ट्रंप की सलाहकार समिति में PepsiCo अध्यक्ष इंदिरा नूई भी

अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पेप्सिको की सीईओ इंदिरा नूई को स्ट्रैटजिक एंड पॉलिसी फोरम में जगह दी है। 19 सदस्यीय यह समिति उन्हें आर्थिक मामलों पर सलाह देगी। चेन्नई में पैदा हुईं 61 वर्षीय नूई हिलेरी क्लिंटन की समर्थक रहीं हैं। ट्रंप की जीत पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा था कि इससे उनकी बेटियां और कर्मचारी डरे हुए हैं।

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ट्रंप की सलाहकार समिति में PepsiCo अध्यक्ष इंदिरा नूई भी

सलाहकार समिति में शामिल किए गए लोगों के नाम की घोषणा ट्रंप ने बुधवार को की। उन्होंने कहा कि उनका प्रशासन बिजनेस के माहौल को बढ़ावा देने के लिए निजी क्षेत्र के साथ मिलकर काम करेगा। सरकार निजी क्षेत्र को नई नौकरियों के सृजन में भी मदद करेगी।

नूई समिति में जगह पाने वाली एकमात्र भारतवंशी हैं। उनके अलावा स्पेस एक्स व टेस्ला के संस्थापक एलन मस्क और उबर के सीईओ ट्रेविस कालनिक भी समिति में शामिल किए गए हैं।

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गौरतलब है कि मस्क ने भी चुनाव प्रचार के दौरान कहा था कि ट्रंप ह्वाइट हाउस में जाने के काबिल नहीं हैं। समिति के अध्यक्ष ब्लैक स्टोन के सहसंस्थापक और सीईओ स्टीफन ए श्वार्जमेन होंगे।

मुसलमानों की निगरानी में मदद नहीं

गूगल, ट्विटर समेत तकनीकी क्षेत्र की कई दिग्गज कंपनियों के दो सौ से ज्यादा कर्मचारियों ने मुसलमानों की निगरानी में ट्रंप प्रशासन की मदद नहीं करने का फैसला किया है। “नेवरएगेन डॉट टेक” पर जारी एक पत्र को समर्थन देते हुए इन कर्मचारियों ने धर्म के आधार पर लोगों का डेटाबेस तैयार करने में मदद नहीं देने की बात कही है।

रिक पेरी होंगे ऊर्जा मंत्री

20 जनवरी को राष्ट्रपति पद की शपथ लेने जा रहे डोनाल्ड ट्रंप ने रिक पेरी को ऊर्जा और रियान जिंक को गृह मंत्री पद के लिए मनोनीत किया है। टेक्सास के पूर्व गवर्नर पेरी किसी समय ट्रंप के घोर विरोधी रह चुके हैं। वहीं, 55 वर्षीय जिंक नेवी सील कमांडर रह चुके हैं। फिलहाल वे मोंटाना से प्रतिनिधि सभा के सदस्य हैं।

एक चीन नीति पर चेताया

“एक चीन नीति” में दखल देने की कोशिशों पर बीजिंग ने डोनाल्ड ट्रंप को चेताते हुए कहा है कि इससे शांति और स्थिरता को गंभीर खतरा पहुंच सकता है। फ्रांस ने भी ट्रंप की चीन नीति की आलोचना की है। वहीं, ताइवान ने कहा है कि क्षेत्र में शांति सभी के हित में हैं। गौरतलब है कि बीते दिनों ट्रंप ने एक चीन नीति पर सवाल खड़े करते हुए कहा था कि बीजिंग उन्हें हुक्म नहीं दे सकता है।

 

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