तेंदुआ एनकाउंटर में वन विभाग की चार्जशीट तैयार, एसओ समेत कई पुलिस कर्मी बने आरोपित

आशियाना के औरंगाबाद खालसा में 17 फरवरी को तेंदुआ मारे जाने की घटना में पुलिस कर्मियों को आरोपित बनाया गया है। वन विभाग के विवेचना अधिकारी ने चार्जशीट पूरी कर ली है। इसमे तत्कालीन थानाध्यक्ष त्रिलोकी ंिसंह को मुख्य आरोपित बनाया गया है। वन विभाग की तरफ से विवेचना कर रहे एसडीओ (वन) मोहनलालगंज अयोध्या प्रसाद का कहना है कि तत्कालीन थानाध्यक्ष त्रिलोकी सिंह की सरकारी रिवॉल्वर की गोली से तेंदुआ मारा गया था और वह ही मुख्य आरोपी बनाए गए हैं। चार्जशीट में तत्कालीन थानाध्यक्ष के साथ ही कई अन्य पुलिस कर्मियों को आरोपित बनाया गया है। अब यह रिपोर्ट एक दो दिन प्रभागीय वनाधिकारी (अवध क्षेत्र) को सौंपी जाएगी, जहा से उसे कोर्ट में दाखिल किया जाएगा।

इस घटना में वन विभाग की तरफ से 18 फरवरी को एसडीओ वन अयोध्या प्रसाद ने वन्यजीव संरक्षण अधिनियम-1972 की धारा नौ, 11 और 51 के तहत अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। यह मुकदमा भी वन विभाग ने अपनी ही जीडी में दर्ज किया था। विवेचना एसडीओ वन मोहनलालगंज अयोध्या प्रसाद को दी गई थी। विवेचना अधिकारी ने घटना में मौजूद तत्कालीन थानाध्यक्ष त्रिलोकी सिंह समेत अन्य पुलिस कर्मियों के साथ ही तेंदुआ को पकड़ने के लिए तैनात दस वन दरोगा व अन्य वन कर्मियों के भी बयान दर्ज किए गए थे। विवेचना अधिकारी अयोध्या प्रसाद ने रिपोर्ट में तेंदुआ को मारे जाने को प्रशासनिक चूक और लापरवाही भी बताया है और कहा है कि तेंदुए को गोली थानाध्यक्ष की सरकारी रिवॉल्वर से हुई थी। चार्जशीट में किन-किन और लोगों को आरोपित बनाया गया हैं, उसे बताने से एसडीओ वन अयोध्या प्रसाद ने बताने से मना कर दिया।

तीन दिन तक थी दशहत :

15 फरवरी से लेकर 17 फरवरी की सुबह (तेंदुआ मारे जाने तक) आशियाना व उससे जुड़े इलाकों में तेंदुआ की दहशत भी। करीब 48 घटे के बाद दहशत से औरंगाबाद क्षेत्र के निवासियों को राहत मिली थी। तेंदुआ को पकड़ने के लिए जाल लगाया गया था लेकिन 17 फरवरी को सुबह पाच बजे जाल काटकर बाहर आ गया था। तड़के आबादी में उसके घुसते ही हड़कंप मच गया था। छतों तक पहुंच गए तेंदुए ने तीन लोगों को जख्मी कर दिया था। मौके पर पहुंचे आशियाना एसएचओ त्रिलोकी सिंह ने तेंदुए का पीछा किया था और कई फायर किए थे। इस दौरान तेंदुए ने एसएचओ पर भी हमला कर दिया था और वह जख्मी हो गए थे। इसके बाद थानाध्यक्ष की तरफ से चलाई गई गोली में तेंदुआ मारा गया था। तेंदुआ एक घर में जाकर छिप गया था। तेंदुए ने 17 फरवरी करीब आठ बजे सबसे पहले मुन्ना नाम के आदमी पर हमला किया और फिर इंटर के छात्र मो. रजी को निशाना बनाया। महिला तैरुन निशा पर हमला कर वह घर की छतों पर चढ़ गया था।

थानाध्यक्ष आशियाना ने फायर किया था, लेकिन उसे गोली नहीं लगी थी और तेंदुआ नाले से सटे शरीफ खान के घर में चढ़ गया था। छत से तेंदुआ नीचे घर में उतर गया, इतने में थानाध्यक्ष भी उसके पीछे-पीछे भागकर पहुंच गए थे तो तेंदुए ने उन पर भी हमला कर हाथ व सिर में चोट पहुंचाई। तेंदुआ जिस समय शरीफ के घर में घुसा था उस समय बच्चे स्कूल जाने को तैयार हो रहे थे। घरवालों को तेंदुए की दहाड़ सुनाई दी परिवार वालों ने बच्चों को एक कमरे में ले जाकर बंद कर दिया था। थानाध्यक्ष ने दो फायर किए थे और तेंदुआ जख्मी हो गया। घायल तेंदुआ घर के किचन में घुसा तो थानाध्यक्ष ने किचन का दरवाजा बंद कर दिया था। मौके पर पहुंची रेस्क्यू टीम को किचन में तेंदुआ मृत मिला था।

आरोप सिद्ध तो तीन से सात साल तक की सजा :

कोर्ट में आरोप सिद्ध होने पर थानाध्यक्ष समेत अन्य पुलिस कर्मियों को तीन से सात साल की सजा हो सकती है। दरअसल, वन्यजीव संरक्षण अधिनियम-1972 की धारा नौ,11 और 51 में सजा का अलग अलग प्रावधान हैं। इसमे तेंदुआ शेड्यूल श्रेणी वन का वन्यजीव है और शेड्यूल श्रेणी वन का वन्यजीव को मारे जाने का दोषी पाए जाने पर तीन से सात साल की सजा का प्रावधान है।

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