जीएसटी के प्लेटफॉर्म पर उत्तराखंड की गाड़ी आगे बढ़ने के बजाए आ गई रिवर्स गियर में

जीएसटी के प्लेटफॉर्म पर उत्तराखंड की गाड़ी आगे बढ़ने के बजाए रिवर्स गियर में आ गई है। ऐसा नहीं है कि उत्तराखंड में कारोबार नहीं हो रहा, बल्कि आंकड़े तो यह बता रहे हैं कि जुलाई 2017 से जून 2018 के बीच उत्तराखंड से राजस्व में पहले के मुकाबले 167.28 फीसद का उछाल आया है। यह बात और है कि राज्य के भीतर हुए कारोबार का आधा हिस्सा सीधे केंद्र सरकार की झोली में चला गया। जबकि राज्य के बाहर किए गए कारोबार का आधा-आधा हिस्सा केंद्र व संबंधित राज्य के बीच बंट गया। इस तरह उत्तराखंड ने वैट में वर्ष 2016-17 और 2017-18 के 12 माह में जितना राजस्व अर्जित किया था, उसका 54.94 फीसद ही हासिल हो पाया है।जीएसटी के प्लेटफॉर्म पर उत्तराखंड की गाड़ी आगे बढ़ने के बजाए रिवर्स गियर में आ गई है। ऐसा नहीं है कि उत्तराखंड में कारोबार नहीं हो रहा, बल्कि आंकड़े तो यह बता रहे हैं कि जुलाई 2017 से जून 2018 के बीच उत्तराखंड से राजस्व में पहले के मुकाबले 167.28 फीसद का उछाल आया है। यह बात और है कि राज्य के भीतर हुए कारोबार का आधा हिस्सा सीधे केंद्र सरकार की झोली में चला गया। जबकि राज्य के बाहर किए गए कारोबार का आधा-आधा हिस्सा केंद्र व संबंधित राज्य के बीच बंट गया। इस तरह उत्तराखंड ने वैट में वर्ष 2016-17 और 2017-18 के 12 माह में जितना राजस्व अर्जित किया था, उसका 54.94 फीसद ही हासिल हो पाया है।   वर्तमान में अभी पेट्रोलियम और शराब कारोबार को जीएसटी से बाहर रखा गया है। साथ ही, वर्ष 2021-22 तक केंद्र से राजस्व की क्षतिपूर्ति भी मिलती रहेगी, लेकिन जब इन दोनों मोर्चों पर राज्य को सीधी कारोबारी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा, तब राजस्व का ग्राफ और नीचे जा सकता है। जीएसटी में राजस्व की गणित माल की खपत पर टिकी है। क्योंकि राज्य में निर्मित माल की बाहरी राज्यों में हो रही खपत पर आइजीएसटी (इंटीग्रेटेड जीएसटी) के आंकड़े बताते हैं कि इस श्रेणी में सबसे अधिक नौ हजार 441 करोड़ रुपये का राजस्व बाहर चला गया। इसका आधा करें तो दूसरे राज्यों को मिली चार हजार 720 करोड़ की राशि राज्य के हिस्से आए राजस्व से भी 33.46 फीसद अधिक है।   जीएसटी से व्यापारी व उपभोक्ता दोनों को मिला फायदा यह भी पढ़ें केंद्र का हिस्सा 217 फीसद बढ़ा  सेंट्रल एक्साइज व सर्विस टैक्स की गणना में शामिल किए गए वर्ष 2016-17 व 2017-18 के 12 माह में केंद्र को 2928 करोड़ रुपये का राजस्व मिला था, जबकि अब यह आंकड़ा बढ़कर (आइजीएसटी की हिस्सेदारी मिलाकर) 6375.5 करोड़ रुपये हो गया है। इस तरह केंद्र के राजस्व में 217 फीसद का इजाफा हुआ है।   कृषि यंत्र खरीद में जीएसटी पर भी अनुदान यह भी पढ़ें उत्तराखंड के राजस्व की स्थिति (करोड़ रु. में)  माह-------------जीएसटी पूर्व-------------जीएसटी बाद   अनब्रांडेड नमकीन से अनपैक्ड की शर्त हटाई जाए यह भी पढ़ें (2016-17, 2017-18) (2017-18)  जुलाई-------------506------------------------264   प्रदेश में उद्योगों के सहयोग से बनाया जाएगा औषधि कोष: सीएम यह भी पढ़ें अगस्त------------406-----------------------257  सितंबर------------414-----------------------255  अक्तूबर-----------464-----------------------235  नवंबर-------------495-----------------------229  दिसंबर------------430-----------------------234  जनवरी------------492-----------------------246  फरवरी-------------461----------------------251  मार्च----------------756----------------------322  अप्रैल-------------344-----------------------241  मई----------------462-----------------------300  जून----------------487-----------------------304  प्रकाश पंत, (वित्त मंत्री) का कहना है कि राज्य सरकार राजस्व बढ़ोतरी के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। इस तरह की पॉलिसी लाने पर विचार किया जा रहा है, जिससे राज्य में औद्योगिकीकरण को बढ़ावा मिल सके। ऐसे उद्योग यदि राज्य के उपभोक्ताओं के लिए माल की आपूर्ति करते हैं तो आइटीसी काटने के बाद उन्हें एसजीएसटी में 50 फीसद तक की छूट दी जाएगी।  सौजन्या, आयुक्त (राज्य माल और सेवा कर विभाग) का कहना है कि राज्य में माल की खपत बढ़ाकर ही राजस्व में इजाफा किया जा सकता है। इसके लिए सभी स्तर पर प्रयास करने होंगे। यहां पर्यटन, बड़े शैक्षणिक संस्थान, अस्पतालों को बढ़ावा देकर लक्ष्य को हासिल किया जा सकता

