जानें आखिर अमेरिका क्‍यों मानता है चीन को भविष्‍य का सबसे बड़ा खतरा…

चीन के कई मुद्दों पर होते आक्रामक रवैये के बाद अमेरिका के प्रशांत क्षेत्र के सैन्य कमांडर एडमिरल हैरी हैरिस चीन को आतंकवाद के समकक्ष रखा है। उन्‍होंने चीन को दुनिया के लिए भविष्‍य का सबसे बड़ा खतरा बताया है। अमेरिकी सैन्य व्यवस्था में प्रशांत क्षेत्र के अंतर्गत ही दक्षिण चीन सागर और उत्तर कोरिया का आता है, जहां पर आने वाले दिनों में टकराव की सबसे ज्यादा आशंका है। एडमिरल हैरिस ने कहा है कि चीन विस्‍तारवादी नीतियों के तहत काम कर रहा है। हालांकि उन्‍होंने उत्तर कोरिया को मौजूदा समय का सबसे बड़ा खतरा बताया है। इसके अलावा दूसरा खतरा आतंकवाद है। एडमिरल हैरिस ने यह भी कहा कि भारतीय सेनाओं को आधुनिक उपकरणों से लैस करके और सैनिकों को प्रशिक्षण देकर अमेरिका उन्हें और प्रभावशाली बना सकता है। दोनों देशों के बीच पिछले दशक में 15 अरब डॉलर (एक लाख करोड़ रुपये) रक्षा क्षेत्र का कारोबार हुआ है, जो आने वाले वर्षों में बढ़ने की उम्मीद है।

जानें आखिर अमेरिका क्‍यों मानता है चीन को भविष्‍य का सबसे बड़ा खतरा...

अंतरराष्‍ट्रीय नियमों को अनदेखा कर रहा है चीन

पूर्व मेजर जनरल पीके सहगल अमेरिकी सैन्‍य कमांडर के बयान को पूरी तरह से सही मानते हैं। उनका कहना है कि चीन का रवैया कुछ ऐसा ही है कि उससे दुनिया को आज की तारीख में सबसे अधिक खतरा है। बातचीत करते हुए उन्‍होंने कहा कि चीन जिस तरह से तानाशाही रवैया अपनाए हुए है वह विश्‍व के लिए किसी खतरे से कम नहीं है। बातचीत के दौरान उन्‍होंने कहा कि साउथ चाइना सी पर उसने सभी अंत‍रराष्‍ट्रीय नियमों को ताक पर रख दिया है। उनके मुताबिक वह लगातार अपनी सीमा का विस्‍तार करने में लगा हुआ है। पाकिस्‍तान के रूप में उसने अपना बेस तैयार किया है। अंतरराष्‍ट्रीय नियमों के मुताबिक किसी भी देश के बाहर करीब 12 नॉटिकल मील तक उसकी सीमा होती है। इसके बाहर का क्षेत्र अंतरराष्‍ट्रीय जल क्षेत्र के नियमों के तहत आता है। लेकिन चीन इन नियमों की लगातार अनदेखी करते हुए करीब 1200 नॉटिकल मील तक के इलाके को अपना बता रहा है। वहीं इस क्षेत्र में कई अन्‍य देश जिसमें फिलीपींस, ब्रुनई, इंडोनेशिया समेत कुछ दूसरे देश भी इस क्षेत्र पर अपना दावा बताते रहे हैं। लेकिन चीन अब तक उन्‍हें डरा धमका कर चुप कराता आया है।

लगभग हर देश से है चीन का सीमा विवाद

मेजर जनरल सहगल के मुताबिक साउथ चाइना सी से हर वर्ष करीब 5 ट्रिलियन का कारोबार होता है। ऐसे में यह इलाका उसके लिए काफी अहम है। ऐसा इसलिए भी है क्‍योंकि यदि इस पर कब्‍जा बनाए रखने में कामयाब हो जाता है तो वहां से जाने वाले जहाजों को इसकी कीमत चुकानी होगी। इतना ही इस वायुक्षेत्र का इस्‍तेमाल करने से पहले चीन की अनुमति लेनी जरूरी होगी। उन्‍होंने यह भी कहा कि चीन के अपने किसी भी पड़ोसी देश से अच्‍छे संबंध नहीं है। लगभग हर देश से ही उसका सीमा को लेकर विवाद है। भारत की यदि बात करें तो वह न सिर्फ डोकलाम बल्कि दूसरे मुद्दों पर भी लगातार विवाद बढ़ाने का काम कर रहा है। इतना ही नहीं वह लगातार भारत में आने वाली नदियों पर बांध बनाकर जल संधियों का भी अपमान कर रहा है। चीन जिस तरह का रवैया अपनाए हुए है उससे साफ है कि यदि उसको न रोका गया तो भारत को भविष्‍य में जल संकट का सामना करना पड़ सकता है। इसकी नदियों पर चीन की तरफ बनाए जाने वाले बांध हैं। उन्‍होंने कहा कि गंगा हो या ब्रह्मपुत्र इन पर वह लगातार अपनी सीमा में बांध बना रहा है।

