जानिए जेल से र‌िहा होकर कहां जाएंगे आरुष‌ि के मम्मी-पापा, नाना ने किया बड़ा खुलासा…

9 साल बीतने के बाद भी आरुषि के हत्यारों का पता नहीं लग पाया है। क्या मेरे रहते में इन हत्यारों का पता लग सकेगा। क्या उन हत्यारों को मैं देख पाऊंगा, जिन्होंने आरुषि की बेरहम तरीके से हत्या कर दी। ये बातें आरुषि के नाना बीजी चिटनिस ने शुक्रवार को सेक्टर-25 स्थित अपने एल-245 फ्लैट पर कहीं।जानिए जेल से र‌िहा होकर कहां जाएंगे आरुष‌ि के मम्मी-पापा, नाना ने किया बड़ा खुलासा...बड़ी खबर: गायत्री प्रजापति के मामले में आया नया मोड़, फर्जी हस्ताक्षर से दर्ज हुआ था केस

चिटनिस ने कहा कि आरुषि की मौत के बाद से शोक मनाने का समय भी नहीं मिल पाया। उसके माता-पिता को खुद को बेकसूर साबित करने के लिए नौ साल का समय लग गया। इस दौरान घर में एक त्योहार भी नहीं मनाया गया।

आलम कभी खुशी कभी गम का है, लेकिन इस बार वह परिवार के साथ दिवाली का जश्न मनाएंगे। साथ ही, दीप भी जलाए जाएंगे। रिश्तेदारों को भी बुलाया जाएगा। बस कमी आरुषि की रहेगी।

जलाए जाने वाले दीपकों की चमक ही हमारे दिलों में आरुषि की आहट को हमेशा जगाए रहेगी। बशर्ते अब तक कानून के हाथों से आरुषि के कातिल दूर हैं, इसका गम हमें सताता रहेगा।

आरुषि के नाना से पूछे गए सवाल

सवाल : क्या जेल से आने के बाद नूपुर व राजेश नोएडा में रहेंगे?

जवाब :  इतने संघर्ष के बाद शायद ही आरुषि के पिता व माता दोबारा नोएडा आना चाहेंगे। वह यहां नहीं आएंगे। दिल्ली स्थित मकान में वह अपने भाई के साथ रहेंगे। जेल में इतना लंबा सिर्फ समय आरुषि की याद में बिता देना अपने आप में ही एक संघर्ष है। अपने गम को किताबों और कविताओं में लिखना दुख का पहाड़ शायद ही किसी मां-बाप को मिला। न्यायपालिका पर शुरुआत से भरोसा रहा। जिसका परिणाम अब सामने आया। देर से ही सही, लेकिन फैसला सही लिया गया।

सवाल : आरुषि का कातिल कौन है उसे कब इंसाफ मिलेगा?

जवाब: यह बात करते ही नाना भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियों की सुई सिर्फ नूपुर और राजेश पर ही टिकी रहीं, लेकिन असली कातिल कौन है। इसके बारे में अब भी किसी को नहीं पता। हू किल्ड आरुषि यह जानना और उसका पकड़ा जाना बेहद जरूरी है। जब तक उसका कातिल पकड़ा नहीं जाता आरुषि का इंसाफ अधूरा ही रहेगा।

सवाल : नौ सालों तक जांच एजेंसियों व पुलिस ने नूपुर और राजेश को दोषी माना। कोई लीगल कार्रवाई नहीं करेंगे?

जवाब : नोएडा पुलिस व सीबीआई की दोनों ही टीमों ने नूपुर व राजेश तलवार को दोषी माना था। आरुषि की मौत के बाद उसका शोक मनाने तक का समय नहीं मिला। इंवेस्टिगेशन, जांच एजेंसियों व मीडिया ने इस तरह से उलझाया कि अब हम चैन से रहना चाहते हैं। हमारा कोई लीगल राइट भी नहीं बनता कि कोई एक्शन लिया जाए। फिलहाल, पहले हमारे बच्चे वापस आ जाए इसके बाद ही कुछ सोचा जाएगा।

सवाल : एक बेटी गई एक वापस आ गई कैसा सोच रहे है आप?

जवाब : नाना ने बताया कि आरूषि की मौत के बाद उनकी बेटी और दामाद को दोषी माना गया। ऐसा लगा मानों मेरा पूरा परिवार ही खत्म हो गया। लेकिन अब एक बेटी वापस आ रही है। आरुषि की कमी को तो पूरा नहीं किया जा सकता। लेकिन परिवार का प्रयास रहेगा कि  नूपुर व राजेश को कभी इस बात की कमी महसूस न होने दी जाए।

सवाल : नोएडा के मकान से आरुषि की यादें जुड़ी है क्या उसे बेच देंगे ?

जवाब : जिस मकान में आरुषि की हत्या हुई वह मकान किराएदारों को दिया गया है। वहां लौटने का मतलब नहीं बनता। मकान बेचा जाए या नहीं इस पर अभी फैसला लेना जल्दबाजी होगी।

इस केस में क्या कमी रही एडवोकेट से बातचीत

तथ्यों पर नहीं, फैसला विवेचक के कहने पर लिया गया था। जो 9 साल बाद गलत साबित हो गया। कानून को साक्ष्य चाहिए। यदि ये केस हरियाणा व पश्चिम उत्तर प्रदेश का होता तो उसे ऑनर किलिंग मान लिया जाता।- अंकुर प्रकाश नागर, अधिवक्ता, सुप्रीम कोर्ट

आरुषि हत्याकांड में सीबीआई की ओर से लापरवाही बरती गई है। क्लोजर रिपोर्ट भी लगाई गई, लेकिन निर्दोष को सजा दिलाकर ईमानदारी का प्रमाण-पत्र नहीं मिलता है।- राम शरण नागर, पूर्व अध्यक्ष, जिला बार एसोसिएशन

इस केस में चेन जुड़ना जरूरी है। यदि बार-बार चेन की कड़ी टूटेगी तो बिना सबूत सजा नहीं दी जाती। 113बी एक्ट के तहत सजा देना मान्य नहीं है। असमंजस के आधार पर हाईकोर्ट सजा नहीं सुनाता है। उन्हें बरी करता है।- सूर्य प्रताप सिंह, पूर्व सचिव, बार एसोसिएशन

आरुषि केस में पुलिस व सीबीआई कड़ी जोड़ नहीं सकी। हाईकोर्ट का फैसला एकदम सही है। बिना सबूत किसी को सजा सुनाना अदालत के खिलाफ है। भले ही वह गुनहगार क्यों न हो।- सुनील भाटी, पूर्व सचिव, जिला बार एसोसिएशन

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