तेजस्वी यादव ने कहा – महागठबंधन हिमालय की तरह रहेगा अटूट और मजबूत…

NDA के राष्ट्रपति उम्मीदवार रामनाथ कोविंद का जिस तरीके से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने समर्थन किया है उसके बाद बिहार में महागठबंधन के ऊपर संकट के बादल छाने लगे हैं. जेडीयू और आरजेडी के बीच लगातार बयानबाजी हो रही है. एक और जहां आरजेडी के नेता नीतीश कुमार को लगातार आड़े हाथों ले रहे हैं. वहीं जदयू भी राजद नेताओं के बयान बाजी का जवाब दे रहा है. इन सबके बीच उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने दोनों दलों के बीच तनातनी को शांत करने की कोशिश की है. तेजस्वी ने कहा है कि बिहार में महागठबंधन हिमालय की तरह अटूट और मजबूत है.तेजस्वी यादव ने कहा - महागठबंधन हिमालय की तरह रहेगा अटूट और मजबूत...AAP सरकार अब GST लागू होने के बाद छोटे व्यापारियों से कराएगी ट्रेनिंग..

तेजस्वी ने कहा कि बिहार के महागठबंधन के नेताओं के बीच बेहतर समन्वय है. बिहार की न्यायप्रिय जनता ने महागठबंधन की नीतियों और कार्यक्रमों को अपार समर्थन और अनंत सम्मान के रूप में ऐतिहासिक बहुमत दिया है. ऐसे में वे इस बहुमत की वजह से जनता के सरोकारों के प्रति पूरी तरह समर्पित व प्रतिबद्ध हैं. वे आगे कहते हैं बीजेपी और उनके समर्थक संस्थानों को उनकी एकता हजम नहीं हो रही है. गठबंधन के भी कुछ नेता व्यक्तिगत हितों को लेकर अनावश्यक बयानबाजी करते रहते है ताकि खबरों में बने रहे.

भाजपा समर्थित मीडिया का भी एक वर्ग जिस दिन से महागठबंधन बना है उसी दिन से महागठबंधन के खिलाफ दुष्प्रचार में लगा हुआ है. शायद ही कोई ऐसा दिन हो जब उन्होंने यह रिपोर्ट किया हो कि महागठबंधन मजबूत है. महागठबंधन एकजुट है और बिहार के लिए समर्पित है. बीजेपी उनका समर्थन इसलिए नहीं करती क्योंकि महागठबंधन का विचार उनके सरोकारों को पूरा नहीं करता. महागठबंधन के बने रहने की वजह से होने वाली बैचनी और टूटने के ख्याली पुलाव खाने की बेकरारी में वे अपनी उर्जा का निवेश करते रहते हैं. वे कहते हैं कि सबकी पेशेगत मजबूरियां या वैचारिक मान्यताएं होती हैं और लोकतंत्र में इसका भी सम्मान होना चाहिए.

पार्टी में चल रही बयान बाजी पर तेजस्वी ने कहा कि हर दल में कुछ ऐसे व्यक्ति होते है जो मैंडेट या जनभावना का समर्थन ना करके अपने निजी हितों को सर्वोपरि रखते हैं. ऐसे लोगों की अपनी व्यक्तिगत धारणाएं और पीड़ाएं होती है जिन्हें वे मीडिया के मार्फत दल और गठबंधन से जोड़ देते हैं. हालांकि वास्तविकता में ऐसा नहीं है. मीडिया में किसी दल का मंतव्य केवल उसके आधिकारिक प्रवक्ता ही दे सकते हैं.
वे कहते हैं कि उनके दल की तरफ से सभी मीडिया प्रतिष्ठानों को प्रदेश अध्यक्ष की तरफ से कई बार चिट्ठी भी भेजी जा चुकी है. उसमें स्पष्ट रूप से यह कहा गया है कि केवल नामित प्रवक्ता ही पार्टी से सम्बद्ध मसलों पर आधिकारिक बयान देने के लिए अधिकृत हैं लेकिन फिर भी उस निवेदन और सूचना का पालन उनके द्वारा नहीं किया जाता और वो अपने पसंद के अनाधिकृत व्यक्ति से बयान लेकर उसे पार्टी का आधिकारिक बयान बताकर चला देते हैं. मीडिया को भी मिर्च-मसाला चाहिए होता है इसलिए ऐसे व्यक्ति का बयान चलाते हैं जो पार्टी की तरफ से बोलने के लिए नामित नहीं है.

वे आगे कहते हैं कि कुछ ऐसे लोगों पर पार्टी की तरफ से अनुशासनात्मक कार्रवाई हुई है और आगे से किसी के उल्लंघन पर भी कार्रवाई होगी. वे कहते हैं कि उनकी पार्टी भले ही मास पार्टी हो लेकिन वे अनुशासन से कोई समझौता नहीं करेंगे और किसी के निजी मंतव्य और हित को पार्टी के मत से जोड़ने की कोशिश करने वाले पर कार्रवाई करेंगे. गठबंधन पर बयान देने का अधिकार किसी विधायक या नेता के बजाय सिर्फ राष्ट्रीय अध्यक्ष के पास सुरक्षित है. किसी भी सूरत में गठबंधन से सम्बद्ध मामला तीनों पार्टियों के राष्ट्रीय अध्यक्षों का मसला है. ऐसे में उस पर किसी प्रकार की टिप्पणी करना शोभनीय नहीं है. अगर किसी को किसी प्रकार की परेशानी है तो मीडिया के बजाय सम्बंधित प्लेटफॉर्म पर ही उसकी बात की जानी चाहिए. वे इसे लेकर अत्यंत गंभीर हैं.

उन्होंने आगे कहा कि महागठबंधन हिमालय की तरह मजबूत और अटूट है. बिहार जीतने की भाजपाई मंशा कभी पूरी नहीं होने वाली है. बिहार का महागठबंधन तो देश की वर्तमान राजनीति का सबसे सुनहरा एवं सकारात्मक अध्याय है. इसी महागठबंधन की देन है कि नवंबर 2015 से लेकर मार्च 2017 तक देश अमन चैन और भाईचारे से जी रहा था अन्यथा यूपी चुनाव के बाद से तो पूरा देश में अराजकता और दहशत के माहौल में ही जी रहा है. कब तीन लोगों का झुंड किस व्यक्ति को धर्म, भोजन, पहनावे या छद्म राष्ट्रवाद के नाम पर मार दें कौन जानता है? 

बीजेपी प्रायोजित भीड़ ने लोकतंत्र को डरतंत्र में तब्दील कर दिया है. इसलिए पूरे देश के क्षेत्रीय दलों पर वहां की न्यायप्रिय व अमनपसंद जनता का भी दबाब है कि वो बिहार की तरह महागठबंधन करें और देश तोड़ने वाली फासिस्ट ताकतों को परास्त करें. जो लोग महागठबंधन टूटने की आशा कर रहे है उनके लिए इतना ही कहना है कि यह सपना पूरा नहीं होने वाला है. 2019 में बीजेपी को हराने में महागठबंधन की सबसे अहम भूमिका होगी. देश और संविधान बचाने के लिए वे सभी समतावादी और समाजवादी दलों को एकसाथ लाने का प्रयास कर रहे है.

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