जब संख्याबल के आगे झुक गए थे अटल, 1996 का वो ऐतिहासिक भाषण

देश के पूर्व प्रधानमंत्री और कवि अटल बिहारी वाजपेयी की तबीयत ठीक नहीं है. सोमवार को रुटीन चेकअप के लिए उन्हें नई दिल्ली के एम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया. अटल जी को यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन है. सोमवार शाम से ही एम्स में नेताओं का जमावड़ा लगा रहा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी समेत कई दिग्गज अटल का हाल लेने पहुंचे. अटल बिहारी वाजपेयी ने तीन बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली. एक 13 दिन, दूसरी बार 13 महीने और फिर पूरे पांच साल तक. देश के पूर्व प्रधानमंत्री और कवि अटल बिहारी वाजपेयी की तबीयत ठीक नहीं है. सोमवार को रुटीन चेकअप के लिए उन्हें नई दिल्ली के एम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया. अटल जी को यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन है. सोमवार शाम से ही एम्स में नेताओं का जमावड़ा लगा रहा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी समेत कई दिग्गज अटल का हाल लेने पहुंचे. अटल बिहारी वाजपेयी ने तीन बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली. एक 13 दिन, दूसरी बार 13 महीने और फिर पूरे पांच साल तक.   जब एक वोट से गिर गई सरकार...  1996 के चुनाव परिणामों के बाद 16 मई 1996 को अटल बिहारी वाजपेयी ने देश के 11वें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली थी. लेकिन एक मत के चलते बीजेपी बहुमत साबित नहीं कर पाई, परिणाम स्वरूप समय से पहले ही बीजेपी के पहले प्रधानमंत्री को इस्तीफा देना पड़ा और सरकार 13 दिन बाद गिर गई थी.  दरअसल, बीजेपी को लोकसभा में 161 सीटें मिली थीं और कांग्रेस को 140 सीटें मिली थीं, लेकिन फ्लोर टेस्ट के दौरान वाजपेयी सरकार के पक्ष में 269 वोट और उनके विरोध में 270 वोट पड़े थे. इस्तीफा देने से पहले अटल बिहारी वाजपेयी ने संसद में यादगार भाषण दिया.  उन्होंने लोकसभा में कहा था कि सदन में एक व्यक्ति की पार्टी है, वो हमारे खिलाफ जमघट करके हराने का प्रयास कर रहे हैं. उन्हें पूरा अधिकार है लेकिन वो 'एकला चलो रे' के रास्ते पर चल रहे हैं. ये देश के भलाई के लिए एक हो रहे हैं तो स्वागत है.  विपक्ष पर किया था जमकर वार  साथ ही उन्होंने कहा था कि हमारा क्या अपराध है. हमें क्यों कठघरे में खड़ा किया जा रहा है? यह जनादेश ऐसे ही नहीं मिला है. हमने मेहनत की है, इसके पीछे वर्षों का संघर्ष है, साधना है. हम देश सेवा कर रहे हैं वो भी निस्स्वार्थ भाव से और पिछले 40 सालों से ऐसे ही करते आ रहे हैं.  उन्होंने आगे कहा कि एक-एक सीटों वाली पार्टियां कुकुरमुत्ते की तरह उग आती हैं. राज्यों में आपस में लड़ती हैं. दिल्ली में आकर एक हो जाती हैं. हम देश की सेवा के कार्य में जुटे रहेंगे. उन्होंने कहा, 'हम आपको विश्वास दिलाते हैं कि जो कार्य हमने अपने हाथों में लिया है, उसे पूरा किए बिना विश्राम नहीं करेंगे. अध्यक्ष महोदय, मैं अपना त्यागपत्र राष्ट्रपति को देने जा रहा हूं.'  उन्होंने अपने भाषण के दौरान कहा कि हम थोड़ी ज्यादा सीटें नहीं ला सके. ये हमारी कमजोरी है. हमें बहुमत मिलना चाहिए था. हमें सरकार बनाने को राष्ट्रपति ने अवसर दिया, लेकिन हमें सफलता नहीं मिली. हम सदन में सबसे बड़े विरोधी दल के रूप में बैठेंगे और आपको हमारा सहयोग लेकर सदन चलाना पड़ेगा. मगर सरकार आप कैसी बनाएंगे, वो सरकार किस कार्यक्रम पर बनेगी वो सरकार कैसी चलेगी मैं नहीं जानता.  'हार नहीं मानूंगा, रार नहीं ठानूंगा', पढ़ें अटल की 5 यादगार कविताएं  वाजपेयी ने अपने शब्दों से प्रहार करते हुए कहा था, 'ये सरकार टिकाऊ होगी, उसके लक्षण कम ही दिखते हैं. पहले तो उसका जन्म लेना कठिन है, फिर उसका जीवित रहना कठिन है और ये सरकार अंतर्विरोध में घिरी हुई है, ये देश का कितना लाभ कर सकेगी, ये एक बड़ा सवाल है. ऐसे में तब आपको हर बात के लिए कांग्रेस के पास दौड़ना पड़ेगा और आप उनपर निर्भर हो जाएंगे. हम फ्लोर पर कोर्डिनेशन करते हैं उसके बिना सदन नहीं चलता. आप सारा देश चलाना चाहते हैं, अच्छी बात है हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं.'  और फिर 28 मई, 1996 को अटल ने अपने भाषण में कहा कि हम संख्याबल के सामने सिर झुकाते हैं. अध्यक्ष महोदय, मैं अपना इस्तीफा राष्ट्रपति जी को देने जा रहा हूं.  कर्नाटक चुनाव के दौरान भी आई थी याद  आपको बता दें कि हाल ही में कर्नाटक चुनाव के दौरान जब बीजेपी की सरकार बहुमत ना होने के कारण गिरी. तो बी.एस. येदियुरप्पा ने इस्तीफे का ऐलान करते हुए भाषण दिया. उस दौरान उनके भाषण की तुलना भी अटल बिहारी वाजपेयी के 1996 में दिए गए भाषण से की गई थी.

