डोनाल्ड ट्रंप की धमकी से भड़के PAK ने मिलिट्री-खुफिया सहयोग खत्म करने का किया ऐलान

पाकिस्तान और अमेरिका के संबंधों में तनातनी लगातार बढ़ती जा रही है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आरोपों के बाद पाकिस्तान ने अमेरिका के साथ मिलिट्री और खुफिया सहयोग को स्थगित कर दिया है.डोनाल्ड ट्रंप की धमकी से भड़के PAK ने मिलिट्री-खुफिया सहयोग खत्म करने का किया ऐलानNew Smartphone: Vivo कम्पनी ने पेश किया ऑनस्क्रीन फिंगरप्रिंट सेंसर वाला फोन!

इस्लामाबाद में मंगलवार को इंस्टीट्यूट ऑफ स्ट्रैटजिक स्टडीज के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पाकिस्तान के रक्षा मंत्री खुर्रम दस्तगीर खान ने इसकी जानकारी दी. बता दें कि जनवरी के पहले हफ्ते में ट्वीट कर ट्रंप ने पाकिस्तान पर निशाना साधा था. उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान को सुरक्षा सहायता राशि के तौर पर भारी मदद के बावजूद अमेरिका को धोखे और झूठ के सिवा कुछ नहीं मिला है.

‘पाकिस्तान की सिक्योरिटी इन्वॉयरमेंट का ढांचा’ शीर्षक के सेमिनार को संबोधित करते हुए खान ने कहा कि अमेरिका की अफगानिस्तान में हार होने जा रही है बजाय इसके कि उसने करोड़ों डॉलर खर्च किए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका अफगानिस्तान में अपनी हार के लिए पाकिस्तान को बलि का बकरा बना रहा है.

खुर्रम खान ने कहा, ‘पाकिस्तान अपने त्याग की कोई कीमत नहीं लगाना चाहता, लेकिन हम चाहते हैं कि उसे पहचाना जाए.’ उन्होंने आगे कहा कि पाकिस्तान इस बात की इजाजत नहीं देगा कि अफगानिस्तान की लड़ाई पाकिस्तान की जमीन पर लड़ी जाए.

उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका पाकिस्तान पर आरोप लगाने में व्यस्त है, बजाय इसके कि पाकिस्तान-अफगानिस्तान बॉर्डर को सुरक्षित बनाने के लिए मदद उपलब्ध कराई जाए.

इस्लामाबाद स्थित अमेरिकी दूतावास ने कहा है कि उसे पाकिस्तान की ओर से मिलिट्री को-ऑपरेशन के स्थगित किए जाने की जानकारी नहीं मिली है. डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका दूतावास के प्रवक्ता रिचर्ड नेलजायर ने कहा, ‘हमें कोई औपचारिक जानकारी नहीं मिली है.’

एक सवाल के जवाब में दस्तगीर खान ने कहा कि 2011 में सलाला चेक पोस्ट पर हमले के बाद अफगानिस्तान के लिए नाटो सप्लाई रोककर पाकिस्तान ने उचित कदम उठाया था. हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि ट्रंप के कथित आरोपों के बाद पाकिस्तान इस तरह का कोई कदम नहीं उठाएगा, बल्कि सही समय का इंतजार करेगा.

पाकिस्तानी रक्षामंत्री ने कहा कि ईरान, चीन और रूस जैसे देश अमेरिका की तरह इस क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण सहयोगी हैं. बता दें कि खान का यह बयान पाकिस्तान के विदेश मंत्री ख्वाजा आसिफ के उस बयान पर मुहर लगाना ही है ,जिसमें उन्होंने इशारा किया था कि अमेरिका के साथ पाकिस्तान के द्विपक्षीय संबंधों का समय पूरा हो गया है.

इस हफ्ते की शुरुआत में आसिफ ने वॉल स्ट्रीट जनरल को दिए एक इंटरव्यू में कहा था कि सहयोगी देश इस तरह से व्यवहार नहीं करते हैं. उन्होंने यह भी कहा था कि अफगानिस्तान में अपनी असफलताओं के लिए वाशिंगटन, इस्लामाबाद को बलि का बकरा बना रहा है. 

पेंटागन ने सोमवार को कहा था कि वाशिंगटन ने पाकिस्तान को बता दिया है कि करोड़ों डॉलर की सुरक्षा सहायता राशि पाने के लिए इस्लामाबाद को क्या करना होगा.  

पेंटागन के प्रवक्ता कर्नल रॉब मैनिंग ने कहा था कि पाकिस्तान से हमारी उम्मीदें साफ और स्पष्ट हैं. तालिबान, हक्कानी लीडर और हमले की योजना बनाने वालों को पाकिस्तान की जमीन पर शरण नहीं मिलनी चाहिए.

पाकिस्तान-अमेरिका के खराब होते रिश्ते

बता दें कि नए साल के मौके पर वाशिंगटन ने इस्लामाबाद पर दबाव बढ़ाते हुए आतंकवाद के खिलाफ और ज्यादा कड़े कदम उठाने को कहा है. वाशिंगटन ने यह साफ कर दिया है कि ट्रंप के ‘झूठ और धोखे’ के आरोपों के बाद पाकिस्तान को सुरक्षा सहायता राशि रोका जाना अमेरिका की दक्षिण एशिया स्ट्रैटजी का अहम हिस्सा है.

अमेरिका के इस कदम को पाकिस्तान में इस्लामाबाद के ऊपर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए जाने के शुरुआती कदमों के रूप में देखा जा रहा है. हालांकि दोनों देशों के बीच तनातनी के बावजूद अमेरिका और पाकिस्तान के अधिकारियों के बीच संपर्क बना हुआ है.

अमेरिका के डिफेंस सेक्रेटरी जेम्स मैटिस ने शुक्रवार को कहा कि सैन्य सहायता स्थगित किए जाने के बावजूद पेंटागन पाकिस्तानी सैन्य प्रतिष्ठानों के साथ अपना कम्युनिकेशन बनाए हुए हैं.

उधर पाकिस्तान की विदेश सचिव तहमीना जंजुआ ने कहा कि इस्लामाबाद, वाशिंगटन के साथ जितना संभव हो सकेगा, संपर्क बनाए रखेगा. क्योंकि अमेरिका सिर्फ ग्लोबल पावर ही नहीं है, बल्कि क्षेत्र में उसकी मौजूदगी भी है. और पाकिस्तान के लिए वह एक पड़ोसी की तरह है.

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