भारत को शक्तिशाली देश बनाने के लिए, “ट्रम्प ने मोदी को दिया ये ब्रह्मास्त्र”!

हमारे पीएम मोदी और मिस्टर डोनाल्ड ट्रम्प की दोस्ती के किस्सो के बारे में तो आप सब जान ही चुके होंगे . मगर इस बार डोनाल्ड ट्रम्प भारत को एक ऐसा तोहफा देने वाले है, जिसके बारे में जान कर आप भी हैरान रह जायेगे. जी हां जरा सोचिये अगर आप दिल्ली से मुम्बई की दूरी केवल एक घंटे में तय कर ले तो ये खबर भारत के लिए किसी बड़ी खुशखबरी से कम नहीं होगी . वैसे हम आपको बता दे कि हम केवल हवा में बातें नहीं कर रहे है, क्योंकि ये सब अब सच में होने वाला है. अगर खबरों की माने तो ऐसा बताया जा रहा है, कि अमेरिकी कंपनी के कुछ अधिकारी इस समय दिल्ली में ही है .

पीएम मोदी और मिस्टर डोनाल्ड ट्रम्प की दोस्ती के किस्सो

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“ट्रम्प ने मोदी को दिया हाईपरलूप” नाम का ये ब्रह्मास्त्र

इसके साथ ही सरकार इस प्रोजेक्ट को लेकर कुछ जरुरी बातें जल्द ही बता सकती है . गौरतलब है, कि यह बेहतरीन तोहफा अमेरिका के जरिये ही भारत को मिलेगा. दरअसल कंपनी का दावा है, कि इस नयी तकनीक के जरिये हम हवाई जहाज द्वारा ही सस्ती और तेज यात्रा का आनंद ले पाएंगे. अब देखना ये है, कि भारत सरकार इस मीटिंग को लेकर कंपनी से क्या वार्तालाप करती है . वैसे हम आपको बता दे कि इस ट्रेननुमा हवाई जहाज को हाईपरलूप का नाम दिया गया है. इसके इलावा इस प्रोजेक्ट पर काम करने वाली कंपनी अमेरिका के लॉस एंजिलिस में है.

साथ ही हाईपरलूप ट्रांसपोर्टेशन टेक्नोलॉजी के को फाउंडर बिबॉप ग्रेस्टा का कहना है, कि उनकी कंपनी ने इससे पहले भारत के परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से इसके बारे में बातचीत की है. यही नहीं इसके इलावा उन्होंने नितिन गडकरी को इस बारे में लेटर भी भेजा है. पर ऐसा कहा जा रहा है, कि ग्रेस्टा को अभी भी इस पर नितिन गडकरी की प्रतिक्रिया का इंतज़ार है. शायद यही वजह है, कि कंपनी के अधिकारी अभी भी दिल्ली में मौजूद है. हालांकि इस बारे में कंपनी के बड़े अधिकारी का कहना है, कि उन्होंने इस मामले को लेकर नितिन गडकरी से मुलाकात भी की है और साथ ही इससे जुडी जानकारियां भी उन्हें दी है .

वैसे आपको बता दे कि नितिन गडकरी को कंपनी का ये प्रस्ताव बेहद पसंद आया है और इसलिए कंपनी को भी नितिन के पॉजिटिव रिएक्शन का ही इंतज़ार है. साथ ही उन्होंने बताया कि गडकरी से कई मुलाकातों के दौरान ही उन्होंने यह प्रस्ताव उनके सामने रखा. इसके इलावा जैसे ही गडकरी से इस बारे में पॉजिटिव रिएक्शन मिलेगा वैसे ही कंपनी जल्द से जल्द भारत में इसके लिए फिजिबिलिटी स्टडी शुरू कर देगी.

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गौरतलब है, कि ग्रेस्टा का कहना है, कि जमीन मिलने के बाद 38 महीनों के अंदर ही भारत में हाईपरलूप ट्रैन तैयार हो जाएगी. फ़िलहाल मोदी सरकार भारत में हाईस्पीड ट्रेनों के बारे में विचार कर रही है और ऐसे में इस प्लेन के जरिये भारत कई मूल्कों से आगे निकल सकता है. अब आपको बताते है, कि आखिर ये हाईपरलूप है क्या. वैसे इसके बारे में आप सबसे पहले इतना जान लीजिये कि स्पीड के मुकाबले में ये बुलेट ट्रेनों को पीछे छोड़ देगी और वही इसकी लागत भी बुलेट ट्रेनों से बहुत कम है.

जहाँ बुलेट ट्रेन में एक किलोमीटर का ट्रैक तैयार करने के लिए 100 मिलियन डॉलर यानि 674 करोड़ रूपये का खर्च हो जाता है, वही हाईपरलूप का एक किलोमीटर का ट्रैक तैयार करने में 40 मिलियन डॉलर यानि 269 करोड़ का खर्च आएगा. अगर साधारण शब्दों में कहे तो इस टेक्नोलॉजी के जरिये भारत, चीन और जापान जैसे देशो को भी पीछे छोड़ सकता है. ऐसे में अगर आने वाले समय में हाईपरलूप को बेस्ट परिवहन व्यवस्था का ख़िताब दिया जाये तो इसमें कुछ गलत नहीं होगा.

 

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