जांच में हुआ बड़ा खुलासा: KGMU प्रशासन की गलती से ट्रामा में लगी थी आग…

ट्रॉमा सेंटर में भीषण अग्निकांड के लिए हाई पावर कमेटी ने केजीएमयू प्रशासन को ही जिम्मेदार माना है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि केजीएमयू में फूलप्रूफ फायर फाइटिंग सिस्टम नहीं लगा था। फायर अलार्म खराब पड़े थे। बिजली के तार झूल रहे थे। इसके चलते आग लगी और देखते ही देखते इतना बड़ा अग्निकांड हो गया। इसकी कीमत ट्रॉमा सेंटर के कुछ मरीजों को असमय जान गवांकर चुकानी पड़ी।जांच में हुआ बड़ा खुलासा: KGMU प्रशासन की गलती से ट्रामा में लगी थी आग...उपराष्‍ट्रपति चुनाव : महात्‍मा गांधी के पौत्र Vs वेंकैया नायडू, जानिए ये 5 ख़ास बातें…

रिपोर्ट में कहा गया है कि जिला प्रशासन व फायर विभाग ने इसे लेकर बार-बार चेतावनी दी, लेकिन केजीएमयू प्रशासन इसे नजरअंदाज करता रहा। डीएम कौशल राज शर्मा की अध्यक्षता वाली 4 सदस्यीय इस कमेटी ने सोमवार देर शाम मंडलायुक्त अनिल गर्ग को यह रिपोर्ट सौंपी।

इस टीम में डीएम के अलावा एसएसपी, चीफ इंजीनियर इलेक्ट्रिकल सेफ्टी व चीफ फायर आफिसर भी थे। मंडलायुक्त इस रिपोर्ट को मुख्यमंत्री व शासन को सौंपेंगे। रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रामा सेंटर में आग की चपेट में आने से किसी भी मरीज अथवा तीमारदार की मौत नहीं हुई।

कुछ गंभीर मरीजों को आग से बचा कर दूसरे अस्पताल में शिफ्ट कराने के दौरान उचित इलाज न मिलने से मौत हुई। इसकी पुष्टि मृत मरीजों की डेथ आडिट के बाद ही पूरी तरह सामने आएगी।

फ्रिज से डैमेज कंसील्ड वायरिंग के कारण हादसा

जांच कमेटी ने आग के लिए तृतीय तल पर एक फ्रिज में आई गड़बड़ी को बताया है।

24 घंटे संचालित इस फ्रिज में दवाओं इत्यादि का स्टोर था। खस्ताहाल कंसील्ड वायरिंग में स्पार्किंग होने लगी। इससे फ्रिज का स्टेबलाइजर इतना गर्म हो गया कि उससे चिंगारी फूटकर इधर-उधर गिरने लगी। चिंगारी से कक्ष में रखे कपड़ों व चादर ने आग पकड़ लिया।

अलार्म तक नहीं बजा
आग के कारण धुआं तेजी से फैलने लगा, लेकिन स्मोकिंग सिस्टम घटिया दर्जे का होने कारण फ्लोर पर मौजूद कर्मचारी कुछ समझ नहीं पाए। जब तक वे कुछ समझते, आग विकराल हो गई।

बिजली वायरिंग के चलते दूसरे तल को भी चपेट में ले लिया। सबसे गंभीर बात यह कि एमसीवी भी बंद नहीं हुई जिससे दूसरे फ्लोर में बिजली आपूर्ति बनी रही।

बचाव का प्रभावी फायर फाइटिंग सिस्टम भी नहीं
जांच रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि ट्रॉमा में प्रभावी फायर फाइटिंग प्रबंधन नहीं था। आग बुझाने के लिए रखे गए फायर हायड्रेंट व अग्निरोधक यंत्र सिर्फ शो-पीस बने रहे। जो हायड्रेंट इस्तेमाल लायक थे, उन्हें चलाने के लिए मौजूद कर्मचारी प्रशिक्षित नहीं थे, इसलिए प्रभावी तरीके से उपयोग में नहीं ला पाए।
जांच टीम ने बचाव के पर्याप्त इंतजाम न होने पर ट्रॉमा को हाई रिस्क जोन माना। ट्रॉमा में मरीजों की हमेशा भीड़ रहती है लेकिन हर फ्लोर पर सिर्फ दो अग्निरोधक यंत्र ही मौजूद थे। होजरील सिस्टम भी शो-पीस सा बना मौजूद मिला।

बिजली सप्लाई भी मानक के हिसाब से नहीं
ट्रामा सेंटर की बिजली सप्लाई व्यवस्था भी मानक के तहत नहीं मिली। अधिकांश इलेक्ट्रिक कनेक्शन व पॉइंट बिना एबीसी बॉक्स के संचालित हो रही थी। इसलिए आग लगने पर सप्लाई अपने आप बंद नहीं हुई। इसी कारण तीसरी मंजिल में आग ने दूसरी मंजिल को भी अपनी चपेट में ले लिया और हादसा कई गुना विकराल हो गया।

इन उपायों को तत्काल लागू करें ताकि फिर न हो ऐसा हादसा
– ट्रामा सेंटर व शताब्दी अस्पताल में फुलप्रूफ फायर फाइटिंग सिस्टम हो।
– ट्रामा में पहली, दूसरी व तीसरे फ्लोर पर लोहे की रेलिंग न लगायी जाए।
– हर फ्लोर पर चढ़ने व उतरने के लिए अनिवार्य तौर पर रैंप बने।
– बिजली सप्लाई की पुरानी वायरिंग की गुणवत्ता की पूरी जांच हो।

– बिना एबीसी बॉक्स कोई भी इलेक्ट्रिक कनेक्शन व पॉइंट का संचालन न हो।
– आग से बचाव के लिए हर माह अनिवार्य तौर पर मॉक ड्रिल हो।
– आपदा प्रबंधन यूनिट का गठन कर इसे प्रभावी बनाया जाए।
– कर्मचारी व चिकित्सकों के लिए माह में एक बार जरूरी हो फायर फाइटिंग का प्रशिक्षण।

अब शासन तय करेगा कार्रवाई
मामले पर जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा का कहना है कि ‘ट्रॉमा सेंटर के परीक्षण के बाद आग लगने के कारण, इसके ज्यादा विकराल तौर पर भड़कने और इससे बचाव में हुई चूक को लेकर की गई जांच पड़ताल के बाद तैयार रिपोर्ट मंडलायुक्त को सौंप दी गई है। अब इसके आधार पर आगे की कार्रवाई शासन स्तर पर तय होगी।’

इधर, केजीएमयू बोला- जिला प्रशासन ने पता नहीं कैसे बनाई रिपोर्ट
ट्रॉमा सेंटर में आग के कारण मौतों का आंकड़ा 15 पहुंच गया है। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित हाई पावर कमेटी ने भी अपनी रिपोर्ट में माना है कि आग लगने की वजह से उचित इलाज नहीं मिलने से मौतें हुईं।

पर, केजीएमयू प्रशासन है कि अब भी यह मानने को तैयार नहीं कि ऐसी वजहों से किसी की मौत हुई। केजीएमयू प्रशासन का मौतों पर साफ कहना है कि हमें नहीं मालूम जिला प्रशासन ने कैसे रिपोर्ट बनाई।

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