तूफान भी नहीं बदल पाते जगन्नाथ मंदिर की ध्वजा का रुख़

उड़ीसा के पुरी में मौजूद जगन्नाथ मंदिर कई गहरे रहस्यों से भरा हुआ मंदिर है. इस मंदिर के चमत्कारों के बारे में जितनी बात की जाए उतनी कम है. अपने रहस्यों और चमत्कारों के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर में इन दिनों लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ लगी हुई हैं. गौरतलब है कि इन दिनों में भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा का भव्य आयोजन किया जाता है जिसमें लाखों संख्या में लोग मौजूद रहते हैं.उड़ीसा के पुरी में मौजूद जगन्नाथ मंदिर कई गहरे रहस्यों से भरा हुआ मंदिर है. इस मंदिर के चमत्कारों के बारे में जितनी बात की जाए उतनी कम है. अपने रहस्यों और चमत्कारों के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर में इन दिनों लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ लगी हुई हैं. गौरतलब है कि इन दिनों में भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा का भव्य आयोजन किया जाता है जिसमें लाखों संख्या में लोग मौजूद रहते हैं.    वर्षो से चली आ रही परम्परा के अनुसार हर वर्ष इस भव्य रथ यात्रा का आयोजन किया जाता है. आज हम आपको जगन्नाथ मंदिर से जुड़ा एक और गहरा रहस्य बताने जा रहे हैं जिसके बारे में शायद ही किसी ने सुना होगा. इस मंदिर की चोटी पर लहराती ध्वजा के बारे में ऐसा कहा जाता है कि हवा अपना रुख बदल सकती है लेकिन इस मंदिर की ध्वजा अपना रुख कभी नहीं बदलती है यही नहीं बल्कि मंदिर की चोटी पर लहराता ध्वज सदैव हवा के विपरीत दिशा में लहराता है.    ऐसा कहा जाता है कि यहां दिन के समय हवा समुद्र से जमीन की तरफ आती है और शाम में इसके उल्ट दिशा में हवा बहती है. लेकिन चमत्कार यह है कि मंदिर का ध्वज इसके ठीक विपरीत उल्टे दिशा में लहराता है और इसका रुख हवा भी नहीं बदल पाती है. माना गया है कि मंदिर में हवा दिन में समुद्र की ओर और रात में मंदिर की तरफ बहती है.    इस मंदिर की एक और खास बात यह है कि मंदिर पर लगे सुदर्शन चक्र के दर्शन आप मंदिर परिसर में कहीं से भी खड़े होकर कर सकते हैं. जब भी आप इस सुदर्शन चक्र को देखेंगे तो आपको मंदिर के हर परिसर से सुदर्शन चक्र आपके सामने ही दिखेगा. इस साल की रथ यात्रा 14 जुलाई से शुरू हो चुकी है जो पूरे 9 दिन तक चलने वाली है.

वर्षो से चली आ रही परम्परा के अनुसार हर वर्ष इस भव्य रथ यात्रा का आयोजन किया जाता है. आज हम आपको जगन्नाथ मंदिर से जुड़ा एक और गहरा रहस्य बताने जा रहे हैं जिसके बारे में शायद ही किसी ने सुना होगा. इस मंदिर की चोटी पर लहराती ध्वजा के बारे में ऐसा कहा जाता है कि हवा अपना रुख बदल सकती है लेकिन इस मंदिर की ध्वजा अपना रुख कभी नहीं बदलती है यही नहीं बल्कि मंदिर की चोटी पर लहराता ध्वज सदैव हवा के विपरीत दिशा में लहराता है.

ऐसा कहा जाता है कि यहां दिन के समय हवा समुद्र से जमीन की तरफ आती है और शाम में इसके उल्ट दिशा में हवा बहती है. लेकिन चमत्कार यह है कि मंदिर का ध्वज इसके ठीक विपरीत उल्टे दिशा में लहराता है और इसका रुख हवा भी नहीं बदल पाती है. माना गया है कि मंदिर में हवा दिन में समुद्र की ओर और रात में मंदिर की तरफ बहती है.

इस मंदिर की एक और खास बात यह है कि मंदिर पर लगे सुदर्शन चक्र के दर्शन आप मंदिर परिसर में कहीं से भी खड़े होकर कर सकते हैं. जब भी आप इस सुदर्शन चक्र को देखेंगे तो आपको मंदिर के हर परिसर से सुदर्शन चक्र आपके सामने ही दिखेगा. इस साल की रथ यात्रा 14 जुलाई से शुरू हो चुकी है जो पूरे 9 दिन तक चलने वाली है.

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