जानिए इन पांच खिलाड़ियों की वजह से टीम इंडिया का विश्व विजेता बनने का सपना टूटा…

भारतीय महिला क्रिकेट टीम को विश्व कप जीतने के लिए 50 ओवर में 229 रन बनाने थे। जब पूनम राउत और हरमनप्रीत कौर बल्लेबाजी कर रही थीं तब तक लग रहा था कि टीम इंडिया आसानी से लक्ष्य को हासिल कर लेगी। लेकिन 138 के स्कोर पर हरमप्रीत और पूनम के बीच की साझेदारी टूट गई। इसके बाद विद्या कृष्णमूर्ति ने पूनम राउत के साथ पारी को आगे बढ़ाया दोनों के बीच चौथे विकेट के लिए 53 रन की साझेदारी हुई, लेकिन जैसे 191 के स्कोर पर टीम इंडिया ने पूनम राउत के रूप में चौथा विकेट गंवाया उसके बाद मैच की तस्वीर ही बदल गई। भारतीय टीम इसके बाद ताश के पत्तों की तरह ढह गई। जब पूनम एलबीडब्ल्यू आउट होकर पवेलियन लौंटी उस वक्त भारत को जीत के लिए 43 गेंदों में 37 रन बनाने थे और उसके 6 विकेट बाकी थे।  लेकिन अगली 35 गेंद में तेज गेंदबाज श्रबसोल ने ऐसा कहर ढाया कि भारतीय बल्लेबाज केवल 28 रन जोड़ सके और सभी 6 विकेट गंवा दिए। टीम इंडिया 48.4 ओवर में 219 रन पर ढेर हो गई। उसका विश्व विजेता बनने का सपना टूट गया। टीम इंडिया की हार के लिए कौन खिलाड़ी जिम्मेदार रहे आईए उन पन नजर डालते हैं।  जानिए इन पांच खिलाड़ियों की वजह से टीम इंडिया का विश्व विजेता बनने का सपना टूटा...

WWC17 Final : कप्तान मिताली राज सिर्फ 9 रन से वर्ल्ड कप और 2 कदम से विश्व रिकॉर्ड से चूकीं…

विश्वकप में टीम इंडिया को शुरुआती दो मैचों में 90 और 106 रन की पारी खेलकर जीत दिलाने वाली बाएं हाथ की सलामी बल्लेबाज स्मृति का बल्ला लगातार सात मैच में खामोश रहा। पहले दोनों मैचों में उन्हें मैन ऑफ द मैच चुना गया लेकिन इसके बाद लगातार सात मैचों में उनका बल्ला खामोश रहा। कप्तान मिताली ने उनपर पूरा विश्वास जताया लेकिन वो कप्तान के विश्वास पर खरी नहीं उतरीं। लगातार असफल रहने के बावजूद स्मृति ने न अपनी तकनीक में कोई बदलाव किया और न ही विकेट पर रकने की कोशिश की। फाइनल में भी उनकी वजह से भारत को दूसरे ओवर में ही पहला विकेट गंवाना पड़ा। स्मिति फाइनल में अपना खाता भी नहीं खोल पाईं। यदि वो अच्छी बल्लेबाजी करतीं तो शायद टीम इंडिया को मैच आखिर तक लेकर नहीं जाना पड़ता। वो श्रबसोल की गेंद पर बोल्ड हो गईं। मंधाना ने 9 मैच की 9 पारियों में 232 रन बनाए। इसमें से 196 रन उन्होंने पहले दो मैचों में ही बना लिए थे। अगले सात मैचों में वो केवल 36 रन बना सकीं। 

हरमनप्रीत कौर  

डिफेंडिंग चैंपियन ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सेमीफाइनल मुकाबले में 115 गेंद में नाबाद रन 171 रन बनाने वाली हमनप्रीत कौर ने फाइनल में भी अच्छी बल्लेबाजी की लेकिन फाइनल में 80 गेंद में 51    रन बनाकर टीम को शुरुआती झटकों से उबारा लेकिन अर्धशतक पूरा करते ही एक गैर जिम्मेदाराना शॉट खेलकर वह बाउंड्री पर कैच आउट हो गईं। उस वक्त सबकुछ ठीक चल रहा था टीम को तकरीबन 5 के औसत से रन बनाने थे। तब उनकी हड़बड़ी टीम इंडिया को बढ़त हासिल करने के बाद भी बैकफुट पर ढकेल दिया। 

सुषमा वर्मा

टीम की विकेट कीपर बल्लेबाज सुषमा वर्मा का बल्ला पूरे विश्वकप में खामोश रहा। फाइनल सहित कुल 9 मैच की 6 पारियों में वो केवल 51 रन बना सकीं। उनकी असफलता टीम को फाइनल में भारी पड़ गई। पूनम राउत के आउट होने के बाद सुषमा बल्लेबाजी के लिए आईं लेकिन वह 2 गेंद में खाता खोले बगैर पवेलियन लौट गईं। एलेक्स हार्टले की स्पिन गेंद पर वो स्वीप शॉट खेलने के चक्कर में बोल्ड हो गईं। उनके आउट होने से टीम दबाव में आ गई। और टीम के लगातार विकेट गिरने का सिलसिला शुरु हो गया। 

वेदा कृष्णमूर्ति

वेदा कृष्णमूर्ति मैच में सबसे बड़ी विलेन बनकर उभरीं। सबसे बड़ी गलती तो उन्होंने उस वक्त की जब अंपायर ने पूनम को एलबीडब्ल्यू करार दिया। लेकिन रिव्यू लेने के लिए उन्होंने 15 सेकेंड से ज्यादा का समय गुजार दिया जब अंपायर से पूनम ने रिव्यू मांगो तो उन्होंने कहा कि देर हो गई है। अच्छी लय मे दिख रही वेदा ने तेजी से 34 गेंद में 35 रन बनाए। लेकिन लगातार दो विकेट गिरने के बाद भी उन्होंने रन बनाने में हड़बड़ी दिखाई और अपना विकेट गंवा दिया। जब वेदा आउट हुईं भारत को जीत के लिए 34 गेंद में 29 रन बनाने थे। 

दीप्ति शर्मा 

दीप्ति शर्मा भारतीय टीम की जीत की आखिरी किरण थीं। वो 12 गेंद पर 14 रन की पारी खेली। दीप्ति बहुत गैर जिम्मेदाराना शॉट खेलकर आउट हुईं। अगर वो मैदान पर टिकी रहतीं तो शायद मैच का परिणाम कुछ और होता। लेकिन दबाव में वो खुद पर काबू नहीं रख पाईं। जब वो आउट हुईं उस वक्त भारत को 12 गेंद में 11 रन बनाने थे लेकिन उन्होंने रन बनाने में हड़बड़ी की और मिड ऑफ पर कैच दे बैठीं। उनके आउट होते ही जीत की सारी आशाएं खत्म हो गईं। 

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