चुनावी मोड में बिहार: सीटों की खींचतान के बीच चमत्कारी चेहरा किसका होगा…

बिहार अब चुनावी मोड़ में आ गया है और सभी दल अपनी-अपनी सियासी शतरंज पर हर दांव को सही समय और सही तरीके से खेलने के लिए चाल चलने को तैयार हैं। इस दांव में एक तरफ एनडीए गठबंधन है तो दूसरी ओर विपक्षी महागठबंधन। दोनों तरफ से मोहरे तैयार किए जा रहे हैं कि कौन-कब क्या चाल चलेगा? कहते हैं कि राजनीति में कुछ भी संभव है और संभावनाएं बनी रहती हैं। 

एनडीए की बिछ गई है बिसात, मोहरे तैयार

एनडीए की बात करें तो उनकी बिसात बिछ चुकी है लेकिन उनकी ओर से चेहरे और सीट शेयरिंग को लेकर सियासी दांव-पेंच उलझता जा रहा है। इसमें जदयू और भाजपा के बीच तल्खी और बयानबाजी यह दिखाती है कि भीतर सबकुछ ठीक नहीं, लेकिन पार्टी के वरिष्ठ नेता बयानों की तल्खी को कम करने की कवायद करते नजर आते हैं। 

भाजपा को चुनावी गणित समझा रही जदयू

भाजपा जहां लोकसभा चुनाव में पीएम मोदी को एनडीए का चेहरा बनाने की जिद पर अड़ी है तो वहीं जदयू अपने नेता और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के चेहरे को ही चमत्कारी चेहरा बताकर भाजपा को चुनावी गणित समझाने में लगी है। इस मामले को लेकर विपक्षी पार्टियां एनडीए पर तंज कसने का कोई मौका चूकना नहीं चाहतीं और अपने दांव को संभालकर चलने में लगी हैं। 

जदयू नेता केसी त्यागी ने आश्वस्त करते हुए कहा है कि बिहार में एनडीए में सब कुछ ठीक है। गठबंधन में कुछ ना कुछ घटनाक्रम तो होता रहता है। अभी तो आम का मौसम है, इतनी जल्दी खट्टा कैसे हो सकता है? उन्होंने कहा कि बिहार में जो यूएसपी है वह नीतीश कुमार हैं। आगामी लोकसभा विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार का भरपूर इस्तेमाल करना चाहिए।

एक चैनल को दिए अपने इंटरव्यू में केसी त्यागी ने कहा कि 2019 चुनाव के मद्देनजर सीटों के बंटवारे पर  2014 को देखना चाहिेए, भले ही हमें दो सीटें मिली थीं लेकिन वोट हमारा 16 फीसदी था और जब वह बीजेपी के साथ जुड़ गया तब बीजेपी ऊपर चली गई।

उन्होंने कहा कि सीटों को लेकर 2009 की बात करें तब उस वक़्त हम 25 सीटों पर लड़े थे। यह घटनाओं का क्रम घटता-बढ़ता रहता है। उन्होंने कहा कि सब कुछ ठीक रहेगा और हम मिलजुल कर सीटों का बंटवारा कर लेंगे। चुनाव से पहले सभी दलों को अपनी रणनीति के आंकलन का प्रदर्शन करने का अधिकार है। 

केसी त्यागी के इस बयान के बाद शनिवार को जदयू और भाजपा नेता सीट शेयरिंग के मुद्दे पर उलझ पड़े। जिसका जवाब राजद ने दिया। जदयू प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा कि लोकसभा हो या विधानसभा का चुनाव बिहार में नीतीश कुमार ही एनडीए का चेहरा होंगे। उनके चेहरे पर ही एनडीए चुनाव लड़ेगी। 

 जदयू और बीजेपी के बीच चले बयानों के तीर

राजीव रंजन ने लोकसभा में ज्यादा सीटों की दावेदारी दिखाते हुए कहा कि लोकसभा  चुनाव में जदयू ज्यादा सीटों पर लड़ेगी और ये बीजेपी के नेता भी जानते हैं। हमारी पार्टी गठबंधन में अहम भूमिका निभाएगी और हमारे नेता की करिश्माई छवि का भी बिहार में फायदा होगा इसीलिए हमें हमारी सीट मिलनी चाहिए।

इस बात का समर्थन करते हुए जदयू प्रवक्ता संजय सिंह ने भी भजपा को पुरानी बातें याद दिलाते हुए कहा कि बीजेपी याद करे कि बिना नीतीश कुमार के बिहार में चुनाव लड़ने पर उनकी क्या स्थिति हुई थी। उन्होंने भाजपा नेता गिरिराज सिंह पर कटाक्ष करते हुए कहा कि अपने बड़बोले नेता को बीजेपी समझाए क्योंकि उनके बेतुके बयान से एनडीए की छवि खराब होती है। 

