जीएसटी का जश्नः मुख्य समारोह में शामिल हुए दो-दो वित्त मंत्री!

देश में वन नेशन-वन टैक्स की परिकल्पना के साथ लागू हुए गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) को एक साल पूरा हो गया है. केंद्र सरकार पूरे देश में इस मौके को ईमानदारी के प्रतीक के तौर पर स्थापित करने के लिए जीएसटी दिवस मना रही है. खास बात ये है कि इस संबंध में आयोजित मुख्य समारोह अपने आप में खास रहा क्योंकि ये पहला और अनोखा मौका है जब केंद्र के कार्यक्रम में दो-दो वित्त मंत्री शामिल हुए. पीयूष गोयल जहां मंच पर मौजूद थे तो अरुण जेटली ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कार्यक्रम को संबोधित किया.देश में वन नेशन-वन टैक्स की परिकल्पना के साथ लागू हुए गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) को एक साल पूरा हो गया है. केंद्र सरकार पूरे देश में इस मौके को ईमानदारी के प्रतीक के तौर पर स्थापित करने के लिए जीएसटी दिवस मना रही है. खास बात ये है कि इस संबंध में आयोजित मुख्य समारोह अपने आप में खास रहा क्योंकि ये पहला और अनोखा मौका है जब केंद्र के कार्यक्रम में दो-दो वित्त मंत्री शामिल हुए. पीयूष गोयल जहां मंच पर मौजूद थे तो अरुण जेटली ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कार्यक्रम को संबोधित किया.  केंद्र सरकार ने देशभर में जीएसटी 30 जून 2017 की मध्यरात्रि को लागू किया था. इसे लागू करने के लिए संसद के सेंट्रल हॉल में विशेष सत्र बुलाया और इस टैक्स सुधार को आजाद भारत का सबसे बड़ा सुधार कहा. इसे लागू करते समय देश के वित्त मंत्रालय की कमान अरुण जेटली के हाथ में थी. बीते एक साल के दौरान उनके नेतृत्व में इस टैक्स सुधार को पूरे देश में लागू किया गया. हालांकि इस दौरान जीएसटी लागू करने में आई दिक्कतों के चलते वे विपक्ष के निशाने पर भी रहे.  जीएसटी के एक साल पूरे होने से एक महीने पहले ही वित्त मंत्रालय में फेरबदल किया गया. स्वास्थ्य कारणों के चलते अरुण जेटली को बिना प्रभार का कैबिनेट मंत्री घोषित किया गया और कोयला व रेल जैसे प्रमुख मंत्रालय देख रहे पीयूष गोयल को वित्त मंत्रालय का भी कार्यभार सौंप दिया गया.  अरुण जेटली की वित्त मंत्रालय से ‘छुट्टी’उनका स्वास्थ बेहतर होने तक के लिए बताई जा रही है. हालांकि बीते 15 दिन से अरुण जेटली सोशल मीडिया पर जमकर सक्रियता दिखा रहे हैं. मानो संकेत दे रहे हों कि अब वे स्वस्थ हो चुके हैं और कार्यभार संभालने के लिए तैयार हैं. अरुण जेटली ने बीते 15 दिनों के दौरान कश्मीर, महंगाई, आतंकवाद, जीएसटी जैसे कई मुद्दों पर फेसबुक पोस्ट लिखकर अपनी सक्रियता दिखाई है, लेकिन आज देशभर में जीएसटी के जश्न की तैयारी में वह केंद्र सरकार का चेहरा पूर्ण रूप से नहीं बन पाए.  जीएसटी दिवस के सभी कार्यक्रमों में प्रमुख भूमिका वित्त मंत्रालय का कार्यभार संभाल रहे पीयूष गोयल ही निभा रहे हैं. राजधानी दिल्ली के अंबेडकर हॉल में आयोजित जीएसटी के जश्न में जहां मंच पर पीयूष गोयल मौजूद थे, वहीं इस कार्यक्रम के दौरान अरुण जेटली को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शामिल किया गया.  जीएसटी के जश्न के लिए सजे मंच पर पीयूष गोयल की मौजूदगी और इसके साथ ही अरुण जेटली का वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधन अपने आप में अनोखी स्थिति है. पिछले कई दिन से विपक्ष सवाल उठा रहा है कि देश का असली वित्त मंत्री कौन हैं. कांग्रेस ने इस बारे में सरकार की अलग-अलग वेबसाइट का भी हवाला दिया था.  कहा जा रहा है कि अगर पीयूष गोयल सिर्फ प्रभारी वित्त मंत्री हैं तो वे नीतिगत फैसलों, अहम मीटिंग में कैसे हिस्सा ले रहे हैं और अगर उन्हें ही वित्त मंत्री बना दिया गया है तो अरुण जेटली की मोदी सरकार में अब क्या भूमिका होगी? आज जिस तरह जीएसटी के कार्यक्रम में दोनों मंत्री शामिल किए गए उससे इस तरह के सवालों को और ज्यादा मजबूती मिलेगी.

