जी हां, अब चारबाग के नीचे होगा एक और चारबाग, जानिए पूरा मामला…

अब चारबाग रेलवे स्टेशन को 600 करोड़ रुपये खर्च कर अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाया जाएगा। इसका पूरा खाका तैयार कर लिया गया है। इसके तहत प्लेटफॉर्म के ऊपर मेट्रो की तर्ज पर एक छत बनाई जाएगी। वाहनों के लिए अंडरग्राउंड रास्ते बनाए जाएंगे। ये रास्ते कैब-वे, मेट्रो स्टेशन व चारबाग की सेकंड एंट्री की तरफ निकलेंगे।जी हां, अब चारबाग के नीचे होगा एक और चारबाग, जानिए पूरा मामला...Big Breaking: दुकान में लगी भीषण आग, 12 की मौत की खबर, मची हड़कम्प!

ये रास्ते कुछ ऐसा एहसास कराएंगे जैसे स्टेशन सुरंगों पर खड़ा हो। यात्रियों की सहूलियत के लिए 15 से ज्यादा एस्केलेटर व लिफ्ट लगाई जाएंगी। यही नहीं ग्रीन सिग्नल मिलते ही काम तीन साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। उम्मीद जताई जा रही है कि जनवरी में इसका टेंडर होगा।

रेलवे भूमि विकास प्राधिकरण(आरएलडीए) के साथ मिलकर उत्तर रेलवे के अधिकारियों ने स्टेशन को अत्याधुनिक बनाने का खाका तैयार किया है। रविवार को दिल्ली से आरएलडीए के अधिकारी लखनऊ पहुंचे। उन्होंने प्रोजेक्ट को लेकर यहां अफसरों के साथ बैठक की।

सोमवार को उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक विश्वेश चौबे भी राजधानी में होंगे। उनके सामने प्रोजेक्ट का ब्ल्यूप्रिंट पेश किया जाएगा। उम्मीद जताई जा रही है कि महाप्रबंधक से चर्चा के बाद प्रोजेक्ट को अमली जामा पहनाया जाएगा। 

इसकी जरूरत क्यों

रोजाना दो लाख यात्रियोंं का आना-जाना
चारबाग स्टेशन पर रोजाना औसतन 1.30 लाख और लखनऊ जंक्शन पर 90 हजार यात्री होते हैं। यानी दोनों को मिलाकर करीब दो लाख यात्रियोंं का दबाव होता है।  चारबाग में 282 ट्रेनों का संचालन होता है तो लखनऊ जंक्शन पर 80 से अधिक ट्रेनें संचालित होती हैं। यानी जरूरतें बढ़ रही हैं।

संभागीय परिवहन कार्यालय के मुताबिक चारबाग इलाके में रोजाना करीब 5 लाख वाहनों का ट्रैफिक होता है। इनमें करीब 1100 बसें और 5000 टेम्पो-ऑटो शामिल होते हैं। आने वाले बरसोंं मेंं यह दबाव और बढ़ता जाएगा।

ये हैं फायदे
अंडरपास बन जाने से चारबाग स्टेशन और लखनऊ जंक्शन को मिलाकर यात्रियों की क्षमता साढ़े पांच लाख तक वहन करने की हो जाएगी। यानी अभी की क्षमता के दोगुने से भी ज्यादा।
स्टेशन की क्षमता बढऩे के साथ ट्रैफिक पर भी दबाव बढ़ेगा। ऐसे मेंं अंडरपास बनने से इस समस्या से काफी हद तक निजात मिल सकेगी।

जानिए कैसे होंगे अंडरग्राउंड रास्ते

चारबाग रेलवे स्टेशन की एंट्री यानी रिजर्वेशन सेंटर (पीआरएस) से वाहनों के लिए एक अंडरग्राउंड रास्ता बनेगा। यह रास्ता वन-वे होगा। यह रास्ता सर्कुलेटिंग एरिया की सड़क के नीचे होते हुए एक ओर लखनऊ जंक्शन के कैब-वे पर खुलेगा।

जहां से यह कैब-वे से जुड़ जाएगा। वहीं अंडरग्राउण्ड रास्ते का दूसरा सिरा चारबाग मेट्रो की ओर निकलेगा। इस अंडरग्राउंड रास्ते से दो रास्ते चारबाग की सेकंड एंट्री की ओर भी जाएंगे। जिससे पूरा स्टेशन जुड़ जाएगा।

…तो पिक एंड ड्रॉप स्टेशन बन जाएगा चारबाग
हजरतगंज से चारबाग आने वाले अंडरग्राउंड रास्ते से यात्री सीधे मवैया या फिर सड़क पार मेट्रो स्टेशन की ओर निकल सकेंगे। इससे जाम नहीं लगेगा। यानी चारबाग पिक एंड ड्रॉप स्टेशन बन जाएगा।

180 मीटर चौड़ी छत प्लेटफॉर्म के ऊपर बनेगी
चारबाग रेलवे स्टेशन पर फिलहाल दो फुटओवर ब्रिज(एफओबी) हैं। एक पोर्टिको में पूछताछ केंद्र के पास निकलता है, जबकि दूसरा प्लेटफॉर्म से बाहर सीधे सर्कुलेटिंग एरिया में उतरता है। योजना के तहत दोनों एफओबी हटाए जाएंगे।

इनकी जगह मेट्रो की तर्ज पर 180 मीटर चौड़ा कॉन्कोर्स(छत) बनाया जाएगा, जो प्लेटफॉर्मों से नौ मीटर की ऊंचाई पर होगा। जैसे मेट्रो में टिकट के लिए कॉन्कोर्स होता है, बिल्कुल वैसा ही। इन कॉन्कोर्स को प्लेटफॉर्म से एस्केलेटर्स के जरिए जोड़ा जाएगा। ये कॉन्कोर्स स्टेशन के बाहर से जुड़े रहेंगे।

ये बोले डीआरएम

उत्तर रेलवे(लखनऊ मंडल) के डीआरएम सतीश कुमार ने बताया कि आरक्षण केंद्र से लेकर लखनऊ जंक्शन व कैब-वे तक अंडरग्राउंड रास्ता बनाया जाएगा। सेकंड एंट्री को भी इससे जोड़ा जाएगा। प्लेटफॉर्मों के ऊपर कॉन्कोर्स बनाया जाएगा, जहां यात्री सुविधाएं होंगी। अंडरग्राउंड रास्ते में पार्किंग की व्यवस्था होगी। इसे व प्लेटफॉर्मों को एस्केलेटर्स के जरिए कॉन्कोर्स से जोड़ा जाएगा। पूरा प्रोजेक्ट करीब ६०० करोड़ रुपये का है, जिसकी टेंडरिंग जनवरी में होगी।

You May Also Like

English News