डायरी दिनांक 19 अप्रैल 2017: गुरु माँ की डायरी से जानें अपने गुरु को

19 अप्रैल 17…हम सबके प्रिय श्रीगुरुजी की एक विशेष आदत है, वे जब भी discussion करते हैं, तो अपनी table, अपनी book rack, यहां तक कि अपने कमरे की setting भी change करते रहते हैं।जो लोग एक-दो महीने बाद आश्रम आते हैं, वे आश्रम में कुछ न कुछ change अवश्य पाते हैं।
श्रीगुरुजी एक बार बोले,” इस दीवार पर हम permanent tiles लगा देते हैं।” मैंने इस proposal को सिरे से खारिज कर दिया और बोली, ” आपका क्या भरोसा…कल को कहें, मुझे इस दीवार पर कोई चित्र टांगना है, तो मैं कहाँ टाइल्स उखड़वाती फिरूँगी…”
फिर इन्होंने एक अद्भुत सूत्र दिया, बोले,” आकर्षण सुंदरता में नहीं ,नवीनता में होता है….इसलिए अक्सर कोई भी चीज़ बहुत सुंदर होते हुए भी, कुछ समय बाद आकर्षण खो देती है, क्योंकि उसकी नवीनता समाप्त हो चुकी होती है।” इतना गहरा सूत्र मेरे मन में घर कर गया, सो मैं तुरंत चर्चा के मूड में आ गई और बोली, ” क्या बात कही आपने….नवीनता के धागे से बंधने पर ही हर रिश्ता सुंदर बना रहता है, अपना आकर्षण नहीं खोता…इसलिए जो लोग अपने रिश्तों से बेफिक्र हो जाते हैं, उन्हें for granted ले लेते हैं, वे अकेले रह जाते हैं।”
” बिल्कुल ठीक ” ये बोले, ” चाहे रिश्ता हो या काम मेहनत तो हर जगह करनी है, input हर जगह देना है, creativity develop करनी ही है, तभी नवीनता आएगी और quality भी, satisfaction भी।”
“हूँssss…मैं आपकी हर बात से सहमत हूँ पर tiles तब भी नहीं लगेंगी…आप नवीनता के लिए setting बेशक change करते रहें…”,मैंने उनकी मंशाओं पर पानी फेरते हुए कहा।

 
 
 

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