जुलाई महीने में बढ़ा GST कलेक्शन, टैक्स के रूप में मिले 96483 करोड़ रुपये

जुलाई महीने में जीएसटी संग्रह 96,483 करोड़ रुपये के स्तर पर रहा है। जून में यह 95610 करोड़ रुपये के स्तर पर रहा था। जुलाई के आंकड़े से यह माना जा रहा है कि जल्द एक लाख करोड़ का लक्ष्य हासिल किया जाने वाला है। आम बजट 2018-19 के मुताबिक मासिक औसतन 1.15 लाख करोड़ रुपये होना चाहिए था। उस समय भी विशेषज्ञों का माना था कि यह लक्ष्य हासिल करना मुश्किल रह सकता है। वहीं मई में जीएसटी संग्रह 94016 करोड़ रुपये रहा था।जुलाई महीने में जीएसटी संग्रह 96,483 करोड़ रुपये के स्तर पर रहा है। जून में यह 95610 करोड़ रुपये के स्तर पर रहा था। जुलाई के आंकड़े से यह माना जा रहा है कि जल्द एक लाख करोड़ का लक्ष्य हासिल किया जाने वाला है। आम बजट 2018-19 के मुताबिक मासिक औसतन 1.15 लाख करोड़ रुपये होना चाहिए था। उस समय भी विशेषज्ञों का माना था कि यह लक्ष्य हासिल करना मुश्किल रह सकता है। वहीं मई में जीएसटी संग्रह 94016 करोड़ रुपये रहा था।  आधिकारिक रिलीज में बताया गया है कि जुलाई में एकत्रित हुए 96483 करोड़ रुपये में से 15877 करोड़ रुपये सीजीएसटी, 22293 करोड़ रुपये एसजीएसटी, 49951 करोड़ रुपये आइजीएसटी (जिसमें 24852 करोड़ रुपये आयात से एकत्रित किये शामिल हैं) और 8362 करोड़ रुपये सेस से (जिसमें आयात से 794 करोड़ रुपये इकट्ठे किये गये हैं)। यह अनुमान के अनुरूप ही रहा है।     30 जुलाई तक, जून महीने के लिए 55 लाख से ज्यादा जीएसटी रिटर्न फाइल किये जा चुके थे। पहली तिमाही के अंत सेंट्रल जीएसटी से केंद्र ने 504 बिलियन रुपये एकत्रित किये थे। सूत्रों के अनुसार जीएसटी लागू होने के बाद शुरुआती 11 महीनों में औसतन 58 प्रतिशत करदाताओं ने ही निर्धारित तिथि तक जीएसटी रिटर्न भरे। चिंताजनक बात यह है कि दिसंबर 2017 के बाद से निर्धारित तिथि तक जीएसटी रिटर्न भरने वाले व्यापारियों का अनुपात लगातार कम होता जा रहा है।      GST के 28% टैक्स में आने वाली वस्तुओं की संख्या राजस्व संग्रह पर करेगी निर्भर: अढिया यह भी पढ़ें दिसंबर 2017 में 67 प्रतिशत व्यापारियों ने निर्धारित तिथि तक जीएसटी रिटर्न फाइल किया था लेकिन इस साल मई में यह अनुपात घटकर 61 प्रतिशत रह गया। दरअसल दिसंबर 2017 में 81.22 लाख व्यापारियों को जीएसटी का रिटर्न भरना था लेकिन रिटर्न भरने के लिए निर्धारित तारीख तक मात्र 54.26 लाख व्यापारियों ने ही रिटर्न भरा। इस तरह लगभग 33 प्रतिशत व्यापारियों ने समय पर रिटर्न दाखिल नहीं किया। इस साल मई में ऐसे व्यापारियों का आंकड़ा बढ़कर लगभग 40 प्रतिशत हो गया है। इस साल मई में 91.22 लाख व्यापारियों को रिटर्न फाइल करना था लेकिन महज 56.18 लाख ने ही निर्धारित तिथि तक जीएसटी का रिटर्न भरा।

आधिकारिक रिलीज में बताया गया है कि जुलाई में एकत्रित हुए 96483 करोड़ रुपये में से 15877 करोड़ रुपये सीजीएसटी, 22293 करोड़ रुपये एसजीएसटी, 49951 करोड़ रुपये आइजीएसटी (जिसमें 24852 करोड़ रुपये आयात से एकत्रित किये शामिल हैं) और 8362 करोड़ रुपये सेस से (जिसमें आयात से 794 करोड़ रुपये इकट्ठे किये गये हैं)। यह अनुमान के अनुरूप ही रहा है।  

30 जुलाई तक, जून महीने के लिए 55 लाख से ज्यादा जीएसटी रिटर्न फाइल किये जा चुके थे। पहली तिमाही के अंत सेंट्रल जीएसटी से केंद्र ने 504 बिलियन रुपये एकत्रित किये थे। सूत्रों के अनुसार जीएसटी लागू होने के बाद शुरुआती 11 महीनों में औसतन 58 प्रतिशत करदाताओं ने ही निर्धारित तिथि तक जीएसटी रिटर्न भरे। चिंताजनक बात यह है कि दिसंबर 2017 के बाद से निर्धारित तिथि तक जीएसटी रिटर्न भरने वाले व्यापारियों का अनुपात लगातार कम होता जा रहा है।

दिसंबर 2017 में 67 प्रतिशत व्यापारियों ने निर्धारित तिथि तक जीएसटी रिटर्न फाइल किया था लेकिन इस साल मई में यह अनुपात घटकर 61 प्रतिशत रह गया। दरअसल दिसंबर 2017 में 81.22 लाख व्यापारियों को जीएसटी का रिटर्न भरना था लेकिन रिटर्न भरने के लिए निर्धारित तारीख तक मात्र 54.26 लाख व्यापारियों ने ही रिटर्न भरा। इस तरह लगभग 33 प्रतिशत व्यापारियों ने समय पर रिटर्न दाखिल नहीं किया। इस साल मई में ऐसे व्यापारियों का आंकड़ा बढ़कर लगभग 40 प्रतिशत हो गया है। इस साल मई में 91.22 लाख व्यापारियों को रिटर्न फाइल करना था लेकिन महज 56.18 लाख ने ही निर्धारित तिथि तक जीएसटी का रिटर्न भरा।

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