जलसमाधि ले लेगी अब हमारी पृथ्वी, 2 डिग्री और बढ़ी धरती पर गर्मी

पृथ्वी की सतह पर तापमान में वृद्धि लगातार हो रही है. मौजूदा समय तक वैज्ञानिकों की आम राय है कि 1950 से अभीतक के आंकड़े बता रहे हैं कि पृथ्वी का तापमान 0.8 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ चुका है. पृथ्वी के तापमान में हो रही इस वृद्धि के पीछे वैज्ञानिकों में आम राय है कि 1950 के दशक के बाद से तेजी से होता औद्योगिकरण इसके लिए काफी हद तक जिम्मेदार है. वहीं मौजूदा तापमान के अधिक स्तर का संकेत हमें पृथ्वी के मौसम में तेजी से होते बदलाव के तौर पर भी देखने को मिल रहा है.जलसमाधि ले लेगी अब हमारी पृथ्वी, 2 डिग्री और बढ़ी धरती पर गर्मीAuction: चित्रकार लिओनार्दो दा विंची की पेंटिंग 2940 करोड़ रुपए में नीलाम !

तापमान में हो रहे इस इजाफे से परेशान लगभग दुनिया के सभी देशों का मानना है कि उन्हें इस वृद्धि को रोकने के लिए एकजुट होकर कड़े कदम उठाने की जरूरत है. ऐसा इसलिए कि वैज्ञानिकों का दावा है कि सभी देशों को औद्योगीकरण से पहले की स्थिति तक पृथ्वी का तापमान पहुंचाने के लिए कारगर कदम उठाने चाहिए. ऐसा नहीं किया गया तो अगले 50 से 100 साल के अंतराल में पृथ्वी के जन-जीवन के सामने गंभीर चुनौती होगी.

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ज्यादातर वैज्ञानिकों का यहां तक दावा है कि यदि तापमान को बढ़ने से नहीं रोका गया और अगले कुछ दशकों में पृथ्वी का तापमान 2 डिग्री सेलसियस से 4 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है. ऐसी स्थिति में हमें क्या चुनौतियां देखने को मिल सकती है जिससे पृथ्वी से जीवन समाप्त होने का खतरा है:

1. अधिक हो जाएगा पृथ्वी का तापमान

यदि दुनियाभर में औद्योगिक गतिविधियों यूं ही चलती रही तो आने वाले 100-50 वर्षों में पृथ्वी के तापमान में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस का इजाफा हो जाएगा. यह इजाफा 4 डिग्री सेल्सियस से अधिक भी हो सकता है.

2. गर्म हवा और लू की मार

पृथ्वी पर अधिक तापमान का सीधा मतलब है कि पृथ्वी पर चलने वाली हवाएं और अधिक गर्म हो जाएंगी और पृथ्वी के कई हिस्से लू की चपेट में रहेंगे.

3. समुद्र तल में होगा 2-4 फीट का इजाफा

पृथ्वी पर अधिक तापमान और लू के चलते वैज्ञानिकों का दावा है कि समुद्र तल में इजाफा देखने को मिलेगा. समुद्र तल में यह इजाफा 0.7 से 1.2 मीटर तक (लगभग 2 से 4 फीट). वहीं दुनिया के कई बड़े देशों के इर्द-गिर्द समुद्र तल में इससे अधिक इजाफा भी दर्ज हो सकता है.

4. बाढ़ और सूखे में तबाह होगी जिंदगी

पृथ्वी के तापमान और समुद्र तल में इजाफे से पृथ्वी पर मौसम का तारतम्य बिगड़ने का खतरा है. एसी स्थिति में मानसून में अधिक बारिश और बाढ़ देखने को मिलेगी. वहीं अधिक बारिश और लंबे मानसून से गर्मी के दिन लंबे हो जाएंगे जिससे सूखे की स्थिति भी लंबे समय तक देखने को मिलेगी. 

5. आने लगेंगे खतरनाक तूफान

हालांकि वैज्ञानिकों को यह साफ नहीं है कि वैश्विक स्तर पर बढ़ते तापमान का पृथ्वी पर चलने वाली तेज हवाओं (ट्रॉपिकल साइक्लोन) पर क्या असर पड़ेगा. लेकिन लगभग सभी देशों का मानना है कि ग्लोबल वॉर्मिंग की स्थिति में पृथ्वी पर बड़े तूफान देखने को मिलेंगे. ऐसा इसलिए कि पृथ्वी के साथ-साथ समुद्र का तापमान भी बढ़ेगा जिससे तेज हवाएं चलेंगी और अधिक बारिश देखने को मिलेगी.

6. समुद्री तटों पर रहना होगा मुश्किल

मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि पृथ्वी के तापमान में अधिक वृद्धि होने की स्थिति में जहां समुद्र का स्तर बढ़ेगा वहीं समुद्री तटों के किनारे लहरों की रफ्तार में भी बड़ा इजाफा हो जाएगा. इस बदलाव के चलते दुनियाभर में समुद्र तटों के किनारे जीवन-यापन मुश्किल हो जाएगा क्योंकि तेज समुद्री लहरों से लगातार तटीय इलाकों पर बाढ़ का खतरा बना रहेगा.

7. चौपट होती खेती से भुखमरी का खतरा

तापमान में इजाफे के चलते होने वाले बदलावों से दुनियाभर में खेती पर गंभीर असर होगा. इसके चलते खाद्य उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हो सकता है. अधिक गर्मी, ज्यादा बारिश और सूखे की स्थिति में फसल खराब होने लगेंगी और उत्पादन क्षमता कम हो जाएगी. मौसम और कृषि वैज्ञानिकों का दावा है कि पृथ्वी का तापमान महज 1 डिग्री बढ़ने पर ही ऐसे असर देखने को मिलने लगेंगे.

8. खत्म हो जाएंगी गई प्रजातियां

पृथ्वी के तापमान में इजाफे से कई पेड़-पौधों और प्रजातियों को अपने लिए उपयुक्त वातावरण तलाशने की चुनौती आ जाएगी. हालांकि मानव सहित ज्यादातर पेड़-पौधे और अन्य जनजीवन तापमान वृद्धि के अनुरूप खुद को ढालने में विफल भी हो सकते हैं. कुछ वैज्ञानिकों का दावा है कि मौजूदा तापमान स्तर पर भी ऐसी स्थिति दुनिया को 2100 तक देखने को मिल सकती है.

9. 21 सदी में ही दिखने लगेगा असर

तापमान वृद्धि से होने वाले ज्यादातक बदलाव 21वीं सदी में दिखाई देने लगेंगे. हालांकि तापमान में वृद्धि इसके बाद भी देखने को मिलती रहेगी यदि दुनिया के सभी देश जल्द एकजुट होकर इसे रोकने की कोशिश नहीं करते. इन बदलावों के चलते लंबी अवधि में हमें देखने को मिलेगा कि कई छोटे-बड़े द्वीप पूरी तरह समुद्र में डूब जाएंगे. वहीं पृथ्वी के कई इलाकों में जगलों की आग भयावह रूप लेगी. साथ ही पृथ्वी के ध्रुवी इलाकों में जमा बर्फ गलकर और गंभार चुनौती खड़ी कर सकती है.

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