एडमिरल हैरिस का बयान सही

चीन से बढ़ते खतरे को देखते हुए उन्‍होंने अमेरिकी सैन्‍य कमांडर एडमिरल हैरिस के बयान को सही करार दिया है। यह पूछे जाने पर कि चीन को क्‍या आर्थिक मोर्चे पर रोका जा सकता है, उनका कहना था कि मौजूदा समय में सभी देशों की अर्थव्‍यवस्‍था आपस में जुड़ी हुई है। उत्तर कोरिया ने अमेरिका के स्‍वतंत्रता दिवस पर मिसाइल परीक्षण किया तो वहां के शेयर बाजार में जबरदस्‍त गिरावट दर्ज की गई थी। ऐसे में कोई भी देश युद्ध नहीं चाहेगा। इससे न सिर्फ एक देश बल्कि पूरे विश्‍व की अर्थव्‍यवस्‍था प्रभावित होती है। लेकिन उन्‍होंने यह भी माना कि चीन जिस तरह का रवैया अपनाए हुए है उसको देखकर इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि चीन की बदौलत तीसरा विश्‍वयुद्ध छिड़ सकता है। हालांकि उन्‍होंने यह भी माना है कि यदि युद्ध होगा तो किसी एक्‍सीडेंट की ही वजह से शुरू होगा। माैजूदा समय में युद्ध किसी भी मुद्दे का समाधान नहीं है।

चीन के लिए क्‍यों अहम है साउथ चाइना सी 

साउथ चाइना सी दुनिया का बेहद अहम व्यापार मार्ग है। इस इलाके से हर साल कम से कम 5 ट्रिलियन डॉलर के कमर्शल गुड्स की आवाजाही होती है। इस इलाके में तेल और गैस का विशाल भंडार भी बताया जाता है। यूएस डिपार्टमेंट ऑफ एनर्जी के अनुमान के मुताबिक यहां 11 बिलियन बैरल्स ऑइल और 190 ट्रिलियन क्यूबिक फीट प्राकृतिक गैस संरक्षित है। यही वजह है कि चीन इस इलाके को छोड़ना नहीं चाहता है और यही वजह है कि अमेरिका इससे अपना मुंह नहीं फेर सकता है।

साउथ चाइना सी की मौजूदा स्थिति

यदि साउथ चाइना सी पर चीन और अमेरिका आमने-सामने आते हैं तो इसमें ताइवान, फिलीपींस, मलेशिया, इंडोनेशिया और वियतनाम भी जरूर शामिल होंगे। दरअसल इस इलाके के अपने खास मायने हैं जिसे समझना बेहद दिलचस्‍प है। साउथ चाइना सी दक्षिणी-पूर्वी एशिया से प्रशांत महासागर के पश्चिमी किनारे तक स्थित है। इसका पूरा एरिया करीब 3.5 मिलियन किमी स्‍क्‍वायर है। यह दक्षिणी-पूर्वी एशियाई देशों से घिरा है। इनमें चीन, ताइवान, फिलीपीन्स, मलयेशिया, इंडोनेशिया और वियतनाम शामिल हैं। ये सभी देश इस हिस्‍से पर अपना-अपना दावा करते आए हैं।

सीमांकन कर अपना दावा पेश

1947 में चीन ने एक नक्‍शे के जरिए सीमांकन कर अपना दावा पेश किया था। यह सीमांकन काफी व्यापक था और उसने लगभग पूरे इलाके को इसमें शामिल कर लिया गया था। इसके बाद कई एशियाई देशों ने चीन के इस कदम से असहमति जताई। वियतनाम, फिलीपीन्स और मलयेशिया ने भी इसके कई द्वीपों पर अपना दावा किया। वियतनाम ने कहा कि उसके पास जो इस इलाके का नक्‍शा है उसमें पार्सेल और स्प्रैटली आइलैंड्स प्राचीन काल से उसका हिस्सा रहा है। इसी तरह ताइवान ने भी दावा किया।

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