जानिए, जज लोया केस की सुनवाई कर रहे जस्टिस अरुण मिश्रा?

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ जजों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया दीपक मिश्रा पर केसों के आवंटन को लेकर जो गंभीर आरोप लगाए. उसके बाद जस्टिस अरुण मिश्रा को लेकर चर्चाएं होने लगीं. बता दें कि जज लोया की मौत मामले की सुनवाई जस्टिस अरुण मिश्रा को ही सौंपी गई है. सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठ जजों की प्रेस कॉन्फ्रेंस में जब पूछा गया कि क्या वे जिस संवेदनशील केस की बात कर रहे हैं, वो जज लोया की मौत से संबंधित है, तो इसके जवाब में जस्टिस गोगोई ने हामी भरी थी.जानिए, जज लोया केस की सुनवाई कर रहे जस्टिस अरुण मिश्रा?

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जानिए कौन हैं जस्टिस अरुण मिश्रा

जस्टिस अरुण मिश्रा मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के जज रहे जस्टिस एचजी मिश्रा के बेटे हैं. 3 सितंबर, 1955 को जन्मे अरुण मिश्रा ने बीएससी, एमए और एलएलबी किया है. मिश्रा ने संवैधानिक, सिविल, इंडस्ट्रियल और क्रिमिनल मामलों पर प्रैक्टिस की है. वे बार काउंसिल ऑफ इंडिया के सबसे युवा चेयरमैन बन चुके हैं. 1989 और 1995 में उन्हें रिकॉर्ड वोटिंग के साथ बार काउंसिल ऑफ मध्य प्रदेश में चुना गया. मिश्रा ने कानूनी शिक्षा के विकास पर काम किया.

‘5 साल में होने लगी लॉ की पढ़ाई’

कानून की पढ़ाई बेहतर बनाने के लिए वर्ष 1998-1999 में एलएलबी के तीन और 5 साल के कोर्स लाए गए. ये कोर्सेज ऑल इंडिया मीट ऑफ डेवलपमेंट ऑफ लॉ करिक्यलम के तहत लाए गए, जिसकी सह अध्यक्षता अरुण मिश्रा ने की थी. मिश्रा की अध्यक्षता में ही बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने शाम को चलने वाले लॉ कॉलेजों को बंद करने का फैसला लिया और तीन साल की बजाए कॉलेजों में लॉ के 5 साल के कोर्स चलाए जाने का फैसला किया था.

करीब 97 हजार केसों पर दिया है फैसला

मध्य प्रदेश, राजस्थान और कलकत्ता हाई कोर्ट का जज रहते हुए अरुण मिश्रा ने करीब 97 हजार केसों पर फैसला दिया है. अरुण मिश्रा 7 जुलाई, 2014 को सुप्रीम कोर्ट के जज बने. जस्टिस अरुण मिश्रा ने पूर्व आईपीएस ऑफिसर संजीव भट्ट की याचिका पर सुनवाई की, जिसके तहत गोधरा दंगे की फाइल फिर से खोलने की अपील की गई थी. जस्टिस मिश्रा ने सहारा-बिरला डायरी मामले की जांच और मेडिकल एडमिशन स्कैम की सुनवाई की और इन याचिकाओं को खारिज कर दिया. वे जज बीएच लोया की मौत के मामले की सुनवाई कर रहे हैं, लोया सोहराबुद्दीन मुठभेड़ मामले की सुनवाई कर रहे थे. 

‘बेहतर होता कि आप मुझे गोली मार देते’

सूत्रों के मुताबिक सोमवार को जजों की चाय पर मुलाकात के दौरान जस्टिस अरुण मिश्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए उनकी छवि के नुकसान की बात उठाई. इस मुलाकात में सीजेआई दीपक मिश्रा भी मौजूद थे. जस्टिस अरुण मिश्रा ने भावुक हो कर कहा, ‘मैंने अपनी पूरी जिंदगी सिर्फ इज्जत कमाई और आपने ने उस पर ही हमला कर दिया. आपने मेरी प्रतिष्ठा को जो नुकसान पहुंचाया है, उसकी भरपाई कैसे करेंगे. इससे बेहतर होता कि आप मुझे गोली मार देते.’

‘भावुक हो उठे जस्टिस अरुण मिश्रा’

अरुण मिश्रा ने बताया कि काम इतना बोझ होने और स्वास्थ्य की समस्या के बावजूद वो अपनी ड्यूटी कर रहे हैं. जस्टिस मिश्रा ने कहा, ‘काम के अधिक बोझ के कारण मैं दिन में 16 घंटे काम कर रहा हूं.’ सूत्रों ने बताया कि जजों की मुलाकात के दौरान भावुक हो उठे जस्टिस अरुण मिश्रा को कई जजों ने शांत किया. इसके बाद CJI उन्हें अपने चैंबर ले गए.

जस्टिस अरुण मिश्रा की कोर्ट में जज लोया मामले की सुनवाई

बता दें कि जज लोया की मौत की परिस्थितियों की जांच के लिए बॉम्बे लॉयर्स एसोसिएशन ने 4 जनवरी को बॉम्बे हाई कोर्ट में अर्जी दाखिल की. इस बीच कांग्रेसी नेता तहसीन पूनावाला ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा दिया. सुप्रीम कोर्ट में जज लोया की मौत पर एक और अर्जी महाराष्ट्र के पत्रकार बंधू राज लोने ने लगाई, अब इन दोनों याचिकाओं को मिलाकर एक मामला बना दिया गया है और उसकी सुनवाई जस्टिस अरुण मिश्रा की कोर्ट में होगी.

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