गांव वालो ने चार महिलाओं के चरित्र पर उठाकर सवाल किया ये घिनौना काम

दमुआ। हरियाणा की खाप पंचायत की तर्ज पर आदिवासी अंचल की पंचायत टेकाढाना के गांव चीतल भाटा में समाज के ठेकेदार बने लोगों ने पहले तो समाज की चार महिलाओं पर चरित्रहीनता का आरोप लगाया फिर पंचायत के फरमान पर गांव में जूतों की माला पहनाकर जुलूस निकाला।

गांव वालो ने चार महिलाओं के चरित्र पर उठाकर सवाल किया ये घिनौना काम

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पीड़ित महिलाओं की शिकायत को स्थानीय पुलिस ने हल्के में लिया तो पीड़ितों में से एक ने मंगलवार को एसपी की जनसुनवाई में पहुंचकर शिकायत की। इसके बाद सक्रिय हुई पुलिस मंगलवार को दिनभर जांच में लगी रही। इधर बुधवार को पीड़ितों में से दो महिलाओ ने थाने में पहुंचकर टीआई एमएस धुर्वे को पूरा घटनाक्रम बताया। पीडितों की शिकायत पर पुलिस ने महिलाओं के अपमान के लिए जिम्मेदार 13 लोगों पर आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत मामला पंजीबद्ध किया है।

इस मामले में टीआई एमएस धुर्वे ने बताया कि टेकाढाना पंचायत के चीतल भाटा गांव की पांच महिलाएं रोजी रोटी के लिए मजदूरी की तलाश में होशंगाबाद जिले के किसी गांव में गई थी। कुछ ही दिन पहले वे गांव लौटी थी। इस बीच लौटी महिलाओं में से किसी एक महिला ने यह अफवाह गांव में फैला दी कि इन महिलाओं ने वहां चरित्रहीनता के कृत्य किए।

इसके बाद 19 जनवरी को टेकाढाना सरपंच के पति दिलीप वटके ने ग्राम कोटवार और गांव के कुछ सामाजिक लोगों के साथ चार महिलाओं के साथ खाप पंचायत की तर्ज पर समाज के सामने तलब किया। यहां अपशब्दों के साथ उनकी जमकर बेइज्जती की गयी।और फरमान सुनाया गया कि इन्हें फटे जूतों की माला पहनाकर गाजे बाजों के साथ गांव में घुमाया जाए।

बताया गया कि पंचायत का संचालन दिलीप वटके कर रहा था। महिलाओं को भद्दी भद्दी गालियां देकर ना केवल अपमानित किया गया बल्कि इन्हें जान से मारने की धमकी देकर एक दूसरे के गले में जूतों की माला डाल कर गांव में भी घुमाया गया। पंचायत नान्हू गोंड के मकान में बुलाई गयी थी। अपमान की इस करतूत में चम्पालाल ने ढोल बजाया।

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इस घटना से उजड़ गया एक परिवार

महाभारत काल के द्रोपदी अपमान की तरह घटे चीतल भाटा गांव की घटना से एक पीड़ि‍त महिला (सुरतिया) का परिवार बिखर गया। इस महिला ने बताया कि घटना से दुखी होकर उसके पति ने उसे तलाक दे दिया और आक्रोश में खुद गांव से बाहर चला गया है। यह महिला अपने दो बेटियों राधिका और साधिका के साथ थाना आई थी। गांव से बहिष्कृत मां बेटियों के पास वापस जाने के लिए किराए के लिए तक पैसे नहीं थे।

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