केंद्र सरकार ने देशभर में जीएसटी 30 जून 2017 की मध्यरात्रि को लागू किया था. इसे लागू करने के लिए संसद के सेंट्रल हॉल में विशेष सत्र बुलाया और इस टैक्स सुधार को आजाद भारत का सबसे बड़ा सुधार कहा. इसे लागू करते समय देश के वित्त मंत्रालय की कमान अरुण जेटली के हाथ में थी. बीते एक साल के दौरान उनके नेतृत्व में इस टैक्स सुधार को पूरे देश में लागू किया गया. हालांकि इस दौरान जीएसटी लागू करने में आई दिक्कतों के चलते वे विपक्ष के निशाने पर भी रहे.

जीएसटी के एक साल पूरे होने से एक महीने पहले ही वित्त मंत्रालय में फेरबदल किया गया. स्वास्थ्य कारणों के चलते अरुण जेटली को बिना प्रभार का कैबिनेट मंत्री घोषित किया गया और कोयला व रेल जैसे प्रमुख मंत्रालय देख रहे पीयूष गोयल को वित्त मंत्रालय का भी कार्यभार सौंप दिया गया.

अरुण जेटली की वित्त मंत्रालय से ‘छुट्टी’उनका स्वास्थ बेहतर होने तक के लिए बताई जा रही है. हालांकि बीते 15 दिन से अरुण जेटली सोशल मीडिया पर जमकर सक्रियता दिखा रहे हैं. मानो संकेत दे रहे हों कि अब वे स्वस्थ हो चुके हैं और कार्यभार संभालने के लिए तैयार हैं. अरुण जेटली ने बीते 15 दिनों के दौरान कश्मीर, महंगाई, आतंकवाद, जीएसटी जैसे कई मुद्दों पर फेसबुक पोस्ट लिखकर अपनी सक्रियता दिखाई है, लेकिन आज देशभर में जीएसटी के जश्न की तैयारी में वह केंद्र सरकार का चेहरा पूर्ण रूप से नहीं बन पाए.

जीएसटी दिवस के सभी कार्यक्रमों में प्रमुख भूमिका वित्त मंत्रालय का कार्यभार संभाल रहे पीयूष गोयल ही निभा रहे हैं. राजधानी दिल्ली के अंबेडकर हॉल में आयोजित जीएसटी के जश्न में जहां मंच पर पीयूष गोयल मौजूद थे, वहीं इस कार्यक्रम के दौरान अरुण जेटली को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शामिल किया गया.

जीएसटी के जश्न के लिए सजे मंच पर पीयूष गोयल की मौजूदगी और इसके साथ ही अरुण जेटली का वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधन अपने आप में अनोखी स्थिति है. पिछले कई दिन से विपक्ष सवाल उठा रहा है कि देश का असली वित्त मंत्री कौन हैं. कांग्रेस ने इस बारे में सरकार की अलग-अलग वेबसाइट का भी हवाला दिया था.

कहा जा रहा है कि अगर पीयूष गोयल सिर्फ प्रभारी वित्त मंत्री हैं तो वे नीतिगत फैसलों, अहम मीटिंग में कैसे हिस्सा ले रहे हैं और अगर उन्हें ही वित्त मंत्री बना दिया गया है तो अरुण जेटली की मोदी सरकार में अब क्या भूमिका होगी? आज जिस तरह जीएसटी के कार्यक्रम में दोनों मंत्री शामिल किए गए उससे इस तरह के सवालों को और ज्यादा मजबूती मिलेगी.

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