चार घंटे तक बेहोश रही मां, मदद की आस में घर वालों ने हर दरवाजा खटखटाया, नहीं मिली मदद 

गाहासाड़-उत्तरी कोलिया बांध के टूटने के बाद जलप्रलय देख बेहोश हो गईं मंझरिया की प्रभावती देवी को सेना के पहुंचने के बाद ही मदद मिल सकी, जबकि इस दौरान वो करीब चार घंटे तक बेहोश रहीं और पूरा परिवार बिलखता रहा। मदद की आस में घर वालों ने हर दरवाजा खटखटाया। प्रधान को फोन किया, लेकिन नाव होने के बावजूद कोई मदद को आगे नहीं आया। प्रभावती के बेटे महेंद्र यादव ने एनडीआरएफ के हेड ऑफिस से लेकर बाढ़ कंट्रोल रूम तक फोन कर मदद की गुहार लगाई, लेकिन जब सेना पहुंची तब करीब 21 घंटे बाद उन्हें मदद मिल सकी। घर वालों ने बताया कि आर्मी आई तब हम निकल पाए, अन्यथा सभी लोग बस टालमटोल कर रहे थे।
चार घंटे तक बेहोश रही मां, मदद की आस में घर वालों ने हर दरवाजा खटखटाया, नहीं मिली मदद 
सोमवार को दोपहर बाद करीब ढाई बजे आर्मी के रेस्क्यू के बाद महेंद्र यादव जब अपने परिवार के साथ डोमिनगढ़ स्थित सेना के राहत कैंप में पहुंचे तो उन्होंने अपनी परेशानी बयां की। उन्होंने बताया कि बाढ़ से जब पूरा गांव घिर गया तो यह दृश्य देखकर मां काफी घबरा गई। घर के लोगों ने उनका काफी हौसला बढ़ाया, लेकिन अपराह्न करीब तीन बजे वह बेहोश हो गईं। कई बार पानी के छींटे मारे गए, लेकिन होश नहीं आ पा रहा था। हम लोगों ने बाढ़ कंट्रोल रूम फोन किया। एनडीआरएफ के हेड क्वार्टर से लेकर डीएम तक को फोन किया। 20-21 घंटे बाद जाकर मदद मिल सकी वह भी तब जब आर्मी गांव पहुंची। डोमिनगढ़ आर्मी कैंप में पहुंचने के बाद मां को चार बोतल पानी चढ़ाया गया। ब्लड प्रेशर भी काफी कम हो गया था। आर्मी के डॉक्टरों के इलाज के बाद थोड़ी राहत मिली। अगर आर्मी न आती तो पता नहीं क्या होता। 

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सूबेदार विजय लहरी की टीम ने किया रेस्क्यू
प्रभावती देवी की तबीयत बेहद खराब होने की सूचना के बाद सूबेदार विजय लहरी की नेतृत्व में आर्मी ने रेस्क्यू अभियान चलाया। उन्होंने बताया कि टीम में पांच सदस्य थे, जिनमें हवलदार सतीश वाल्के, लांस नायक एस नारकर, लांस नायक गणेश चौहान और नायक रेड्डी शामिल थे। सूबेदार विजय के मुताबिक गुनगुन कोठा और मंझरिया गांव में बाढ़ की स्थिति अन्य जगहों की तुलना में काफी भयानक है। 
 
 

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