तो तब से ही भगवान बजरंग बली को पसंद आ गया सिन्दूर

भगवान बजरंग बली की अगर बात करें, तो यह अपने भक्तों के संकट हरने वाले माने जाते हैं। इनका दिन मंगलवार का है, इस दिन अगर पूरे भक्ति भाव से हनुमान जी की आराधना की जाए, तो निश्चित ही भगवान बजरंग बली की कृपा मिलती है। अगर आप भी भगवान बजरंग बली की कृपा पाना चाहते है, तो मंगलवार के दिन भगवान बजरंग बली को सिन्दूर अर्पित करें, क्योंकि भगवान बजरंग बली को सिन्दूर अति प्रिय है। अब आप ही सोचते होंगे की आखिर ऐसा क्या हुआ होगा, जो भगवान बजरंग बली को सिन्दूर इतना प्रिय है? तो चलिए जानते हैं इससे ही जुड़ी एक कथा के बारे में..भगवान बजरंग बली की अगर बात करें, तो यह अपने भक्तों के संकट हरने वाले माने जाते हैं। इनका दिन मंगलवार का है, इस दिन अगर पूरे भक्ति भाव से हनुमान जी की आराधना की जाए, तो निश्चित ही भगवान बजरंग बली की कृपा मिलती है। अगर आप भी भगवान बजरंग बली की कृपा पाना चाहते है, तो मंगलवार के दिन भगवान बजरंग बली को सिन्दूर अर्पित करें, क्योंकि भगवान बजरंग बली को सिन्दूर अति प्रिय है। अब आप ही सोचते होंगे की आखिर ऐसा क्या हुआ होगा, जो भगवान बजरंग बली को सिन्दूर इतना प्रिय है? तो चलिए जानते हैं इससे ही जुड़ी एक कथा के बारे में..  सभी जानते हैं कि तुलसी भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है और उनके सभी अवतारों को ये चढ़ाई जाती है। हनुमान विष्णु जी के एक अवतार श्रीराम के परम भक्त हैं और तुलसी चढ़ाने से श्री राम भी अत्यंत प्रसन्न होते हैं, जाहिर है हनुमान जी भी भोजन के साथ तुलसी समर्पित करने से प्रसन्न होते हैं।   एक कथा के अनुसार माता सीता को अपने स्वामी श्री राम को प्रसन्न करने के लिए सिंदूर से मांग भरते देख कर हनुमान जी ने शरीर में ढेर सारा सिन्दूर लगा लिया था ताकि श्री राम उनसे भी स्नेह करें। तभी से हनुमान जी को सिन्दूर चढ़ाने की परंपरा शुरू हुई। ऐसी मान्यता है कि हनुमान जी को सिन्दूर और चमेली का तेल चढ़ाने से रोगों और शारीरिक व्याधियों से मुक्ति मिलती है।

सभी जानते हैं कि तुलसी भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है और उनके सभी अवतारों को ये चढ़ाई जाती है। हनुमान विष्णु जी के एक अवतार श्रीराम के परम भक्त हैं और तुलसी चढ़ाने से श्री राम भी अत्यंत प्रसन्न होते हैं, जाहिर है हनुमान जी भी भोजन के साथ तुलसी समर्पित करने से प्रसन्न होते हैं। 

एक कथा के अनुसार माता सीता को अपने स्वामी श्री राम को प्रसन्न करने के लिए सिंदूर से मांग भरते देख कर हनुमान जी ने शरीर में ढेर सारा सिन्दूर लगा लिया था ताकि श्री राम उनसे भी स्नेह करें। तभी से हनुमान जी को सिन्दूर चढ़ाने की परंपरा शुरू हुई। ऐसी मान्यता है कि हनुमान जी को सिन्दूर और चमेली का तेल चढ़ाने से रोगों और शारीरिक व्याधियों से मुक्ति मिलती है।

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