जानिये: ‘मन की बात’ में मोदी ने कहा- तीन पीढ़ियां साथ करें योग..

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 32वीं बार ‘मन की बात’ कार्यक्रम के जरिये देश को संबोधित कर कर रहे हैं. अपने इस मासिक रेडियो संबोधन की शुरुआत में पीएम मोदी ने सभी देशवासियों को रमजान की शुभकामनाएं दी.जानिये: 'मन की बात' में मोदी ने कहा- तीन पीढ़ियां साथ करें योग..

पीएम मोदी के ‘मन की बात’ की खास बातें-
-सभी लोगों को रमजान की मुबारकबाद. रमजान का पवित्र महीना शांति, एकता को बढ़ावा देने में जरूर सहायक होगा.
-हम सवा-सौ करोड़ देशवासी इस बात का गर्व कर सकते हैं कि दुनिया के सभी सम्प्रदाय भारत में मौजूद हैं.
-हर प्रकार की विचारधारा, हर प्रकार की पूजा पद्धति, हर प्रकार की परंपरा, हम लोगों ने एक साथ जीने की कला आत्मसात की है.
-मैं बहुत खुश हूं कि हमारी युवा पीढ़ी देश के इतिहास और स्वतंत्रता संग्रामों के बारे में जानने की रुचि ले रही है.
-आज वीर सवारकर जी की जन्मजयंती है. मैं देश के युवा पीढ़ी को कहुंगा कि कभी मौका मिले तो हमारी आजादी की जंग के तीर्थ क्षेत्र सेल्युलर जेल ज़रूर जाएं.

5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है. प्रकृति के साथ जुड़ने का वैश्विक अभियान, हमारा स्वयं का भी अभियान बनना चाहिए.
वेदों में पृथ्वी और पर्यावरण को शक्ति का मूल माना गया है. हमारे यहां कहा गया है- माता भूमिः पुत्रो अहम् पृथिव्याः अर्थात् जो शुद्धता है, वह हमारी पृथ्वी के कारण है.

अमित शाह ने भी सुनी ‘मन की बात’

इस बार पीएम मोदी के ‘मन की बात’ को बीजेपी के अध्यक्ष अमित शाह ने दिल्ली के आरके पुरम इलाके में गरीब लोगों के साथ रेडियो पर सुना. वहीं बीजेपी गुजरात के प्रभारी भूपेंद्र यादव ने भी अहमदाबाद में पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ बैठकर पीएम मोदी के ‘मन की बात’ सुनीं.

‘मन की बात’ पर किताब लॉन्च
मोदी सरकार के तीन साल पूरे होने के मौके पर 26 मई को मन की बात को किताब के रूप में लॉन्च किया गया. ‘मन की बात : ए सोशल रिवोल्युशन ऑन रेडियो’ और ‘मार्चिंग विद ए बिलियन- एनालाइजिंग नरेन्द्र मोदी गवर्नमेंट एट मिडटर्म’ के नाम राष्ट्रति भवन में दो किताबों का अनावरण किया गया. इन दोनों किताबों की पहली प्रति राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को सौंपी गई.

‘न्यू इंडिया में VIP की जगह EPI’
पिछली बार ‘मन की बात’ में पीएम मोदी ने लोगों के दिमाग में भीतर तक घुसी वीआईपी संस्कृति को जड़ से उखाड़ फेंकने और सभी भारतीयों को महत्व देने की जरूरत पर बल दिया था. मोदी ने कहा था कि समय आ गया है, जब वीआईपी संस्कृति को बदलकर ईपीआई (हर व्यक्ति महत्वपूर्ण) कर दिया जाए. मोदी ने कहा, ‘हमारे देश में वीआईपी संस्कृति के लिए एक प्रकार की नफरत है,

लेकिन जब सरकार ने अधिकारियों की गाड़ियों से लाल बत्ती हटाने का फैसला किया तब मैंने महसूस किया कि यह नफरत कितनी भीतर तक घुसी है. यह लाल बत्ती वीआईपी संस्कृति की सूचक बन गई है, जो हमारे दिमाग में भीतर तक घुसी है. लाल बत्ती को हटाना केवल हमारी प्रणाली का एक हिस्सा भर है, लेकिन हमें इस संस्कृति को अपने दिमागों से हटाने का प्रयास करना होगा.

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