जानिए शाहजहां और मुमताज की ‘प्रेम कहानी’ के दो ऐसे सच, जिसने…..

शाहजहां और मुमताज की प्रेम कहानी किसी परिचय की मोहताज नहीं है। लेकिन हम आपको बता रहे हैं कि उनकी जिंदगी के दो ऐसे राज जिन्हे बहुत ही कम लोग जानते होंगे।जानिए शाहजहां और मुमताज की 'प्रेम कहानी' के दो ऐसे सच, जिसने.....कीड़े वाले ब्रेड की जबरदस्त डिमांड, यहाँ बड़े चाव से खाते हैं लोग

मुमताज 19 साल में 14 बार गर्भवती हुईं। इसी के बाद उनकी मौत हुई जिसने शाहजहां को अंदर से तोड़ दिया। वहीं शाहजहां के पुत्र औरंगजेब को अपने पिता से नफरत हो गई। मध्यकालीन इतिहास में क्रूर और धर्मांध शासक के रूप में पहचाने जाने वाले औरंगजेब को उसके पिता शाहजहां की नफरत ने और क्रूर बना दिया। पिता शाहजहां के इस बुरे बर्ताव की वजह से उसकी क्रूरता तो बढ़ी है, भाइयों के प्रति घृणा भी पैदा हुई।

यह बात औरंगजेब पर आधारित पुस्तक ‘दि ओसन ऑफ कोबरा’ के लेखक मुराद बेग ने बताई। उन्होंने यह भी बताया कि औरंगजेब ने चित्रकूट, गुवाहाटी आदि स्थानों के 30 मंदिरों के रख-रखाव की व्यवस्था के आठ गांव का राजस्व निश्चित कर रखा था।

हाल ही में दून में आयोजित ‘वैली ऑफ वर्ड्स’ के सत्र में मुराद बेग ने बताया था कि शाहजहां ने औरंगजेब को कभी पसंद नहीं किया था। वजह यह थी कि जब शाहजहां की पत्नी मुमताज गर्भवती थीं तो उन्होंने सेब खाने की इच्छा जाहिर की। शाहजहां दक्षिण में कहीं थे, वहां पर सेब उपलब्ध नहीं रहा।

सेब को तलाशते समय शाहजहां के पास एक फकीर दो सेब लिए आया। उसने कहा कि जब सेब से महक आनी बंद हो तो समझो जीवन पर खतरा है। साथ ही यह भी कहा कि आपके जिस बेटे की आंख काली और त्वचा सफेद हो उससे सावधान रहें। 

औरंगजेब की आंखें काली और त्वचा सफेद थी। इसी वजह से शाहजहां ने हमेशा औरंगजेब को अपने से दूर रखा और उससे नफरत करता रहा। इससे वह चिड़चिड़ा और हठी हो गया। पिता के खिलाफ उसके दिल में प्रतिशोध जगा।

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