डायरी दिनांक 17 अप्रैल 2017: गुरु माँ की डायरी से जानें अपने गुरु को

17 अप्रैल 17….कल रात ही लखनऊ से ,अपने मायके से लौटी हूँ… तो सोचा कि एक और विवाह पूर्व प्रसंग आपको बताऊँ। बात तब की है जब मेरे माता – पिता मेरे लिए योग्य वर तलाश रहे थे । ( कृपया ‘ योग्य वर ‘को जुमले की तरह ही समझें, क्योंकि ये तो अति योग्य निकले…और मैं इनके योग्य नहीं )

डायरी दिनांक 17 अप्रैल 2017: गुरु माँ की डायरी से जानें अपने गुरु कोअब हैरतअंगेज बात यह हुई कि जिस परिवार ने मेरी माँ और मेरे पिता का विवाह कराया था, उसी परिवार की सदस्या ,अचानक मेरे पिताजी को मिल गयीं। हर सयानी होती बेटी के पिता की तरह, मेरे पिता ने भी उनसे मेरे लिये कोई वर सुझाने को कहा….।

आप लोगों के श्रीगुरुजी उस सदस्या के फुफेरे भतीजे निकले…सो उन बुआजी ने झट से अपने भतीजे की बात छेड़ दी ….(अब इसे क्या कहूँ, महज़ इत्तेफाक…कि मेरे माता- पिता का विवाह कराने वाले ,मेरे विवाह का भी माध्यम बन रहे थे….या यह कहूँ कि हम दोनों के भी जन्म से पूर्व, ईश्वर ने हमारा गठबंधन तय कर दिया था….हमारा भविष्य एक साथ लिख दिया था…)

….हाँ ,तो… मेरे पिताजी eligible bachelor का पता चलते ही, अगले ही दिन मुरादाबाद, ‘ इनके ‘ मूल स्थान , के लिए रवाना हो गए।ढूंढते- ढाँढते दिए पते पर पहुंचे, call bell बजायी,दरवाज़ा जिसने खोला, उसने cream colour की धोती और आधी बांह का ऊंचा कुर्ता पहना हुआ था । जी,…आप सभी ने ठीक पहचाना, ‘ the person in question, ‘ ने ही दरवाज़ा खोला था।

खाना- चाय के उपरांत ,इनकी qualification, service इत्यादि के बारे में पूछ कर, मेरे पिताजी इनकी कुण्डली लेकर वापसी के लिए चल दिये…( जो आंख बंद करके, पूर्व- जन्म का भी हाल बता सकता हो ,उसने किसी ज्योतिर्विद से अपनी कुण्डली ,मेरी कुण्डली से मिलाने के लिए , मेरे पिता को सहर्ष दे दी….अब सोचती हूँ तो लगता है कि विलक्षण लोग जब साधारण लोगों के बीच रहते हैं ,तो औरों की तरह दिखने के लिए कितना कुछ जज़्ब करते हैं …)
खैर… आप सोच रहे होंगे कि आज मैं नितांत व्यक्तिगत बात क्यों बता रही हूं…. कल आपको स्पष्ट हो जाएगा…😊

 
 
 

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