जाना था कुवैत और पहुच गए पुलिस के पास…!

लखनऊ: कुवैत में नौकरी दिलाने के नाम पर गोमतीनगर स्थित एक कम्पनी ने बिहार व झारखण्ड के रहने वाले 250 से 300 बेरोजगारों को दो करोड़ रुपये से अधिक की रकम वसूली। उनका पासपोर्ट व अन्य दस्तावेज हासिल किये। इसके बाद कम्पनी ताला बंदकर गायब हो गयी। ठगी का शिकार हुए युवकों ने इस संबंध में गोमतीनगर थाने में कम्पनी के संचालक के खिलाफ धोखाधड़ी व अमानत में खयानत
की रिपोर्ट दर्ज करायी है। 

कुवैत में नौकरी दिलाने के नाम पर ढाई करोड़ से अधिक की ठगी
पश्चिम बंगाल निवासी शाहिद खान ने बताया कि धनबाद में खान इण्टरप्राइजेज एण्ड कंस्लटेनसी के नाम से एक दफ्तर खोला गया था। इस कम्पनी ने वहां के अखबारों मेें कुवैत में अलग-अलग पदों पर नौकरी के लिए भर्ती का विज्ञापन निकाला था। विज्ञापन देखने के बाद सैकड़ों की संख्या में बेरोजगारों ने कम्पनी से सम्पर्क किया। इसके बाद कम्पनी के लोगों ने सभी लोगों के असली दस्तावेज, पासपोर्ट जमा कराये। वीजा, टिकट व मेडिकल कराने के लिए कम्पनी के लोगों ने प्रति व्यक्ति 80 से 90 हजार रुपये वसूले। इसके बाद कम्पनी
ने सभी लोगों को लखनऊ मेडिकल के लिए बुलाया। कम्पनी में नौकरी के लिए बिहार व झारखण्ड से करीब 300 युवकों ने आवेदन किया। कम्पनी ने सभी से रुपये लेने के बाद लखनऊ में मेडिकल कराया। कम्पनी ने लखनऊ गोमतीनगर के विराटखण्ड में अपने दफ्तर बताया। यहां दफ्तर के साथ ही कम्पनी का प्रबंध खीरी जनपद निवासी नदीन खान रहता था। सभी युवकों को मेडिकल हुआ। इसके बाद
कम्पनी ने सभी लोगों को ई-मेल व वाट्सअप की मदद से वीजा भेजा। कुछ दिन पहले कम्पनी ने सभी लोगों को फोन कर बताया कि उन लोगों को 12 जनवरी को कुवैत भेजा जायेगा। सभी की फ्लाइट का टिकट हो गया है और फ्लाइट दिल्ली से मिलेगी। कम्पनी के लोगों ने युवकों को दिल्ली में ही उनका पासपोर्ट व अन्य सभी दस्तावेज देने की बात कही। इस बीच शाहिद खान के बहनोई शमशाद व
अन्य युवकोंं ने कम्पनी के प्रबंधक से बातचीत कर पासपोर्ट व अन्य दस्तावेज लखनऊ में ही देने के लिए कहा।

