किसी के भी आंखों में खुशी के आंसू आ जाते हैं, इसीलिए चाहकर भी आंसू नहीं रोक पा रहे थे ‘रोजर फेडरर’

कहते हैं कि अगर बड़ी सफलता मिलती है तो किसी के भी आंखों में खुशी के आंसू आ जाते हैं. ऐसा ही कुछ विंबलडन में देखने को मिला, यहां दिग्गज टेनिस खिलाड़ी रोजर फेडरर (Roger Federer) तीसरे ग्रैंड स्लैम-विंबलडन का पुरुष एकल खिताब जीतने के बाद रोते हुए दिखे. 35 वर्षीय रोजर फेडरर अब तक के अपने करियर में न जाने कितनी बार विजेता बने होंगे, लेकिन शायद विंबलडन का खिताब तीसरे बार जीतने पर भावुक हो गए. उनका यह वीडियो ट्विटर पर वायरल हो रहा है. विंबलडन ने अपने ट्विटर पेज से इस वीडियो को ट्वीट किया है, जो लोगों को काफी पसंद आ रहा है. महज 14 घंटे में इस वीडियो को 15 हजार लोगों ने रिट्वीट किया है. किसी के भी आंखों में खुशी के आंसू आ जाते हैं, इसीलिए चाहकर भी आंसू नहीं रोक पा रहे थे 'रोजर फेडरर'

फेडरर ने जीता 19वां ग्रैंड स्लैम

स्विट्जरलैंड के दिग्गज टेनिस स्टार रोजर फेडरर ने क्रोएशिया के मारिन सिलिक को आसानी से हराते हुए साल के तीसरे ग्रैंड स्लैम-विंबलडन का पुरुष एकल खिताब जीत लिया. ऑल इंग्लैंड क्लब में फेडरर की यह रिकार्ड आठवीं खिताबी जीत है और इसके साथ ही फेडरर ने ओपन एरा में पीट सैंप्रास और ओवरऑल ब्रिटेन के महान खिलाड़ी विलियम रेनशॉ के रिकॉर्ड को ध्वस्त किया. सैंप्रास और रेनशॉ के नाम सात-सात बार विंबलडन जीतने का रिकॉर्ड है.

यह फेडरर का 19वां ग्रैंड स्लैम खिताब है और सर्वाधिक ग्रैंड स्लैम खिताब जीतने के मामले में वह स्पेन के राफेल नडाल (15 खिताब) से चार खिताब आगे निकल आए हैं. फेडरर ने ओपन एरा में सर्वाधिक आयु में विंबलडन खिताब जीतने का रिकॉर्ड भी कायम किया. उन्होंने 35 साल 342 दिन की आयु में यह खिताब जीता है.

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ग्रास कोर्ट के बादशाह हैं फेडरर

अपने दूसरे ग्रैंड स्लैम और पहले विंबलडन खिताब के लिए प्रयासरत सिलिक की फेडरर के सामने एक नहीं चली. अपने करियर का 19वां ग्रैंड स्लैम खिताब अपने नाम करने की दिशा में फेडरर ने 2014 में जापान के केई निशिकोरी को हराकर अमेरिकी ओपन जीत चुके सिलिक को 6-3, 6-1, 6-4 से हराया.

2014 से 16 के बीच तीन बार विंबलडन क्वार्टर फाइनल में पहुंचकर हारने वाले सिलिक ने पहली बार इस अग्रणी ग्रास कोर्ट टूर्नामेंट के फाइनल में जगह बनाई थी, लेकिन ग्रास कोर्ट का बादशाह कहे जाने वाले फेडरर ने उन्हें पहली बार विंबलडन खिताब जीतने से रोक दिया.

दूसरी ओर, इस साल आस्ट्रेलियन ओपन खिताब जीत चुके फेडरर विंबलडन में रिकॉर्ड 11वां फाइनल खेलते हुए एक बार फिर विजेता बने. वह 2014, 2015 में भी फाइनल में पहुंचे थे लेकिन वह सर्बिया के नोवाक जोकोविक के हाथों हार गए थे. इसके अलावा 2016 में वह सेमीफाइनल में कनाडा के मिलोस राओनिक के हाथों हार गए थे.

पहले सेट के बाद सिलिक पड़े फीके

बहरहाल, पहले सेट की शुरुआत में सिलिक ने अपना क्लास दिखाया और एक समय 2-2 की बराबरी पर पहुंच गए थे लेकिन बाद में वह फेडरर के अद्वितीय क्लास और अनुभव के आगे बेबस नजर आए. फेडरर ने यह सेट 6-3 से अपने नाम कर मैच को दूसरे सेट तक बढ़ाया.

दूसरा सेट सिलिक के लिए और भी निराशाजनक साबित हुआ. वह इस सेट में सिर्फ एक गेम जीत सके. फेडरर ने अपना वर्चस्व कायम करते हुए यह सेट 6-1 से जीता और यह जता दिया कि उनके अनुभव और क्लासिक टेनिस के आगे सिलिक की तेजतर्रार सर्विस की एक नहीं चलने वाली है.

तीसरे और निर्णायक सेट में सिलिक ने धमाकेदार शुरुआत करते हुए 2-1 की बढ़त हासिल कर ली. वह इस सेट में पहले से बेहतर नजर आए. फेडरर ने इसके बाद दो गेम जीतते हुए 3-3 की बराबरी और फिर 5-3 से आगे हो गए. सिलिक ने स्कोर 4-5 कर मैच को रोमांच देने का प्रयास किया, लेकिन फेडरर ने यहां अपने अनुभव का कमाल दिखाते हुए सिलिक को वापसी का मौका नहीं दिया और सेट के साथ मैच भी अपने नाम किया.

इस तरह फेडरर ने आठवीं बार ऑल इंग्लैंड क्लब में अपना परचम लहराया. एक समय उन्हें चुका हुआ कहा जाने लगा था, लेकिन इस कद्दावर खिलाड़ी ने कोर्ट पर शानदार वापसी करते हुए अपनी प्रतिष्ठा के साथ न्याय किया. फेडरर ने इससे पहले 2003, 2004, 2005, 2006, 2007, 2009 और 2012 में यहां चैम्पियन बनने का गौरव हासिल किया था.

विंबलडन में आठ खिताब के अलावा फेडरर पांच बार आस्ट्रेलियन ओपन, एक बार फ्रेंच ओपन और पांच बार अमेरिकी ओपन खिताब जीत चुके हैं.

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