिव को एडवांस तकनीक के साथ तैयार करना, सिग्नल  सिस्टम को अत्याधुनिक तकनीक से लैस करना और  ट्रेन के लिए पावर सप्लाई की अलग यूनिट स्थापित करना जैसे प्रमुख काम बताए गए थे, लेकिन रेलवे ने इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने में कोई रूचि नहीं दिखाई थी।

 
 

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