डाॅलर माता मंदिर के नाम से विख्यात है यह मंदिर

भारत एक ऐसा देश है, जहां पर एक साथ कई जाति व धर्म के लोग रहते हैं, इसलिए भारत को धर्म प्रधान देश कहा जाता है। आज हम आपसे भारत की इसी महत्ता के बारे में बात करने वाले हैं। वैसे तो जब धर्म कि बात आती है, तो हिन्दू-मुस्लिम अलग-अलग हो जाते हैं। लेकिन भारत में एक ऐसा मंदिर भी है, जहां पर एक मुस्लिम महिला कि पूजा कि जाती हैं। जी हां जानकर तो आपको भी यकीन नहीं होता होगा लेकिन यह जानकारी एक दम सच है। तो चलिए जानते हैं इसके बारे में कुछ विस्तार से…भारत एक ऐसा देश है, जहां पर एक साथ कई जाति व धर्म के लोग रहते हैं, इसलिए भारत को धर्म प्रधान देश कहा जाता है। आज हम आपसे भारत की इसी महत्ता के बारे में बात करने वाले हैं। वैसे तो जब धर्म कि बात आती है, तो हिन्दू-मुस्लिम अलग-अलग हो जाते हैं। लेकिन भारत में एक ऐसा मंदिर भी है, जहां पर एक मुस्लिम महिला कि पूजा कि जाती हैं। जी हां जानकर तो आपको भी यकीन नहीं होता होगा लेकिन यह जानकारी एक दम सच है। तो चलिए जानते हैं इसके बारे में कुछ विस्तार से....  दरअसल, गुजरात के अहमदाबाद से करीब  40 किमी. दूर एक 'झूलासन' गांव है, जहां हिंदू और मुस्लिम एकता के रूप मे मुस्लिम महिला की पूजा की जाती है। ऐसी मान्यता है कि सैकड़ों साल पहले डोला नाम की एक मुस्लिम महिला ने उपद्रवियों से अपने गांव को बचाने के लिए बड़ी साहस से उनसे लड़ाई की। अपने गांव की रक्षा करते करते डोला ने अपनी जान दे दी। कहा जाता है कि मरने के बाद डोला का शरीर एक फूल मे बदल गया था और बलिदान के चलते लोगो ने फूल के ऊपर ही मंदिर बनवा दिया।   गांव के लोग आज भी मानते हैं कि डोला आज भी न सिर्फ उनके गांव की रक्षा कर रही है बल्कि लोगों के दुख और दर्द को भी दूर करती है। इस मंदिर को डाॅलर माता मंदिर के नाम से भी जानते है, कयोकि  इस गांव मे 1500 से अधिक लोग अमेरिकी है। आपको बता दें कि सुनीता विलियम्स जब अंतरिक्ष यात्रा पर गई थी, तब इस मंदिर मे एक अखंड ज्योति जलाई थी, जो लगातार 4 महीने तक जलती रही थी।.

दरअसल, गुजरात के अहमदाबाद से करीब  40 किमी. दूर एक ‘झूलासन’ गांव है, जहां हिंदू और मुस्लिम एकता के रूप मे मुस्लिम महिला की पूजा की जाती है। ऐसी मान्यता है कि सैकड़ों साल पहले डोला नाम की एक मुस्लिम महिला ने उपद्रवियों से अपने गांव को बचाने के लिए बड़ी साहस से उनसे लड़ाई की। अपने गांव की रक्षा करते करते डोला ने अपनी जान दे दी। कहा जाता है कि मरने के बाद डोला का शरीर एक फूल मे बदल गया था और बलिदान के चलते लोगो ने फूल के ऊपर ही मंदिर बनवा दिया। 

गांव के लोग आज भी मानते हैं कि डोला आज भी न सिर्फ उनके गांव की रक्षा कर रही है बल्कि लोगों के दुख और दर्द को भी दूर करती है। इस मंदिर को डाॅलर माता मंदिर के नाम से भी जानते है, कयोकि  इस गांव मे 1500 से अधिक लोग अमेरिकी है। आपको बता दें कि सुनीता विलियम्स जब अंतरिक्ष यात्रा पर गई थी, तब इस मंदिर मे एक अखंड ज्योति जलाई थी, जो लगातार 4 महीने तक जलती रही थी।

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