जब क्रिकेट के मैदान में 11वें खिलाड़ी बन उतरे थे शशि कपूर, हारने के बाद भी जीता था दिल

सिनेमा के परदे से लेकर थियेटर तक अभिनय की अमिट छाप छोड़ने वाले पद्मभूषण शशि कपूर क्रिकेट के मैदान पर भी 11वें खिलाड़ी के रूप में उतर चुके हैं, टीम बेशक मुकाबला हार गई, लेकिन वे चश्मदीद रहे लोगों का दिल जीत लेने में वे कामयाब रहे थे। पद्मभूषण शशि कपूर ने गोरखपुर में क्रिकेटर का स्वरूप भी पेश किया था। जब क्रिकेट के मैदान में 11वें खिलाड़ी बन उतरे थे शशि कपूर, हारने के बाद भी जीता था दिल

राजकीय सम्मान के साथ हो रहा है शशि कपूर का अंतिम संस्कार, रो पड़े सितारे

सन् 1952 में मियां साहब इंटर कॉलेज के मैदान पर बाढ़ पीड़ितों की सहायतार्थ हुए एक मैच में उन्होंने पृथ्वी थियेटर की टीम की नुमाइंदगी की थी। शशि कपूर से जुड़े इस खास संस्मरण को साझा किया लखनऊ में जा बसे हल्लौर (सिद्धार्थनगर) के मूल निवासी वरिष्ठ रंगकर्मी सुल्तान अहमद रिजवी ने। रिजवी न सिर्फ शशि कपूर के थियेटर प्रेम की कद्र करते थे बल्कि क्रिकेट के उस मुकाबले में आमने-सामने (प्रतिद्वंद्वी) टीमों का हिस्सा होते हुए भी शशि कपूर के साथ बने यादगार रिश्ते के कद्रदान भी हैं।

 

लखनऊ रह रहे हल्लौर निवासी वरिष्ठ रंगकर्मी सुल्तान अहमद रिज़वी ने फोन पर बताया कि 1952 में गोरखपुर के आसपास भीषण बाढ़ आई थी। मदद जुटाने के लिए पृथ्वीराज कपूर की थियेटर टीम का शो कराने की पहल मियां साहब ने की। शर्त थी कि प्रशासन टिकट बेचेगा। इस बुलावे पर पृथ्वीराज कपूर अक्टूबर में अपनी टीम के साथ गोरखपुर आए। शशि कपूर भी इस टीम का हिस्सा थे। ये टीम नौ दिन गोरखपुर में रही और आठ रोज विजय टॉकीज के परदे पर सिनेमा नहीं बल्कि अलग-अलग नाटकों का मंचन हुआ। बाल कलाकार के रूप में शशि कपूर ने इनमें छोटी भूमिकाएं निभाई थीं। शम्मी कपूर, प्रेमनाथ, राजेंद्र नाथ जैसे कई और नामचीन कलाकार भी साथ आए थे।
 

सुल्तान अहमद रिज़वी के मुताबिक बाढ़ पीड़ितों की सहायता के क्रम में ही क्रिकेट मैच भी हुआ था। पहली ही बॉल पर पृथ्वीराज कपूर बोल्ड हो गए थे लेकिन उन्होंने उस गेंद को ट्राई बॉल बताते हुए दोबारा बैटिंग की। पृथ्वी थियेटर की क्रिकेट टीम में 11वें खिलाड़ी के तौर पर शशि कपूर शामिल हुए। कम उम्र का क्रिकेटर देख कॉलेज टीम ने हम उम्र प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ी के तौर पर मुझे भी मैदान पर उतार दिया। मैच का परिणाम कॉलेज टीम के पक्ष में रहा। नतीजा आने के बाद दोनों टीमों के खिलाड़ी एक-दूसरे से मगर मैंने और शशि बाबा ने गले मिलकर होली और ईद की बानगी पेश की।
 सुल्तान अहमद रिजवी की फेसबुक वॉल से
आज नाटक का एक चमकता सितारा नहीं रहा। मेरे उनके रिश्ते नाटक, फिल्म के नही थे, बल्कि क्रिकेट ग्राउंड के थे, जो 1952 में बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए हुए क्रिकेट के मुकाबले से जन्मे थे। सितारे का अंत कुछ जल्द हो गया, जिसने मुझे हिला कर रख दिया। नमन है ऐ दोस्त तुम्हें। आप ने मुंबई को वो चीज (पृथ्वी थियेटर) देकर अपने पापा जी (प्रृथ्वीराज कपूर) को आश्वस्त किया था कि थियेटर नही रुकेगा। आज भारत के सभी नाट्य कर्मी मुंबई के उस मंदिर की कसम खा रहे हैं कि नाट्य गतिविधियां बनी रहेंगी। 
इस्लामियां कॉलेज ऑफ कॉमर्स बना था ग्राउंड
लखनऊ रह रहे हल्लौर निवासी वरिष्ठ रंगकर्मी सुल्तान अहमद रिज़वी ने फोन पर बताया कि तब जहां यह क्रिकेट मैच हुआ था, अब वहां इस्लामियां कॉलेज ऑफ कॉमर्स बन चुका है। जुबली टॉकीज के पीछे खेले गए उस मैच की यादें अब भी उनके जेहन में ताजा हैं।

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