तुषार कपूर की नजरों में धारा 377 प्राचीन कानून, कहा- बैन हो

समलैंगिकता अपराध है या नहीं इस बारे में कोर्ट का फैसला आना अभी बाकी है. इसी बीच धारा 377 को लेकर लोगों में बहस जारी है. बॉलीवुड में भी तमाम एक्टर्स हैं जिन्होंने इस विषय पर खुलकर अपनी राय रखी है. ईशा गुप्ता, कोएना मित्रा, सेलिना जेटली जैसे सितारों ने इस पर अपनी राय रखी है. बॉलीवुड लाइफ से खास बातचीत में तुषार कपूर ने भी इस मुद्दे पर अपने विचार रखे.समलैंगिकता अपराध है या नहीं इस बारे में कोर्ट का फैसला आना अभी बाकी है. इसी बीच धारा 377 को लेकर लोगों में बहस जारी है. बॉलीवुड में भी तमाम एक्टर्स हैं जिन्होंने इस विषय पर खुलकर अपनी राय रखी है. ईशा गुप्ता, कोएना मित्रा, सेलिना जेटली जैसे सितारों ने इस पर अपनी राय रखी है. बॉलीवुड लाइफ से खास बातचीत में तुषार कपूर ने भी इस मुद्दे पर अपने विचार रखे.  धारा 377 में क्या है  तुषार कपूर ने कहा, "मुझे लगता है इसे (धारा को) बैन कर देना चाहिए. कार्रवाई जारी है लेकिन मुझे लगता है इसे बैन ही कर देना चाहिए. हम एक ऐसा देश हैं जो सही मायनों में बहुत सहिष्णु और उदार है. इसलिए मुझे नहीं लगता कि इतने प्राचीन कानूनों की जरूरत है. इस तरह के निजी मामले हमें वक्त में काफी पीछे ले जाते हैं. और हमें उतना पीछे जाने की जरूरत नहीं है."  संविधान पीठ ने क्या कहा  तुषार ने कहा, "मुझे लगता है कि यह टैबू खत्म हो जाना चाहिए और सभी पार्टियां इसका समर्थन करेंगी. अंततः सभी को खुश रहना चाहिए. बता दें कि अक्टूबर साल 2017 तक दुनिया के 25 देशों में समलैंगिक यौन संबंध बनाने को कानूनी मान्यता मिल चुकी है. मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट में आईपीसी की धारा 377 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई पूरी हो गई है. सुनवाई के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है.

तुषार कपूर ने कहा, “मुझे लगता है इसे (धारा को) बैन कर देना चाहिए. कार्रवाई जारी है लेकिन मुझे लगता है इसे बैन ही कर देना चाहिए. हम एक ऐसा देश हैं जो सही मायनों में बहुत सहिष्णु और उदार है. इसलिए मुझे नहीं लगता कि इतने प्राचीन कानूनों की जरूरत है. इस तरह के निजी मामले हमें वक्त में काफी पीछे ले जाते हैं. और हमें उतना पीछे जाने की जरूरत नहीं है.”

तुषार ने कहा, “मुझे लगता है कि यह टैबू खत्म हो जाना चाहिए और सभी पार्टियां इसका समर्थन करेंगी. अंततः सभी को खुश रहना चाहिए. बता दें कि अक्टूबर साल 2017 तक दुनिया के 25 देशों में समलैंगिक यौन संबंध बनाने को कानूनी मान्यता मिल चुकी है. मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट में आईपीसी की धारा 377 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई पूरी हो गई है. सुनवाई के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है.

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