वर्तमान में अभी पेट्रोलियम और शराब कारोबार को जीएसटी से बाहर रखा गया है। साथ ही, वर्ष 2021-22 तक केंद्र से राजस्व की क्षतिपूर्ति भी मिलती रहेगी, लेकिन जब इन दोनों मोर्चों पर राज्य को सीधी कारोबारी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा, तब राजस्व का ग्राफ और नीचे जा सकता है। जीएसटी में राजस्व की गणित माल की खपत पर टिकी है। क्योंकि राज्य में निर्मित माल की बाहरी राज्यों में हो रही खपत पर आइजीएसटी (इंटीग्रेटेड जीएसटी) के आंकड़े बताते हैं कि इस श्रेणी में सबसे अधिक नौ हजार 441 करोड़ रुपये का राजस्व बाहर चला गया। इसका आधा करें तो दूसरे राज्यों को मिली चार हजार 720 करोड़ की राशि राज्य के हिस्से आए राजस्व से भी 33.46 फीसद अधिक है।

केंद्र का हिस्सा 217 फीसद बढ़ा

सेंट्रल एक्साइज व सर्विस टैक्स की गणना में शामिल किए गए वर्ष 2016-17 व 2017-18 के 12 माह में केंद्र को 2928 करोड़ रुपये का राजस्व मिला था, जबकि अब यह आंकड़ा बढ़कर (आइजीएसटी की हिस्सेदारी मिलाकर) 6375.5 करोड़ रुपये हो गया है। इस तरह केंद्र के राजस्व में 217 फीसद का इजाफा हुआ है।

उत्तराखंड के राजस्व की स्थिति (करोड़ रु. में)

माह————-जीएसटी पूर्व————-जीएसटी बाद

(2016-17, 2017-18) (2017-18)

जुलाई————-506————————264

अगस्त————406———————–257

सितंबर————414———————–255

अक्तूबर———–464———————–235

नवंबर————-495———————–229

दिसंबर————430———————–234

जनवरी————492———————–246

फरवरी————-461———————-251

मार्च—————-756———————-322

अप्रैल————-344———————–241

मई—————-462———————–300

जून—————-487———————–304

प्रकाश पंत, (वित्त मंत्री) का कहना है कि राज्य सरकार राजस्व बढ़ोतरी के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। इस तरह की पॉलिसी लाने पर विचार किया जा रहा है, जिससे राज्य में औद्योगिकीकरण को बढ़ावा मिल सके। ऐसे उद्योग यदि राज्य के उपभोक्ताओं के लिए माल की आपूर्ति करते हैं तो आइटीसी काटने के बाद उन्हें एसजीएसटी में 50 फीसद तक की छूट दी जाएगी।

सौजन्या, आयुक्त (राज्य माल और सेवा कर विभाग) का कहना है कि राज्य में माल की खपत बढ़ाकर ही राजस्व में इजाफा किया जा सकता है। इसके लिए सभी स्तर पर प्रयास करने होंगे। यहां पर्यटन, बड़े शैक्षणिक संस्थान, अस्पतालों को बढ़ावा देकर लक्ष्य को हासिल किया जा सकता

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