जीते-जी ही अपनी कब्र बनवा लेते हैं यहाँ के हिन्दू लोग

आपने कभी ये नहीं सुना नहीं होगा कि इंसान अपने लिए अपने लिए खुद ही कब्र को खुदवाता हो. लेकिन ऐसा वाकई होता है ताकि उनके मरने के बाद शव को दफ़नाने में कोई परेशानी न हो. ये तो आप जानते ही हैं सिर्फ हिन्दू धर्म ही ऐसा है जहाँ पर शवों को जलाया जाता है. बाकि के धर्म में इन्हें दफना दिया जाता है, लेकिन एक गाँव ऐसा है जो अपने परिजनों के शव को दफनाता है और इसके लिए जीते जी वो काफी खर्च भी करता है. आइये बता देते हैं कहाँ का मामला है ये.इस पर लोगों का कहना है कि अगर शव को जलाया जायेगा तो पर्यावरण दूषित होगा जिसके चलते ये शव को नहीं जलाते. वहीं यादगार के तौर पर वो जिन्दा रहते हुए ही अपनी कब्र को खूब सजाते हैं. यहाँ के केयर टेकर का भी कहना है कि लोग कब्र बनवाने के लिए एडवांस बुकिंग करते हैं और जमीन खरीदते हैं. ये कब्र समाधि की तरह तैयार की जाती है जिसे घौरी कहा जाता है जिस पर मरने वाले की तस्वीर भी लगाई जाती है. तो ऐसा ही कुछ रिवाज है यहाँ पर जो हमारे लिए थोड़ा अजीब है.

दरअसल, हैदराबाद के राय दुर्गम गांव में लोग अपने परिजनों के शव को दफना देते हैं. ये लोग अपने वंश के साथ ही अपनी कब्र बनवाते हैं ताकि वो हमेशा साथ ही रहें. ऐसा करना इनके यहाँ एक रिवाज है जो आज तक चला आ रहा है. अपने पूर्वजों के बगल में कब्र बनवाने के लिए ये जीते जी ही अपनी कब्र को तय कर लेते हैं या वहां की जमीन खरीद कर छोड़ देते हैं ताकि उनका बढ़ता हुआ परिवार भी उनके बगल में ही रहे. इस काम को ‘महाप्रस्थानम’ मैनेजमेंट करती है. 

इस पर लोगों का कहना है कि अगर शव को जलाया जायेगा तो पर्यावरण दूषित होगा जिसके चलते ये शव को नहीं जलाते. वहीं यादगार के तौर पर वो जिन्दा रहते हुए ही अपनी कब्र को खूब सजाते हैं. यहाँ के केयर टेकर का भी कहना है कि लोग कब्र बनवाने के लिए एडवांस बुकिंग करते हैं और जमीन खरीदते हैं. ये कब्र समाधि की तरह तैयार की जाती है जिसे घौरी कहा जाता है जिस पर मरने वाले की तस्वीर भी लगाई जाती है. तो ऐसा ही कुछ रिवाज है यहाँ पर जो हमारे लिए थोड़ा अजीब है.

 

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