झुँझलाती धूप में कैराना उपचुनाव बना बीजेपी और विपक्ष की लाज

कर्नाटक के रोमांचक चुनाव के बाद अब उत्तरप्रदेश की कैराना संसदीय क्षेत्र का उपचुनाव चर्चा का विषय है, 2019 लोकसभा चुनाव का फाइनल माना जाने वाला कैराना लोकसभा उपचुनाव बीजेपी और महागठबंधन के बीच है, बीजेपी के सामने महागठबंधन में मुख्य उम्मीदवार आरएलडी की है, वहीं आरएलडी के साथ इस चुनाव में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस भी अपने उम्मीदवार नहीं उतार रही है. कर्नाटक के रोमांचक चुनाव के बाद अब उत्तरप्रदेश की कैराना संसदीय क्षेत्र का उपचुनाव चर्चा का विषय है, 2019 लोकसभा चुनाव का फाइनल माना जाने वाला कैराना लोकसभा उपचुनाव बीजेपी और महागठबंधन के बीच है, बीजेपी के सामने महागठबंधन में मुख्य उम्मीदवार आरएलडी की है, वहीं आरएलडी के साथ इस चुनाव में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस भी अपने उम्मीदवार नहीं उतार रही है.     उपचुनाव से पहले यह सीट स्वर्गीय हुकुम सिंह के नाम थी, लेकिन उनके देहांत के बाद अब इस सीट से उन्हीं की बेटी मृगांका सिंह चुनाव के मैदान में है, वहीं आरएलडी की उम्मीदवार के तौर पर यहाँ पूर्व में बसपा की नेता रही तबस्सुम बेगम है. एक और जहाँ आरएलडी के नेता गाँव-गाँव जाकर चुनाव प्रचार में भिड़े हुए है वहीं बीजेपी ने भी इस क्षेत्र में अपने गन्ना मंत्री, शिक्षा मंत्री सहित 20 से ज्यादा पॉपुलर चेहरों को चुनाव में लगा रखा है.     80% के करीब मुस्लिम आबादी और 19% के करीब हिन्दू आबादी वाले इस क्षेत्र में यह चुनाव रमजान के रोज़ों और तपती गर्मी में दोनों पार्टियों के लिए कड़ी चुनौती बना है. सभाओं में कम भीड़ से सभी पार्टियों ने यहाँ पर जमीनी स्तर पर लोगों से मिलने के साथ गाँव-गाँव छोटी-छोटी सभाएं की. कैराना में 28 मई से चुनाव है, अब देखने वाली बात यह होगी कि इस चुनाव में जनता का मूड क्या है, और किस पार्टी को यहाँ पर जश्न मनाने का मौका मिलेगा.

उपचुनाव से पहले यह सीट स्वर्गीय हुकुम सिंह के नाम थी, लेकिन उनके देहांत के बाद अब इस सीट से उन्हीं की बेटी मृगांका सिंह चुनाव के मैदान में है, वहीं आरएलडी की उम्मीदवार के तौर पर यहाँ पूर्व में बसपा की नेता रही तबस्सुम बेगम है. एक और जहाँ आरएलडी के नेता गाँव-गाँव जाकर चुनाव प्रचार में भिड़े हुए है वहीं बीजेपी ने भी इस क्षेत्र में अपने गन्ना मंत्री, शिक्षा मंत्री सहित 20 से ज्यादा पॉपुलर चेहरों को चुनाव में लगा रखा है. 

80% के करीब मुस्लिम आबादी और 19% के करीब हिन्दू आबादी वाले इस क्षेत्र में यह चुनाव रमजान के रोज़ों और तपती गर्मी में दोनों पार्टियों के लिए कड़ी चुनौती बना है. सभाओं में कम भीड़ से सभी पार्टियों ने यहाँ पर जमीनी स्तर पर लोगों से मिलने के साथ गाँव-गाँव छोटी-छोटी सभाएं की. कैराना में 28 मई से चुनाव है, अब देखने वाली बात यह होगी कि इस चुनाव में जनता का मूड क्या है, और किस पार्टी को यहाँ पर जश्न मनाने का मौका मिलेगा. 

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