जिंदगी ने फिर RBI ने खेला खेल… अब दो अनाथ बच्‍चों को मोदी महिमा का इंतजार

नई दिल्ली। देश में भ्रष्टाचार और काला धन ख़त्म करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने बीते साल 8 नवम्बर को नोटबंदी की घोषणा की थी। मोदी ने पुराने नोटों को बैंको में बदलने के लिए 30 दिसंबर तक का वक़्त भी दिया था, जो अब खत्म हो चुका है। इसके बावजूद कई ऐसे लोग हैं जिनके पास आज भी पुराने नोट हैं। इनमें से ही राजस्थान के दो बच्चे ऐसे हैं जिनके पास करीब एक लाख रुपए रखा है। इन रुपयों को वो नोटबैन के बाद दी गई समय सीमा में बदलवाने की स्थिति में ही नहीं थे।

पुराने 500-1000 के नोट को आज भी राजस्थान के दो अनाथ बच्चों ने मात्र इसलिए सहेज कर रखा है कि शायद मोदी अंकल कोई ऐसी घोषणा करेंगे जिससे उनके पास रखे नोट चल सकें। लेकिन अब इन हताश बच्चों ने पीएम मोदी को एक खत लिखा है। इसके जरिए उन्होंने गुजारिश की है कि पुराने नोट को बदलवा दें या बहन के नाम एफडी करवा दें।

दरअसल राजस्थान में कोटा के रहने वाले अनाथ नाबालिग भाई-बहन ने पीएम मोदी को पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने नोटबंदी की वजह से उनके सामने आई एक बड़ी मुसीबत का ज़िक्र किया है। इन दोनों भाई-बहनों ने पीएम से कहा कि उनकी स्वर्गीय मां ने मेहनत मजदूरी कर उनके लिए पांच सौ और एक हजार के पुराने नोटों के रूप में 96,500 रपए जमा किए थे। इन्हें नए नोटों में बदलवा दीजिए या बहन के नाम एफडी करवा दीजिए।

आपको बता दें कि इन बच्चों का नाम सूरज और सलोनी है। मां पूजा बंजारा दिहाड़ी मजदूरी करती थी। वर्ष 2013 में कथित रूप मां की हत्या कर दी गई है। पिता राजू बंजारा की पहले ही मौत हो चुकी है। अब दोनों भाई-बहन अनाथ हो चुके हैं और कोटा की एक संस्था में रह रहे हैं। 

बाल कल्याण समिति, कोटा के चेयरमैन हरीश गुरबक्शानी के मुताबिक़ बच्चों की काउंसलिंग के दौरान दोनों ने बताया था कि आरके पुरम और सरवाडा गांव में उनके घर हैं।

जिसके बाद बाल कल्याण समिति के कहने पर पुलिस ने इस माह की शुरूआत में सरवाडा में उनके पुश्तैनी मकान की तलाशी ली तो सोने-चांदी के जेवरात और एक बॉक्स में एक हजार के 22 व 500 के 149 पुराने नोट मिले। इन्ही पैसों को बदलने के लिए बच्चों ने पीएम मोदी को ख़त लिखा है।

हालंकि समिति ने नोटों को बदलने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को 17 मार्च को पत्र लिखा लेकिन 22 मार्च को ई-मेल के जरिए सूचना दी कि नोट नहीं बदले जा सकेंगे।

अब देखना ये है कि हर किसी की इच्छा पूरी करने का प्रयास करने वाले पीएम मोदी कब इन बच्चों की फरियाद सुनते हैं और मां की गाढ़ी कामाई बच्चों के भविष्य के लिए कितनी जल्दी काम आती है

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