बिहार व झारखण्ड के 300 युवक बने जालसाजों का शिकार

इस पर कम्पनी के लोगों ने उन लोगों को लखनऊ बुला लिया। 10 जनवरी को जब सभी लोग गोमतीनगर के विराटखण्ड स्थित कम्पनी के दफ्तर पहुंचे तो वहा ताला लगा था। युवकों ने कम्पनी के प्रबंधक के मोबाइल पर फोन किया पर फोन बंद था। आसपास के लोगों से जानकारी जुटाने पर पता चला कि कम्पनी बंद हो गयी और फ्लैट में रहने वाले सभी लोग जा चुके हैं। यह बात सुनते ही युवकों के होश उड़ गये। 11 जनवरी को वह लोग शिकायत लेकर गोमतीनगर पुलिस के पास पहुंचे, पर पुलिस ने उनकी मदद नहीं की। पीडि़त युवक लगातार पुलिस के चक्कर काटते रहे, तब जाकर गोमतीनगर पुलिस ने 12 जनवरी को इस मामले में कम्पनी के प्रबंधक नदीम खान के खिलाफ
धोखाधड़ी व अमानत में खयानत की रिपोर्ट दर्ज की। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पुलिस ने सभी युवकों को बताया कि अब पुलिस छानबीन के बाद आगे की कार्रवाई करेगी। ठगी का शिकार हुए सभी युवक नउम्मीद होकर वापस अपने घर लौट गये।
किसी ने घर बेचा तो किसी ने खेत
एफआईआर दर्ज कराने वाले शाहिद खान ने बताया कि नौकरी पाने की चाह में सैकड़ों युवकों ने अपनी जमीन, खेत, घर, मकान व जेवरात बेचकर रुपये जमा कर कम्पनी को दिये थे। कुछ लोग को ऐसे हैं जिन्होंने उधार व ब्याज पर रुपये लेकर नौकरी के लिए कम्पनी को दिया था। सभी को इस बात की उम्मीद थी कि कुवैत में नौकरी मिलने के बाद वह लोग रुपये का इंतजाम कर ले गये और फिर सारी दिक्कतें दूर हो जायेगी। उन लोगों को जब इस बात का पता चला कि वह लोग ठगी का शिकार हुए हैं तो सभी की आंखों से आंसू निकल आये। किसी को कुछ समझ में नहीं आ रहा है कि उन लोगों के साथ हुआ क्या? शाहिद ने बताया कि इस तरह की ठगी करने वालों को तो सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए। हेल्पर, वेल्डर, फीटर सहित कई पदों की नौकरी बतायी गयी थी शिकायतकर्ता शाहिद ने बताया कि अलग-अलग युवकों को उनकी योग्यता के अनुसार कुवैत में नौकरी दिलाने की बात कही गयी थी। कुछ लोगों ने हेल्पर, कुछ ने वेल्डर तो कुछ फीटर के लिए आवेदन किया था। ठगी करने वाली कम्पनी ने पद के अनुसार ही लोगों को वेतन भी बताया था। शाहिद ने बताया कि कुछ अधिक पढऩे लिखे युवकों को तो सुपरवाइजर तक की नौकरी के लिए आश्वासन दिया गया था। महीनों से वह लोग कुवैत जाने की तैयारी कर रहे थे, पर जब कुवैत जाने का समय आया तब पता चला कि वह लोग ठगे गये हैं।
यह लोग हुए ठगी का शिकार
शमशाद, तनवीर, सतीश पाण्डेय, गोविंद, कुलदीप, मोहम्मद अली, अय्याज यह वह लोगों है जो ठगी का शिकार हुए और शिकायतकर्ता को उनका नाम याद था। पीडि़त शाहिद ने बताया कि नामों की संख्या इतनी है कि उसको 250 से 300 नाम याद
नहीं हैं।
गोमतीनगर पुलिस ने नहीं की कोई मदद
पीडि़त शाहिद ने बताया कि शिकायत करने के बावजूद भी गोमतीनगर पुलिस इस मामले में एफआईआर दर्ज करने के लिए राजी नहीं थी। किसी तरह पुलिस ने कम्पनी के प्रबंधक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की पर उसके आगे कुछ नहीं किया। ठगी का शिकार हुए युवकों ने अपने स्तर से कम्पनी के प्रबंधक के मोबाइल फोन की लोकेशन पता की तो लोकेशन औरेया जनपद में मिली। उन लोगों ने इस बारे में पुलिस को भी बताया पर पुलिस ने उन लोगों से साफ कह दिया कि एफआईआर दर्ज कर ली गयी अब आगे की कार्रवाई पुलिस अपने हिसाब व समय से करेगी।

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