ट्रक हड़ताल : थमे पहिए फिर से चलने लगे..

केंद्र सरकार की पहल के बाद पिछले आठ दिनों से जारी ट्रक ऑपरेटरों की देश व्यापी हड़ताल शुक्रवार शाम को खत्म हो गई है. केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के साथ हुई बैठक के बाद ट्रकों यूनियनों ने हड़ताल खत्म करने का फैसला लिया है. देशभर में हुई इस हड़ताल से करीब 30,000 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है. केंद्र सरकार की पहल के बाद पिछले आठ दिनों से जारी ट्रक ऑपरेटरों की देश व्यापी हड़ताल शुक्रवार शाम को खत्म हो गई है. केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के साथ हुई बैठक के बाद ट्रकों यूनियनों ने हड़ताल खत्म करने का फैसला लिया है. देशभर में हुई इस हड़ताल से करीब 30,000 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है.   दिल्ली में ऑटो से सफर पड़ेगा महंगा    हड़ताल खत्‍म होने को लेकर केंद्रीय परिवहन और हाइवे मंत्रालय व ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (एआईएमटीसी) ने कई दौर की बैठकों के बाद संयुक्‍त व्‍यक्‍तव्‍य जारी किया.  आठ दिनों से चलने वाली इस हड़ताल के समाप्त होने पर व्यापारियों ने राहत की सांस ली है. विभिन्न मागों को लेकर चल रही यह हड़ताल 20 जुलाई से शुरू हुई थी. इसके चालू होने से अब ट्रांसर्पोटेशन का काम शुरू हो जाएगा.    देश भर में जारी है ट्रांसपोर्ट हड़ताल    बता दें कि हड़ताल की मांगों में डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी, अधिक टोल शुल्क, भारी बीमा दर, स्कूल बसों के लिए टोल छोड़ने, जीएसटी और ई-वे बिल का बोझ जैसी आदि मांगे शामिल थी. इस हड़ताल के दौरान देश भर में करीब 93 लाख और महाराष्ट्र में लगभग 16 लाख ट्रकों के पहिए थमे रहे. बताया जा रहा है महाराष्ट्र में ही करीब 5000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ

हड़ताल खत्‍म होने को लेकर केंद्रीय परिवहन और हाइवे मंत्रालय व ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (एआईएमटीसी) ने कई दौर की बैठकों के बाद संयुक्‍त व्‍यक्‍तव्‍य जारी किया.  आठ दिनों से चलने वाली इस हड़ताल के समाप्त होने पर व्यापारियों ने राहत की सांस ली है. विभिन्न मागों को लेकर चल रही यह हड़ताल 20 जुलाई से शुरू हुई थी. इसके चालू होने से अब ट्रांसर्पोटेशन का काम शुरू हो जाएगा.  

बता दें कि हड़ताल की मांगों में डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी, अधिक टोल शुल्क, भारी बीमा दर, स्कूल बसों के लिए टोल छोड़ने, जीएसटी और ई-वे बिल का बोझ जैसी आदि मांगे शामिल थी. इस हड़ताल के दौरान देश भर में करीब 93 लाख और महाराष्ट्र में लगभग 16 लाख ट्रकों के पहिए थमे रहे. बताया जा रहा है महाराष्ट्र में ही करीब 5000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ 

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