चश्मदीद बोले- बम फेंकने के बाद लोगों को बंदूक से निशाना बना रहे थे हमलावर

मिस्र की एक मस्जिद पर हुए बड़े हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है, यहां करीब 235 लोगों की मौत हो गई है और 109 से ज्यादा घायल बताए जा रहे हैं। बम और ओपन फायरिंग ने ऐसा मौत का मंजर तैयार किया है कि दुनिया भर में आतंक की दशहत फैल गई है। 

ये हमला मिस्र के उत्तर अशांत सिनाई क्षेत्र में जुम्मे की नमाज के दौरान हुआ जब अल आरिश शहर स्थित अल रावदा मस्जिद पर बम और बंदूकों से हमला किया। आतंकियों द्वारा फेंका गया बम नमाज पढ़ रहे लोगों के नजदीक फट गया। इसके बाद बंदूकधारियों ने मस्जिद से बाहर भागने की कोशिश कर रहे लोगों पर धुआंधार फायरिंग की, जिससे मस्जिद में अफरा-तफरी मच गई।

इस खूनी खेल को देख कर हिल जाने वाले चश्मदीदों ने उस खौफनाक पल को बयां करने की कोशिश की है…

 

अल जजीरा वेबसाइट की खबर के मुताबिक एक चश्मदीद ने बताया कि आतंकियों ने शुक्रवार दिन इसलिए चुना क्योंकि यहां नमाज अदा करने के लिए काफी संख्या में लोग आते हैं। बताया गया कि वे करीब 4 गाड़ियों में आए थे और ऐसा माना जा रहा था कि उनका मकसद पूरी मस्जिद को बम से उड़ाने का था।

पहले आतंकियों ने मस्जिद को हर तरफ से घेर लिया और उसके बाद लोगों के बीच बम फेंका। बम फटने से वहां कई लोग घायल हो गए और वहां भगदड़ मच गई, लेकिन इंसानियत को शर्मसार करने पहुंचे बेखौफ आतंकियों ने देर न करते हुए लोगों पर ओपन फायरिंग शुरू कर दी। 
 

स्थानीय मीडिया में जारी की गई तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि मस्जिद की जमीन पर पड़ी हुईं दर्जनों लाशे खून से सनी हुई थीं। एक चश्मदीद ने बताया कि कई लाशों को तो मस्जिद में बिछाए जाने वाले कालीन से ढका गया था। वहीं अपनों को खो देने वाले लोग लाशों के पास बैठे आंसू बहा रहे थे।
 

आतंकी हमले के पीछे आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट का नाम कई वजहों से उठ रहा है। दरअसल, आईएस के आतंकी सूफी और ईसाई समुदाय को अपने निशाने पर लंबे समय से बनाए हुए हैं। इससे पहले आतंकियों ने 100 साल के एक सूफी नेता की हत्या करके विभत्स तस्वीरों को सार्वजनिक किया था। 
 

बता दें कि पूर्व राष्ट्रपति हुस्नी मुबारक के जनवरी 2011 में सत्ता चले जाने के बाद से मिस्र में आतंकी गतिविधियां बढ़ गई हैं। तब से अब तक 700 से ज्यादा सुरक्षाकर्मी मारे गए हैं।
 

इस साल मिस्र में कई आतंकी हमले भी किए गए। 26 मई को बंदूकधारियों ने मध्य मिस्र में कॉप्टिक ईसाइयों को ले जा रही एक बस को बमों से उड़ा दिया था, जिसमें 28 लोगों की जानें गईं थीं और 25 अन्य घायल हुए थे। 9 अप्रैल को उत्तरी शहर एलेक्जेंड्रिया में एक चर्च के नजदीक दो आत्मघाती बम हमलों में 46 लोग मारे गए थे। 
 
 

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