आखिर क्यों हटाए गए टाटा संस के सबसे युवा चेयरमैन मिस्त्री

नई दिल्ली। टाटा संस ने सोमवार को आयोजित एक विशेष बोर्ड मीटिंग के दौरान पूर्व चेयरमैन साइरस मिस्त्री को निदेशक मंडल से हटा दिया है। गौरतलब है कि एनसीएलएटी (NCLAT) ने उस याचिका को खारिज कर दिया था जिसमें मिस्त्री ने इस बोर्ड मीटिंग को रोकने की मांग की थी।

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दरअसल इस पूरी लड़ाई में रतन टाटा और साइरस मिस्त्री मुख्य किरदार थे और दोनों से ही नोएल का रिश्ता है। नोएल टाटा, टाटा संस के अंतरिम चेयरमैन रतन टाटा के सौतेले भाई हैं जबकि उनकी शादी मिस्त्री की बहन से हुई है।

आपको बता दें कि टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस का अकेले सबसे बड़ा शेयरहोल्डर भी मिस्त्री परिवार ही है। उसके पास कंपनी के 18 फीसद शेयर हैं जबकि रतन टाटा के चलाए जाने वाले टाटा ट्रस्ट के पास इसमें दो तिहाई हिस्सेदारी है। इसलिए टाटा संस के डायरेक्टर पद से मिस्त्री को हटाया जाना पहले ही तय हो गया था।

एनसीएलएटी ने खारिज की मिस्त्री की मांग

टाटा संस के पूर्व चेयरमैन साइरस मिस्त्री को नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (एनसीएलएटी) से बीते शुक्रवार को कोई राहत नहीं मिल पाई। मिस्त्री के परिवार की दो कंपनियों की ओर से दायर याचिका टिब्यूनल ने खारिज कर दी। इसमें टाटा संस के बोर्ड से मिस्त्री को हटाने के लिए 6 फरवरी को बुलाई गई असाधारण आम बैठक पर रोक लगाने की मांग की गई थी।

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बोर्डरुम विवाद के कारण टॉप 100 कंपनियों से बाहर हुआ टाटा

बोर्डरुम से ट्रिब्यूनल तक जा पहुंचे साइरस मिस्त्री और रतन टाटा विवाद के कारण टाटा ग्रुप टॉप 100 कंपनियों की सूची से बाहर हो गया है। इस विवाद के कारण 100 अरब डॉलर वाले टाटा ग्रुप की रैंक 82वें स्थान से खिसक कर 103 हो गई है। ब्रांड फाइनेंस ग्लोबल-500 2017 रिपोर्ट में यह बात सामने आई है।

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