जदयू नेताओं के इन बयानों पर बीजेपी के नेता नितिन नवीन ने करारा पलटवार किया और कहा कि पहले जदयू को अपने आप को आईने में देखना चाहिये और फिर एेसे बयान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि  2014 में जदयू ने कितनी सीटें जीती थीं ये उन्हें अच्छे से पता है। अपनी पिछली बातों को याद कर उनपर अमल भी करना चाहिए। 

 

लोकसभा चुनाव में चेहरे की बात को स्पष्ट करते हुए नवीन ने कहा कि पीएम मोदी ही एकमात्र चेहरा होंगे।बीजेपी के लोकसभा में सीटों के बंटवारे का फॉर्मूले का भी एलान करते हुए नवीन ने कहा कि 2014 के चुनाव में हुए परफॉर्मेंस ही अगले लोकसभा में सीटों के बंटवारे का आधार होगा ऐसे में सभी को साथ मिलकर चुनाव लड़ने की जरुरत है।

सीट बंटवारे पर भाजपा के वरिष्ठ नेता सह बिहार सरकार में पथ निर्माण मंत्री नंद किशोर यादव ने कहा कि सीट शेयरिंग के मुद्दे पर सीएम नीतीश कुमार अपनी बात रखेंगे। कौन क्या बोलता है इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है। 

साथ ही उन्होंने नेता प्रतिपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि तेजस्वी यादव को सपने देखने की जरूरत नहीं है। 

लोजपा ने कहा-सीटों पर समझौता नहीं

वहीं एनडीए का हिस्सा लोकजनशक्ति पार्टी के नेता सह बिहार सरकार में मंत्री पशुपति नाथ पारस ने कहा है कि  2019 के लोकसभा चुनाव में लोजपा छह सीट से कम पर समझौता नहीं करेगी। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि पार्टी मुंगेर, वैशाली और खगड़िया सीट बदल सकती है। उन्होने कहा कि सीटों की अदला-बदली की जा सकती है,

लेकिन संख्याबल में कोई समझौता नहीं होगा।

वहीं, रालोसपा ने तो संकेत दिेए हैं कि वह एनडीए में ही रहेगी और उपेंद्र कुशवारा राजद के साथ नहीं जाएंगे लेकिन राजनीति में कुछ कहा नहीं जा सकता। क्योंकि चेहरे की सियासत पर उनकी पार्टी के नेता नागमणि ने कहा था कि विधानसभा में नीतीश ही क्यों उपेंद्र कुशवाहा भी चुनावी चेहरा हो सकते हैं। 

महागठबंधन में भी हो सकती है खींचतान

एनडीए से इतर विपक्षी महागठबंधन में भी सीट शेयरिंग को लेकर जंग छिड़ सकती है क्यों सीट शेयरिंग को लेकर हर बार बैकफुट पर रहनेवाली कांग्रेस ने राजद से साफ शब्दों में कह दिया है कि पिछले बार की स्थिति इसबार नहीं दोहरायी जाएगी। वहीं, आरजेडी नेता हैसियत और परिस्थिति के मुताबिक सीट शेयरिंग के जरिये मामला सुलझा लेने की बात कह रहे हैं।

 

बढ़ सकती हैं राजद की मुश्किलें

सीटों को लेकर आरजेडी की मुश्किलें इसबार और इसलिए बढ़ जाएंगी, क्योंकि इसबार कांग्रेस, एनसीपी के साथ दो नए सहयोगी और जुड़ गए हैं। जीतन राम मांझी की पार्टी हिंदुस्तान आवाम मोर्चा और शरद यादव की पार्टी लोकतांत्रिक जनता दल। पांच पार्टीयों के महागठबंधन में किसको कितनी सीटें मिलेंगी ये अभी तय नहीं है।

वहीं, बसपा प्रमुख मायावती ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि उनकी पार्टी गठबंधन के लिए मजबूर नहीं है। सम्मानजनक सीटें मिलने पर ही गठबंधन या समझौते जैसी बात होगी।

उन्होंने कहा कि बसपा किसी भी राज्य में किसी भी चुनाव में किसी भी पार्टी के साथ केवल सम्मानजनक सीटें मिलने पर ही गठबंधन-समझौता करेगी, अन्यथा अकेली चुनाव लड़ना ज्यादा बेहतर समझेगी। 

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