जब एक वोट से गिर गई सरकार…

1996 के चुनाव परिणामों के बाद 16 मई 1996 को अटल बिहारी वाजपेयी ने देश के 11वें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली थी. लेकिन एक मत के चलते बीजेपी बहुमत साबित नहीं कर पाई, परिणाम स्वरूप समय से पहले ही बीजेपी के पहले प्रधानमंत्री को इस्तीफा देना पड़ा और सरकार 13 दिन बाद गिर गई थी.

दरअसल, बीजेपी को लोकसभा में 161 सीटें मिली थीं और कांग्रेस को 140 सीटें मिली थीं, लेकिन फ्लोर टेस्ट के दौरान वाजपेयी सरकार के पक्ष में 269 वोट और उनके विरोध में 270 वोट पड़े थे. इस्तीफा देने से पहले अटल बिहारी वाजपेयी ने संसद में यादगार भाषण दिया.

उन्होंने लोकसभा में कहा था कि सदन में एक व्यक्ति की पार्टी है, वो हमारे खिलाफ जमघट करके हराने का प्रयास कर रहे हैं. उन्हें पूरा अधिकार है लेकिन वो ‘एकला चलो रे’ के रास्ते पर चल रहे हैं. ये देश के भलाई के लिए एक हो रहे हैं तो स्वागत है.

साथ ही उन्होंने कहा था कि हमारा क्या अपराध है. हमें क्यों कठघरे में खड़ा किया जा रहा है? यह जनादेश ऐसे ही नहीं मिला है. हमने मेहनत की है, इसके पीछे वर्षों का संघर्ष है, साधना है. हम देश सेवा कर रहे हैं वो भी निस्स्वार्थ भाव से और पिछले 40 सालों से ऐसे ही करते आ रहे हैं.

उन्होंने आगे कहा कि एक-एक सीटों वाली पार्टियां कुकुरमुत्ते की तरह उग आती हैं. राज्यों में आपस में लड़ती हैं. दिल्ली में आकर एक हो जाती हैं. हम देश की सेवा के कार्य में जुटे रहेंगे. उन्होंने कहा, ‘हम आपको विश्वास दिलाते हैं कि जो कार्य हमने अपने हाथों में लिया है, उसे पूरा किए बिना विश्राम नहीं करेंगे. अध्यक्ष महोदय, मैं अपना त्यागपत्र राष्ट्रपति को देने जा रहा हूं.’

उन्होंने अपने भाषण के दौरान कहा कि हम थोड़ी ज्यादा सीटें नहीं ला सके. ये हमारी कमजोरी है. हमें बहुमत मिलना चाहिए था. हमें सरकार बनाने को राष्ट्रपति ने अवसर दिया, लेकिन हमें सफलता नहीं मिली. हम सदन में सबसे बड़े विरोधी दल के रूप में बैठेंगे और आपको हमारा सहयोग लेकर सदन चलाना पड़ेगा. मगर सरकार आप कैसी बनाएंगे, वो सरकार किस कार्यक्रम पर बनेगी वो सरकार कैसी चलेगी मैं नहीं जानता.

वाजपेयी ने अपने शब्दों से प्रहार करते हुए कहा था, ‘ये सरकार टिकाऊ होगी, उसके लक्षण कम ही दिखते हैं. पहले तो उसका जन्म लेना कठिन है, फिर उसका जीवित रहना कठिन है और ये सरकार अंतर्विरोध में घिरी हुई है, ये देश का कितना लाभ कर सकेगी, ये एक बड़ा सवाल है. ऐसे में तब आपको हर बात के लिए कांग्रेस के पास दौड़ना पड़ेगा और आप उनपर निर्भर हो जाएंगे. हम फ्लोर पर कोर्डिनेशन करते हैं उसके बिना सदन नहीं चलता. आप सारा देश चलाना चाहते हैं, अच्छी बात है हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं.’

और फिर 28 मई, 1996 को अटल ने अपने भाषण में कहा कि हम संख्याबल के सामने सिर झुकाते हैं. अध्यक्ष महोदय, मैं अपना इस्तीफा राष्ट्रपति जी को देने जा रहा हूं.

कर्नाटक चुनाव के दौरान भी आई थी याद

आपको बता दें कि हाल ही में कर्नाटक चुनाव के दौरान जब बीजेपी की सरकार बहुमत ना होने के कारण गिरी. तो बी.एस. येदियुरप्पा ने इस्तीफे का ऐलान करते हुए भाषण दिया. उस दौरान उनके भाषण की तुलना भी अटल बिहारी वाजपेयी के 1996 में दिए गए भाषण से की गई थी.

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